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नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन

नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन

National Critical Minerals Mission

Image Credit: Sputnik India

संदर्भ:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ (Critical Mineral Mission) के तहत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को चीन के एकाधिकार से मुक्त करने के लिए विश्व स्तर पर 35 देशों के साथ एक मजबूत रणनीतिक नेटवर्क तैयार किया है, जिसमें से 24 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते (MoUs) संपन्न हो चुके हैं और 11 अन्य देशों के साथ अंतिम दौर की वार्ता जारी है। 

नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन क्या है?

  • परिचय: नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (National Critical Mineral Mission – NCMM) भारत सरकार की एक रणनीतिक और एकीकृत फ्लैगशिप योजना है।
    • इस मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई थी।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 29 जनवरी 2025 को इसे आधिकारिक मंजूरी दी।
  • उद्देश्य: इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य भारत की दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा (Mineral Security) सुनिश्चित करना, आयात पर निर्भरता को कम करना और उच्च तकनीक, रक्षा तथा स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) उद्योगों के लिए आत्मनिर्भरता हासिल करना है। 
  • संचालन: यह मिशन वित्त वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक 7 वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया है।
    • इसके अंतर्गत भारत सरकार ने देश की आर्थिक उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य 30 महत्वपूर्ण खनिजों की आधिकारिक सूची जारी की है,
  • लागत: इसके लिए ₹34,300 करोड़ का कुल परिव्यय (Outlay) निर्धारित है (जिसमें ₹16,300 करोड़ बजटीय सहायता और ₹18,000 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा निवेश शामिल है)। 
  • मुख्य कार्यक्षेत्र: NCMM मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के सभी पाँच प्रमुख चरणों को कवर करता है:
  1. अन्वेषण (Exploration): नए खनिज भंडारों की पहचान करना।
  2. खनन (Mining): ऑनशोर और अपतटीय (Offshore) दोनों क्षेत्रों से सुरक्षित निष्कर्षण।
  3. बेनिफिशिएशन (Beneficiation): अयस्क की गुणवत्ता में सुधार करना।
  4. प्रसंस्करण (Processing): कच्चे माल को रिफाइन कर औद्योगिक उपयोग के योग्य बनाना।
  5. पुनर्चक्रण (Recycling): अनुपयोगी उत्पादों (End-of-life products) से खनिजों की रिकवरी।
  • मंत्रालय: यह मिशन ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण पर काम करता है—अर्थात खान मंत्रालय (Nodal Authority), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, विदेश मंत्रालय, और निजी क्षेत्र मिलकर रणनीतिक कूटनीति और तकनीक साझा करते हैं।
  • रणनीतिक लक्ष्य: मिशन के अंतर्गत महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं:
    1. 1,200 घरेलू अन्वेषण परियोजनाएं: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) को देश के भीतर और अपतटीय क्षेत्रों में 1,200 नए खोज प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
    2. 100 से अधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी: देश के भीतर कम से कम 100 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों का आवंटन व्यावसायिक खनन के लिए करना।
    3. 1,000 पेटेंट का लक्ष्य: आरएंडडी (R&D) और अनुसंधान को बढ़ावा देकर खनिज प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में 2031 तक 1,000 पेटेंट हासिल करना।
    4. विदेशी संपत्तियों का अधिग्रहण: भारतीय कंपनियों (जैसे KABIL) के माध्यम से दुनिया भर में कम से कम 50 रणनीतिक खनिज संपत्तियों/खानों को खरीदना।
    5. राष्ट्रीय खनिज स्टॉकपाइल (Strategic Stockpiling): वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने पर देश को झटकों से बचाने के लिए कम से कम 5 सबसे महत्वपूर्ण खनिजों का एक ‘आपातकालीन राष्ट्रीय बफर स्टॉक’ तैयार करना।
  • 7 उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence – CoEs): मिशन के तहत देश के सात प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को ‘उत्कृष्टता केंद्र’ नामित किया गया है।
    • इनमें IIT बॉम्बे, IIT हैदराबाद, IIT (ISM) धनबाद, IIT रुड़की, CSIR-IMMT भुवनेश्वर, CSIR-NML जमशेदपुर, और NFTDC हैदराबाद शामिल हैं। 
    • ये संस्थान लिथियम, निकल, टंगस्टन और वैनेडियम जैसी जटिल धातुओं के निष्कर्षण के लिए नई स्वदेशी तकनीकों पर शोध कर रहे हैं।
  • रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना (Incentive Scheme for Recycling): शहरी खनन (Urban Mining) को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई है।
    • इसका लक्ष्य ई-कचरा (E-waste) और लिथियम-आयन बैटरी स्क्रैप को रीसायकल करके सालाना 400 किलोटन मूल्यवान खनिज वापस प्राप्त करना है। 
  • फास्ट-ट्रैक विनियामक मंजूरी: क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी खनन और प्रसंस्करण परियोजनाओं के लिए पर्यावरण और वन मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और तीव्र (Fast-track approval) किया गया है।
  • सीमा शुल्क में ऐतिहासिक कटौती: सरकार ने लिथियम, कोबाल्ट, तांबा और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों सहित 25 से अधिक महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर मूल सीमा शुल्क (Customs Duty) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
  • प्रस्तावित टैक्स हॉलिडे: वित्त मंत्रालय को सौंपे गए प्रस्तावों के तहत इस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए टैक्स हॉलिडे, त्वरित मूल्यह्रास (Accelerated Depreciation) और रियायती टैक्स ढांचे की रूपरेखा तैयार की गई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
    1. खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP): भारत इस अमेरिकी-नेतृत्व वाले वैश्विक ब्लॉक का हिस्सा है जो चीन के प्रभुत्व वाली सप्लाई चेन का विकल्प तैयार कर रहा है।
    2. द्विपक्षीय समझौते: भारत की ‘काबिल’ (KABIL) कंपनी ने अर्जेंटीना में 5 लिथियम ब्लॉकों के अन्वेषण के लिए समझौते किए हैं।
      • भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चिली, इंडोनेशिया और अफ्रीकी देशों सहित 24 देशों के साथ ‘क्रिटिकल मिनरल एग्रीमेंट’ किए हैं। 
      • इसके तहत चिली और अर्जेंटीना में लिथियम ब्लॉक के अधिग्रहण (Lithium India) और ऑस्ट्रेलिया में कोबाल्ट अन्वेषण (Mineral Exploration) पर कार्य तेज हो चुका है।

महत्व:

  • ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और 2070 तक ‘नेट-जीरो’ कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
    • सोलर पैनल, विंड टरबाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण के लिए ये खनिज अनिवार्य हैं।
  • चीन के एकाधिकार को तोड़ना: वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REEs) और लिथियम प्रोसेसिंग पर चीन का एकछत्र नियंत्रण है। एनसीएमएम भारत को इस कूटनीतिक ब्लैकमेलिंग के जोखिम से सुरक्षित करता है।

प्रमुख खनिज और उनकी उपयोगिता:

  • लिथियम (Lithium): इलेक्ट्रिक वाहनों (EV Battery Minerals) और ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज के लिए लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण। 
  • कोबाल्ट और निकल (Cobalt & Nickel): हाई-एनर्जी डेंसिटी बैटरियों और सुपर-अलॉय के निर्माण के लिए आवश्यक।
  • रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Minerals): नियोडिमियम और डिस्प्रोसियम जैसे 17 तत्व, जिनका उपयोग पवन टरबाइन के स्थायी चुंबक, लड़ाकू जेट और स्मार्टफोन के निर्माण में होता है।
  • गैलियम और जर्मेनियम (Gallium & Germanium): अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स, ट्रांजिस्टर और सौर पैनलों (Green Energy) के निर्माण के लिए बुनियादी इनपुट।

FAQs:

  1. क्रिटिकल मिनरल मिशन क्या है?

    यह भारत की तकनीकी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे 30 रणनीतिक खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने का राष्ट्रीय मिशन है।

  2. भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

    ये खनिज सेमीकंडक्टर निर्माण, रक्षा उपकरण, स्मार्टफोन, अंतरिक्ष मिशन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण के लिए बुनियादी तौर पर आवश्यक हैं।

  3. इस मिशन का उद्देश्य क्या है?

    इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर खनिज अन्वेषण-खनन को गति देना, आयात शुल्क घटाना और विदेशों में रणनीतिक खानों का अधिग्रहण करना है।

  4. किन खनिजों को क्रिटिकल मिनरल माना जाता है?

    लिथियम, कोबाल्ट, निकल, गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट और नियोडिमियम सहित 30 दुर्लभ धातुओं को क्रिटिकल मिनरल माना गया है।

  5. यह मिशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कैसे मदद करेगा?

    यह मिशन सौर पैनल, पवन टरबाइन और ईवी बैटरियों के लिए कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर भारत को स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा।

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