भारत में डेंगू की पहली QDENGA Vaccine को मिली मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा (QDENGA Vaccine) को भारत में बाजार विपणन (Market Authorization) की मंजूरी दी।
क्यूडेंगा वैक्सीन (QDENGA Vaccine) के बारे मे:
- स्वरूप: क्यूडेंगा (तकनीकी नाम: TAK-003) एक लाइव-अटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन (Live-attenuated Tetravalent Dengue Vaccine) है।
- तकनीक: इसे रीकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology) का उपयोग करके ‘वेरो कोशिकाओं’ (Vero Cells) में तैयार किया गया है।
- यह आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (Genetically Modified Organisms – GMOs) की श्रेणी में आती है।
- मूल निर्माता: इस जीवन रक्षक टीके का विकास जापान की अग्रणी दवा कंपनी टाकेडा फार्मास्यूटिकल्स (Takeda Pharmaceutical) द्वारा किया गया है।
- लॉन्च और विस्तार: इसे पहली बार वर्ष 2022 में यूरोपीय संघ में अनुमोदित किया गया था। वर्तमान में भारत सहित विश्व के 43 देशों में इसे विनियामक मंजूरी मिल चुकी है।
- इस वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ (WHO) द्वारा प्रीक्वालिफिकेशन (Prequalification) प्राप्त है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की पुष्टि करता है।
- कार्य प्रणाली:
- सीरोटाइप कवरेज: यह डेंगू वायरस (DENV) के चारों हानिकारक उपभेदों/सीरोटाइप्स—DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4 के विरुद्ध व्यापक प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया (Immune Response) विकसित करती है।
- आधार संरचना: इस वैक्सीन का मुख्य ढांचा (Backbone) डेंगू वायरस टाइप-2 पर आधारित है, जिस पर अन्य तीन प्रकारों के सतह प्रोटीन को इंजीनियर किया गया है।
- खुराक अनुसूची: इसे त्वचा के ठीक नीचे सबक्यूटेनियस इंजेक्शन (Subcutaneous Injection) के रूप में 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकों में दिया जाता है। दोनों खुराकों के बीच तीन महीने का अंतराल (0 और 3 महीने) होना अनिवार्य है।
- विशिष्ट विशेषताएं:
- पूर्व-परीक्षण की आवश्यकता नहीं (No Pre-vaccination Screening): सनोफी कंपनी की पुरानी वैक्सीन ‘डेंगवैक्सिया’ (Dengvaxia) के विपरीत, क्यूडेंगा लगवाने से पहले व्यक्ति के रक्त परीक्षण (Blood Test) की आवश्यकता नहीं होती।
- व्यापक उपयोग: यह उन लोगों को भी सुरक्षित रूप से दी जा सकती है जिन्हें पहले कभी डेंगू का संक्रमण नहीं हुआ है (Seronegative Individuals)। यह एंटीबॉडी-डिपेंडेंट एनहांसमेंट (ADE) के जोखिम को न्यूनतम करती है।
- अस्पताल में भर्ती होने से सुरक्षा: क्लिनिकल परीक्षणों (Clinical Trials) में इसने गंभीर डेंगू मामलों और अस्पताल में भर्ती होने की दर को 90.4% तक कम करने में सफलता दिखाई है।
- भारत में मंजूरी:
- आयु सीमा: भारत में इसे 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों और वयस्कों के लिए स्वीकृत किया गया है।
- विधिक ढांचा: यह मंजूरी औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) के कड़े वैज्ञानिक मूल्यांकन और भारत में आयोजित फेज-III क्लीनिकल ट्रायल (Phase-III Clinical Trial) के सुरक्षा डेटा के आधार पर दी गई है।
- स्वदेशी विनिर्माण साझेदारी: टाकेडा ने भारत में टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई (Biological E) के साथ साझेदारी की है, जो भारत में सालाना 50 मिलियन (5 करोड़) खुराक का उत्पादन करेगी।
- भारत में यह वैक्सीन आधिकारिक तौर पर 2027 की पहली छमाही में निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है।
भारत के लिए इस वैक्सीन का महत्व:
- वैश्विक बीमारी के बोझ को कम करना (Reducing Global Disease Burden): भारत दुनिया के कुल डेंगू बोझ का लगभग एक-तिहाई (One-third) हिस्सा वहन करता है। इस वैक्सीन की उपलब्धता भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों को वैश्विक स्तर पर सुधारेगी।
- सर्दियों और मानसून के प्रकोप पर नियंत्रण (Controlling Monsoon Outbreaks): भारत में हर साल मानसून के बाद डेंगू के मामलों में ग्यारह गुना (11-fold) तक की तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है। यह वैक्सीन (Dengue Prevention) मौसमी महामारी के चक्र को तोड़ने में सक्षम है।
- स्वास्थ्य अवसंरचना पर दबाव में कमी (Alleviating Healthcare Infrastructure Stress): महामारी के चरम मौसम में देश के सरकारी और निजी अस्पतालों के बेड पूरी तरह भर जाते हैं। गंभीर डेंगू में 90.4% की गिरावट आने से प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर वित्तीय और भौतिक दबाव बेहद कम हो जाएगा।
- आर्थिक नुकसान से बचाव (Preventing Economic Out-of-Pocket Expenditure): डेंगू के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को प्लेटलेट्स चढ़वाने और अस्पताल में भर्ती होने पर भारी जेब खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) करना पड़ता है। सार्वभौमिक टीकाकरण (Immunization) से परिवारों को वित्तीय बोझ से बचाया जा सकेगा।
- सरल प्रशासनिक क्रियान्वयन (Simplified Immunization Rollout): पूर्व-टीकाकरण रक्त जांच की अनिवार्यता समाप्त होने से भारत के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाना प्रशासनिक रूप से अत्यंत सुगम और किफायती हो जाएगा।
- राष्ट्रीय कार्यक्रम को मजबूती (Complementing NVBDCP): यह वैक्सीन भारत सरकार के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) के मौजूदा प्रयासों जैसे- मच्छर नियंत्रण, रोग निगरानी (Surveillance) और प्रारंभिक निदान को एक मजबूत पूरक वैज्ञानिक हथियार प्रदान करेगी।
- फार्मास्यूटिकल्स हब के रूप में भारत का उदय (Strengthening Global Vaccine Hub): बायोलॉजिकल ई द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किए जाने से भारत न केवल घरेलू मांग पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) के अन्य डेंगू प्रभावित गरीब देशों को भी टीकों की आपूर्ति कर ‘वैक्सीन कूटनीति’ (Vaccine Diplomacy) को मजबूत करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: QDENGA वैक्सीन क्या है?
उत्तर: यह जापानी कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित एक लाइव-अटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन (QDENGA Vaccine) है, जो डेंगू के चारों सीरोटाइप्स से सुरक्षा प्रदान करती है।
प्रश्न 2: भारत में QDENGA वैक्सीन को किसने मंजूरी दी?
उत्तर: भारत के केंद्रीय दवा नियामक निकाय CDSCO और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद इसे बाजार मंजूरी दी है।
प्रश्न 3: यह वैक्सीन किन लोगों के लिए उपयोगी है?
उत्तर: यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के उन सभी नागरिकों के लिए स्वीकृत है, चाहे उन्हें पहले डेंगू हुआ हो या नहीं।
प्रश्न 4: QDENGA वैक्सीन डेंगू से कितनी सुरक्षा प्रदान करती है?
उत्तर: क्लिनिकल परीक्षणों में यह सामान्य डेंगू के खिलाफ 80.2% और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में 90.4% तक प्रभावी पाई गई है।
प्रश्न 5: भारत में QDENGA वैक्सीन कब उपलब्ध होगी?
उत्तर: स्वदेशी निर्माता बायोलॉजिकल ई (Biological E) के सहयोग से यह वैक्सीन भारत के बाजारों और अस्पतालों में 2027 की पहली छमाही से उपलब्ध होना शुरू होगी।
