India Cultural Diplomacy – भारत ने जिनेवा में UNOG को पांच युवा मोर किए भेंट
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने 7 अगस्त 2026 को सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करते हुए जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOG) को चार नीले और एक दुर्लभ सफेद मोर सहित पांच युवा मोर उपहार स्वरूप भेंट किए।
भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (India’s Cultural Diplomacy):
- परिचय: यह किसी देश द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान (Cultural Exchange) का उपयोग करने की एक रणनीतिक प्रक्रिया है।
- इसके अंतर्गत कला, भाषा, इतिहास, संगीत, खान-पान, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग कूटनीतिक औजार के रूप में किया जाता है।
- यह राष्ट्र की सॉफ्ट पावर (Soft Power) का मुख्य आधार है।
- शुरुआत:
- प्राचीन काल: भारत की सांस्कृतिक पहुंच प्राचीन काल से ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (विश्व एक परिवार है) के दर्शन पर आधारित रही है। बौद्ध धर्म का दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रसार और चोल साम्राज्य द्वारा समुद्री व्यापार के जरिए भारतीय संस्कृति का विस्तार इसके शुरुआती उदाहरण हैं।
- स्वतंत्रता के बाद: आधिकारिक रूप से भारत ने वर्ष 1950 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (Indian Council for Cultural Relations – ICCR) की स्थापना की। इसके पहले अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आज़ाद थे।
- ICCR का मुख्य कार्य विदेशों में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना और सांस्कृतिक सहयोग (Cultural Cooperation) को संस्थागत रूप देना है।
- वर्तमान कूटनीतिक संबंध: आज भारत के दुनिया भर के 150 से अधिक देशों के साथ औपचारिक सांस्कृतिक समझौते (Cultural Agreements) हैं। भारत विदेशों में 35 से अधिक सक्रिय भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (Indian Cultural Centres Abroad) संचालित करता है।
- प्रकार: भारत अपनी कूटनीतिक पहुंच (India Global Outreach) के तहत विभिन्न सांस्कृतिक घटकों का उपयोग करता है:
- अध्यात्म और योग कूटनीति (Yoga Diplomacy): संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित करना भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक कूटनीतिक विजय है।
- धार्मिक और विरासत लिंक (Faith & Heritage Links): ‘बौद्ध कूटनीति’ (Buddhist Diplomacy) के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों को गहरा करना और ‘रामायण सर्किट’ के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव बढ़ाना।
- प्रवासी कूटनीति (Diaspora Diplomacy): दुनिया भर में फैले 3.2 करोड़ से अधिक अनिवासी भारतीयों (NRIs/PIOs) को भारत की सांस्कृतिक विरासत के दूत (Cultural Ambassadors) के रूप में जोड़ना।
- सिनेमा और कला (Bollywood & Art): भारतीय कला और संस्कृति (Indian Art and Culture) जैसे शास्त्रीय नृत्य, संगीत और बॉलीवुड फिल्मों के माध्यम से मध्य एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व में सांस्कृतिक पैठ बनाना।
- प्रतीकात्मक उपहार और जीव-जंतु कूटनीति (Fauna Diplomacy): राष्ट्रीय प्रतीकों को उपहार में देकर गहरे द्विपक्षीय ऐतिहासिक संबंधों को पुनर्जीवित करना।
- प्रमुख सांस्कृतिक उपहार:
- मोर कूटनीति (जिनेवा, 2026): भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने जिनेवा के ‘एरियाना पार्क’ (Ariana Park) परंपरा को बनाए रखने के लिए पांच मोर सौंपे।
- इससे पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी यहाँ मोरों का एक जोड़ा भेजा था। इन मोरों का नीला और सफेद रंग संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक ध्वज के रंगों के बिल्कुल अनुकूल है।
- महाबोधि वृक्ष के पौधे: भारत ने श्रीलंका, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों को शांति और साझा बौद्ध विरासत के प्रतीक के रूप में पवित्र बोधि वृक्ष के पौधे भेंट किए हैं।
- महात्मा गांधी की प्रतिमाएं: विश्व शांति और अहिंसा के संदेश के रूप में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) सहित 80 से अधिक देशों में गांधीजी की प्रतिमाएं स्थापित करवाई हैं।
- विरासत जीर्णोद्धार (Heritage Restoration): कंबोडिया के अंगकोर वाट मंदिर और लाओस के ‘वाटका फू’ मंदिर के संरक्षण के लिए भारत ने अपनी पुरातात्विक और वित्तीय विशेषज्ञता प्रदान की है, जो सांस्कृतिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- मोर कूटनीति (जिनेवा, 2026): भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने जिनेवा के ‘एरियाना पार्क’ (Ariana Park) परंपरा को बनाए रखने के लिए पांच मोर सौंपे।
सांस्कृतिक कूटनीति का रणनीतिक महत्व:
- विश्वास बहाली (Trust Building): यह पारंपरिक सैन्य या आर्थिक कूटनीति (Hard Power) की तुलना में विभिन्न देशों की आम जनता और सरकारों के बीच अधिक गहरा और टिकाऊ विश्वास पैदा करती है।
- अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में रणनीतिक लाभ: सॉफ्ट पावर (Indian Soft Power) के मजबूत होने से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के भारत के दावे को वैश्विक जनसमर्थन प्राप्त होता है।
- आर्थिक विकास (Economic Growth): सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ने से भारत में चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism), योग पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत की सांस्कृतिक कूटनीति क्या है?
उत्तर: यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों (Cultural Relations India) को मजबूत करने के लिए भारत की कला, योग, इतिहास और साझा विरासत जैसी सॉफ्ट पावर का उपयोग करने की नीति है।
प्रश्न 2: भारत अपनी सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से दुनिया में क्या संदेश देता है?
उत्तर: भारत इसके माध्यम से वैश्विक शांति, सह-अस्तित्व, विविधता के प्रति सम्मान और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (विश्व एक परिवार है) का सार्वभौमिक संदेश देता है।
प्रश्न 3: भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति में ICCR की क्या भूमिका है?
उत्तर: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) विदेशों में सांस्कृतिक केंद्रों के संचालन, छात्रवृत्तियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को लागू करने वाली मुख्य नोडल एजेंसी है।
प्रश्न 4: भारत की Soft Power क्या है?
उत्तर: बिना सैन्य या आर्थिक दबाव के, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (Indian Cultural Heritage), योग, सिनेमा, दर्शन और लोकतांत्रिक मूल्यों के बल पर वैश्विक स्तर पर प्रभाव बनाना भारत की सॉफ्ट पावर है।
प्रश्न 5: योग और भारतीय संस्कृति का सांस्कृतिक कूटनीति में क्या महत्व है?
उत्तर: योग वैश्विक स्वास्थ्य और सद्भाव का एक माध्यम बन चुका है, जिसने भारत को बिना किसी विवाद के दुनिया के कोने-कोने में एक सकारात्मक पहचान दिलाई है। तथा मैग्नीशियम व कैल्शियम जैसे आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।प से आम जनता द्वारा स्वतःस्फूर्त और युवा भूमिगत नेताओं द्वारा संचालित किया गया था।
