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Ken Betwa Protest: केन-बेतवा परियोजना के विरोध में जनजातीय महिलाओं का ‘चिता आंदोलन’

Ken Betwa Protest: केन-बेतवा परियोजना के विरोध में जनजातीय महिलाओं का ‘चिता आंदोलन’

Ken Betwa Protest

संदर्भ:

हाल ही में मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में जनजातीय महिलाओं द्वारा ‘चिता आंदोलन’ (Pyre Protest) को दोबारा तीव्र कर दिया गया है। केन-बेतवा विरोध (Ken Betwa Protest) का यह अनूठा स्वरूप विकास और जनजातीय अधिकारों के बीच संतुलन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। 

केन-बेतवा लिंक परियोजना (Ken Betwa Link Project) के बारे मे:

  • परिचय: यह भारत की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना (River Linking Project) है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश (MP) की केन नदी के अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश (UP) की बेतवा नदी में स्थानांतरित करके सूखाग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्रदान करना है।
  • लागत: लगभग ₹44,000 करोड़ की इस परियोजना का 90% खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
  • निर्माण: इस केन-बेतवा नदी जोड़ो (Ken Betwa River Link) योजना के तहत केन नदी के अधिशेष जल को 221 किमी लंबी नहर के माध्यम से बेतवा बेसिन में स्थानांतरित किया जाएगा।
    • इसके लिए छतरपुर में दौधन बांध (Daudhan Dam) का निर्माण किया जा रहा है।
  • प्रमुख चरण: पहले चरण में दौधन बांध परिसर, केन-बेतवा लिंक नहर और पावरहाउस का निर्माण शामिल है।
    • दूसरे चरण में लोअर ओर्र बांध (Lower Orr Dam), बीना कॉम्प्लेक्स और कोटा बैराज का विकास शामिल है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव (Regional Impact): यह महत्वाकांक्षी बुंदेलखंड परियोजना (Bundelkhand Project) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त जिलों (जैसे छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, बांदा, महोबा) की 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचेगी और 62 लाख लोगों को पेयजल प्रदान करेगी।
    • इससे लगभग 10 जिलों के 8 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई हेतु पेयजल की आपूर्ति होगी। इसके अलावा, 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा।
  • पारिस्थितिकी चिंताएं (Ecological Concerns): इस नदी अंतर्संबंध भारत (River Interlinking India) परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाएगा।
    • इससे बाघों, घड़ियालों और गिद्धों के आवास नष्ट होने का खतरा है। इसके अतिरिक्त, लगभग 20 लाख पेड़ों की कटाई से स्थानीय पर्यावरण प्रभावित होगा, जिससे यह एक गंभीर पर्यावरणीय विरोध (Environmental Protest) बन गया है।
  • विस्थापन संकट: दौधन बांध के कारण लगभग 21 से 24 गाँव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएंगे, जिससे हजारों जनजातीय परिवारों के जनजातीय अधिकार (Tribal Rights) और आजीविका खतरे में हैं।

‘चिता आंदोलन’ क्या है?

  • परिचय: यह आंदोलन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश की गोंड और कोल जनजातियों की महिलाओं के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। 
  • प्रतीकात्मक प्रतिरोध (Symbolic Resistance): जनजातीय महिलाएं जलती और सूखी चिताओं पर लेटकर और प्रतीकात्मक फंदा डालकर जनजातीय महिला विरोध (Tribal Women Protest) को प्रदर्शित कर रही हैं। उनका मानना है कि बिना उचित पुनर्वास के विस्थापन उनके अस्तित्व और संस्कृति के लिए मृत्युदंड के समान है।
  • प्रमुख मांगें (Primary Demands): केन-बेतवा विरोध (Ken Betwa Protest) में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग ‘भूमि के बदले भूमि’ (Land-for-land) की ठोस नीति, महिलाओं के लिए समान मुआवजा अधिकार और विस्थापन से पहले पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना है।
  • दमन और कानूनी उल्लंघन: आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती CrPC 144) लगाकर उनके भोजन-पानी की आपूर्ति रोकी गई।
    • साथ ही पेसा अधिनियम (PESA Act) और वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत ग्राम सभाओं की अनिवार्य सहमति की अनदेखी की गई है। 
  • सरकार का पक्ष: सरकार के अनुसार, यह परियोजना बुंदेलखंड की जल सुरक्षा के लिए आवश्यक है और प्रभावितों के लिए उन्नत पुनर्वास पैकेज तथा अतिरिक्त लाभ स्वीकृत किए गए हैं। 

FAQs:

Q.1. केन-बेतवा परियोजना क्या है?

Ans: यह भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में भेजना है।

Q.2. जनजातीय महिलाएं इसका विरोध क्यों कर रही हैं?

Ans: वे अपर्याप्त मुआवजे, दोषपूर्ण पुनर्वास नीति और उचित सहमति के बिना अपनी पैतृक भूमि और आजीविका छिन जाने के कारण इसका तीव्र विरोध कर रही हैं। 

Q.3. ‘चिता आंदोलन’ क्या है?

Ans: यह विस्थापित आदिवासियों का एक शांतिपूर्ण आंदोलन है, जिसमें महिलाएं अपनी संस्कृति और जमीन खोने के दर्द को दर्शाने के लिए प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटती हैं। 

Q.4. परियोजना से किन क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा?

Ans: इससे सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र लाभान्वित होगा, लेकिन पन्ना टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र और आसपास के 24 जनजातीय गाँव जलमग्न होकर विस्थापित हो जाएंगे।

Q.5. सरकार का इस पर क्या पक्ष है?

Ans: सरकार के अनुसार, यह परियोजना बुंदेलखंड की जल सुरक्षा के लिए आवश्यक है और प्रभावितों के लिए उन्नत पुनर्वास पैकेज तथा अतिरिक्त लाभ स्वीकृत किए गए हैं।

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