Apni Pathshala

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन

UNCTAD

संदर्भ:

भारत 6 से 8 जुलाई 2026 तक जिनेवा, स्विट्जरलैंड के पैलेस डेस नेशन्स में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (UNCTAD) के ‘इंटरगवर्नमेंटल ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स (IGE) ऑन कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ एंड पॉलिसी’ के नौवें सत्र की अध्यक्षता कर रहा है। 

  • उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) की सचिव निधि खरे इस तीन दिवसीय उच्च स्तरीय रणनीतिक सत्र का नेतृत्व कर रही हैं। 

यूएनसीटीएडी (UNCTAD) के बारे में:

  • परिचय: संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (United Nations Conference on Trade and Development: UNCTAD), जिसे अब ‘UN Trade and Development’ के नाम से भी जाना जाता है, वैश्विक व्यापार और विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का एक प्रमुख स्थायी अंतर-सरकारी निकाय है।
  • स्थापना: वर्ष 1964 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा की गई।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड (पैलेस डेस नेशन्स)।
  • रिपोर्टिंग: यह सीधे UNGA और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) को रिपोर्ट करता है।
  • सदस्य देश: वर्तमान में इसके 195 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।
  • प्रकृति: यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (UNDG) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका अपना बजट और नेतृत्व होता है।
  • कार्य: 
    1. वैश्विक दक्षिण का समर्थन: विकासशील और अल्पविकसित देशों (LDCs) को वैश्विक अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से एकीकृत होने में मदद करना।
    2. नीति निर्माण: व्यापार, निवेश, वित्त, प्रौद्योगिकी और सतत विकास से संबंधित व्यापक नीतियां तैयार करना।
    3. थिंक टैंक: यह आर्थिक अनुसंधान और विश्लेषण के लिए एक ‘Global Think Tank’ के रूप में कार्य करता है।
    4. तकनीकी सहायता: सीमा शुल्क प्रणालियों (जैसे ASYCUDA) और क्षमता निर्माण में देशों को ऑन-ग्राउंड सहायता प्रदान करना।
  • प्रमुख रिपोर्ट्स: UNCTAD द्वारा नियमित रूप से निम्नलिखित वैश्विक रिपोर्ट जारी की जाती हैं: 
  1. विश्व निवेश रिपोर्ट (World Investment Report)
  2. व्यापार और विकास रिपोर्ट (Trade and Development Report)
  3. डिजिटल अर्थव्यवस्था रिपोर्ट (Digital Economy Report)
  4. अल्पविकसित देश रिपोर्ट (The Least Developed Countries Report) 
  • उपलब्धियां: 
    1. GSP की शुरुआत: विकासशील देशों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘Generalized System of Preferences‘ की अवधारणा विकसित की।
    2. उपभोक्ता संरक्षण: ‘इंटरगवर्नमेंटल ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स (IGE)’ के माध्यम से वैश्विक उपभोक्ता नीतियों और सीमा-पार सुरक्षा को मजबूती देना। 

सत्र के मुख्य बिंदु:

  • यूएन उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा सिद्धांतों का शुभारंभ (Launch of UN Consumer Product Safety Principles): इस सत्र में उन ऐतिहासिक सिद्धांतों को आधिकारिक रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है, जिन्हें दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा मंजूरी दी गई थी। 
  • सीमा-पार विवाद समाधान (Cross-Border Consumer Dispute Resolution): ई-कॉमर्स (E-commerce) के युग में वैश्विक उपभोक्ताओं को सीमा-पार धोखाधड़ी से बचाने के लिए ‘Grievance Redressal Mechanism’ को मजबूत करना। 
  • सतत उपभोग (Sustainable Consumption): पर्यावरण अनुकूल उपभोग प्रवृत्तियों और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को वैश्विक बढ़ावा देना।
  • उपभोक्ता सूचना और डिजिटल साक्षरता (Consumer Information & Digital Literacy): डिजिटल एकाधिकार और भ्रामक विज्ञापनों (Dark Patterns) के खिलाफ उपभोक्ताओं को ‘Information Empowerment’ प्रदान करना।
  • भारत: भारत ने इस मंच पर अपने घरेलू डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता को ‘Global Best Practice’ के रूप में प्रस्तुत किया है:
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – NCH): भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जानकारी दी कि NCH ने बीते 14 महीनों में 36 से अधिक विविध क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के 91.77 करोड़ रुपये से अधिक की वापसी (Refund) सुनिश्चित की है। 
  • यह डेटा प्रदर्शित करता है कि भारत का ‘Consumer Redressal Ecosystem’ वैश्विक स्तर पर कितना मजबूत और अनुकरणीय हो चुका हैं।

भारत की अध्यक्षता का कूटनीतिक महत्व:

  • वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व (Voice of the Global South): भारत विकासशील देशों के डिजिटल और भौतिक बाजारों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक संतुलित वैश्विक नीति (Balanced Global Policy) की वकालत कर रहा है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत कर रहा है।
  • सॉफ्ट पावर में वृद्धि (Enhancement of Soft Power): सीमा-पार विवादों को सुलझाने में भारत की तकनीकी क्षमता (जैसे- ONDC, UPI और NCH) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।
  • बहुपक्षवाद को बढ़ावा (Strengthening Multilateralism): वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी बहुपक्षीय कूटनीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

FAQs:

  1. UNCTAD क्या है?

    यह व्यापार, निवेश और विकास मुद्दों से निपटने वाला संयुक्त राष्ट्र (UN) का एक स्थायी अंतर-सरकारी निकाय है। 

  2. UNCTAD की स्थापना कब हुई थी?

    इसकी स्थापना वर्ष 1964 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा एक स्थायी संस्था के रूप में की गई थी। 

  3. इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

    विकासशील देशों के व्यापार, निवेश और नीतिगत अवसरों को बढ़ाकर उनका सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।

  4. विकासशील देशों के लिए UNCTAD क्यों महत्वपूर्ण है?

    यह वैश्विक मंचों पर उनकी आवाज़ उठाता है और उन्हें निष्पक्ष व्यापार नियमवित्तीय सहायता दिलाने में मदद करता है।

  5. वैश्विक व्यापार में UNCTAD की क्या भूमिका है?

    यह आर्थिक अनुसंधान (Research) करता है, नीतियां बनाता है और देशों को वैश्विक व्यापार प्रणालियों में एकीकृत करता है। 

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top