जंगली बैंगन की नई प्रजाति सोलनम पांडेयी
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संदर्भ:
हाल ही में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वैज्ञानिकों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जंगलों से जंगली बैंगन की एक नई प्रजाति (New Wild Brinjal Species) की खोज की है, जिसे आधिकारिक तौर पर सोलनम पांडेयी (Solanum Pandeyi) नाम दिया गया है।
सोलनम पांडेयी (Solanum Pandeyi) के बारे में:
- खोज का स्थान: इस नई पादप प्रजाति की खोज (Plant Species Discovery) मध्य अंडमान के सदाबहार जंगलों के किनारों पर खुले क्षेत्रों में की गई है।
- वर्गीकरण अनुसंधान (Taxonomy Research): यह प्रजाति मुख्य रूप से सोलनम लासियोकार्पम (Solanum lasiocarpum) और सोलनम वियोलेसियम (Solanum violaceum) के करीब मानी जाती है, जो सोलनम के कांटेदार समूह (Leptostemonum clade) से संबंधित है।
- शोध का प्रकाशन: इस वैज्ञानिक खोज (Scientific Discovery) का पूरा विवरण अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू जर्नल ‘फेड्डेस रेपर्टोरियम’ (Feddes Repertorium) में प्रकाशित एक शोध पत्र में सामने आया है।
- स्थानीय नाम: खोजे गए इस अनूठे जंगली बैंगन (Wild Eggplant) को स्थानीय स्तर पर ‘वाइल्ड ऑरेंज एगप्लांट’ (Wild Orange Eggplant) के नाम से भी जाना जाता है।
- नामकरण का आधार: इस वनस्पति का नाम दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रसिद्ध प्रोफेसर अरुण कुमार पांडे के सम्मान में ‘सोलनम पांडेयी’ रखा गया है, जिन्होंने पादप वर्गीकरण में अभूतपूर्व योगदान दिया है।
- आदिवासी उपयोग: अंडमान के मूल ‘ग्रेट अंडमानी’ (Great Andamanese) नेग्रिटो आदिवासी समुदाय इस पौधे का उपयोग भोजन और पारंपरिक औषधीय उद्देश्यों के लिए करते हैं।
- दंत चिकित्सा में लाभ: इस प्रजाति के बीजों और जड़ों का उपयोग स्थानीय स्तर पर दांतों के संक्रमण (Tooth Infection) के इलाज के लिए पारंपरिक चिकित्सा के रूप में किया जाता है।
- पारंपरिक चटनी: इस द्वीप पर बसे रांची और बंगाली समुदाय के लोग इसके पके फल को गुड़, मिर्च, लहसुन, अदरक और नमक के साथ मिलाकर एक विशेष खट्टी-मीठी चटनी बनाते हैं।
- आनुवंशिक क्षमता (Genetic Base): इस पौधे में असाधारण औषधीय और आनुवंशिक क्षमताएं हैं, जो इसे कृषि विज्ञान के लिए एक उत्कृष्ट जेनेटिक रिसोर्स बनाती हैं।
- रोग प्रतिरोधी क्षमता: भविष्य में पादप प्रजनक (Plant Breeders) इस आनुवंशिक आधार का उपयोग करके बैंगन की उच्च उपज देने वाली और रोगों से लड़ने वाली हाइब्रिड किस्में विकसित कर सकते हैं।
- भारत में स्थिति: दुनिया भर में सोलनम जीनस की लगभग 1,250 प्रजातियां हैं, जिनमें से भारत की अनूठी वनस्पति (Flora of India) के तहत अब तक जंगली बैंगन की लगभग 49 प्रजातियां दर्ज हैं।
- संरक्षण की स्थिति (Conservation Status): वर्तमान में डेटा की कमी के कारण इस स्थानिक प्रजाति (Endemic Species) की संरक्षण स्थिति को ‘डेटा अपर्याप्त’ (Data Deficient) श्रेणी में आंका गया है।
जंगली बैंगन की मुख्य प्रजातियाँ:
- सोलनम टोरवम (Solanum torvum): इसे ‘टर्की बेरी’ या ‘मटर बैंगन’ भी कहा जाता है। यह ग्राफ्टिंग के लिए सबसे उत्तम और लोकप्रिय प्रजाति मानी जाती है क्योंकि यह बहुत कठोर होती है और जमीन से होने वाली बीमारियों का शिकार नहीं होती।
- सोलनम इनकैनम (Solanum incanum): इसे जंगली भटा या ‘टालोंग-टालोंगान’ भी कहते हैं। यह फैलने वाली प्रजाति है जिसके फल छोटे और कड़वे होते हैं, लेकिन इसकी जड़ें अत्यधिक मजबूत होती हैं।
- सोलनम ज़ैंथोकार्पम (Solanum xanthocarpum): इसे ‘कंटकारी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक औषधीय जंगली बैंगन है जो पीली बेरी (फल) के रूप में होता है और आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
- सोलनम इन्सानम (Solanum insanum): यह खेती वाले बैंगन का ही एक जंगली और मूल रूप माना जाता है, जो मुख्य रूप से झाड़ियों और बंजर भूमि में उगता है।
FAQs:
1. सोलनम पांडेयी क्या है?
यह भारतीय वनस्पति विज्ञानियों द्वारा हाल ही में खोजी गई जंगली बैंगन की एक नई, कांटेदार और औषधीय गुणों से भरपूर प्रजाति है।
2. इसकी खोज कहाँ हुई?
इस दुर्लभ प्रजाति की खोज भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा भारत के जैविक हॉटस्पॉट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मध्य अंडमान सदाबहार जंगलों में की गई है।
3. यह नई प्रजाति क्यों महत्वपूर्ण है?
यह रोग प्रतिरोधी और उच्च उपज देने वाली बैंगन की नई व्यावसायिक फसलों को विकसित करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को एक बेहतरीन आनुवंशिक आधार प्रदान करती है।
4. इसका नाम सोलनम पांडेयी क्यों रखा गया?
यह नाम दिल्ली विश्वविद्यालय के पादप वर्गीकरण (Plant Taxonomy) विशेषज्ञ प्रोफेसर अरुण कुमार पांडे के वनस्पति विज्ञान में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के सम्मान में रखा गया है।
5. जैव विविधता संरक्षण में इसका क्या महत्व है?
यह खोज दर्शाती है कि द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र में कई अज्ञात प्रजातियां मौजूद हैं, जिनका पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) और भविष्य के चिकित्सा अनुसंधान के लिए दस्तावेजीकरण जरूरी है।
