लुप्तप्राय ‘Black-necked Crane’- वैज्ञानिक नाम, शारीरिक बनावट, आवास और संरक्षण स्थिति
संदर्भ:
हाल ही में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने लद्दाख के अल्पाइन आर्द्रभूमि (Alpine Wetlands) में लुप्तप्राय काली गर्दन वाले क्रेन (Black-necked Crane) के घोंसलों और चूजों को आवारा कुत्तों के हमलों से बचाने के लिए 2,950 से अधिक कुत्तों की नसबंदी की।
काली गर्दन वाले क्रेन (Black-necked Crane) के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ग्रस निग्रिकोलिस (Grus nigricollis) है।
- स्थानीय नाम: लद्दाख में इसे पारंपरिक रूप से ‘चा तुंग-तुंग’ (Cha Tung-Tung) और भूटान में ‘थ्रंग थ्रंग करमो’ (Thrung Thrung Karmo) कहा जाता है।
- आकार: यह लगभग 1.35 से 1.4 मीटर लंबा एक बड़ा और राजसी पक्षी है। इसका वजन लगभग 5 से 5.5 किलोग्राम होता है।
- रंग: इसका शरीर मुख्य रूप से हल्के राख जैसे भूरे और सफेद रंग का होता है। इसके सिर और गर्दन का ऊपरी हिस्सा गहरा और पूरी तरह से चमकीला काला होता है।
- विशिष्ट लक्षण: इसकी आँखों के ठीक पीछे एक छोटा हल्का धब्बा होता है और सिर के शीर्ष पर एक चमकीला मुकुट सुशोभित होता है।
- इसके पैर और उड़ान के प्राथमिक पंख भी काले होते हैं। नर और मादा शारीरिक रूप से समान दिखाई देते हैं।
- आवास: यह मुख्य रूप से तिब्बत के पठार (Tibetan Plateau) का स्थानिक (Endemic) पक्षी है। यह समुद्र तल से 3,000 से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दलदली मैदानों, अल्पाइन घास के मैदानों और नदी घाटियों में प्रजनन करता है।
- यह प्रमुख रूप से चार देशों—भारत, चीन, भूटान और नेपाल में पाया जाता है।
- भारत में यह मुख्य रूप से लद्दाख (Ladakh) के चांगथांग शीत मरुस्थल वन्यजीव अभयारण्य (Changthang Cold Desert Wildlife Sanctuary), हानले, त्सो कार (Tso Kar), न्योमा आर्द्रभूमि और सुरु घाटी में पाया जाता है।
- शीतकाल में यह अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की सांगती घाटी (Sangti Valley) और ज़मीथांग (Zemithang) में भी देखा जाता है।
- यह दुनिया भर में पाई जाने वाली क्रेन की 15 प्रजातियों में से एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो पूर्णतः अल्पाइन और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (High-altitude Wetlands) में ही निवास और प्रजनन करती है।
- आहार: यह एक सर्वाहारी पक्षी (Omnivorous Bird) है। यह आर्द्रभूमि के पौधों की जड़ों, कंदों, कीड़ों, घोंघों, मछलियों, मेंढकों और खेतों में बचे हुए जौ तथा गेहूं के दानों को खाता है।
- प्रजनन काल: लद्दाख में यह मई से जून के दौरान प्रजनन करता है। आर्द्रभूमि के बीच उथले पानी में यह घास और कीचड़ से घोंसला बनाता है और आमतौर पर एक बार में दो अंडे देता है।
- सांस्कृतिक महत्व: लद्दाख की बौद्ध परंपराओं में इसे शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यह लद्दाख का आधिकारिक राजकीय पक्षी (State Bird of Ladakh) है।
- संरक्षण की स्थिति:
- आईयूसीएन रेड लिस्ट (IUCN Red List): निकट संकटग्रस्त (Near Threatened – NT).
- भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I (Schedule I) (इसके तहत शिकार करने पर कठोर कारावास का प्रावधान है).
- साइट्स (CITES): परिशिष्ट I (Appendix I).
- प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन (CMS): परिशिष्ट I (Appendix I).
- पारिस्थितिकी महत्व: काली गर्दन वाले क्रेन का उच्च पर्वतीय आर्द्रभूमि में पाया जाना उस पारि-प्रणाली के स्वास्थ्य का प्रत्यक्ष संकेतक (Ecological Indicator) है। इनके संरक्षण से ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र के मीठे पानी के स्रोतों और स्थानीय पशुपालकों की आजीविका का संरक्षण स्वतः होता है।
- प्रमुख खतरे:
- आवारा कुत्तों का आतंक (Free-Ranging Dogs – FRD): लद्दाख में आवारा क्रेन के अंडों और नवजात चूजों को खा जाते हैं, जिससे उनकी प्रजनन सफलता दर घट रही है।
- आवास क्षरण (Habitat Degradation): आर्द्रभूमि के आस-पास बढ़ती ढांचागत परियोजनाएं और पर्यटकों के वाहनों का हस्तक्षेप इनके प्राकृतिक घोंसलों को नष्ट कर रहा है।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change): वैश्विक तपन के कारण ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और उच्च ऊंचाई वाली झीलों का सूखना इनके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।
- जनसंख्या का आंकड़ा (Black-necked Crane India Population): वैश्विक स्तर पर इनकी आबादी लगभग 11,000 से 12,000 है (मुख्यतः तिब्बत में)। भारत में इनकी संख्या बहुत सीमित है और 100 से भी कम क्रेन देश में जीवित बचे हैं।
- बीएनएचएस (BNHS) द्वारा लद्दाख में किए गए वार्षिक जनसंख्या अनुश्रवण (Population Monitoring) में कुल 19 प्रजनन जोड़ों (Breeding Pairs) की पुष्टि की गई है।
- पहल: कुत्तों की नसबंदी (Sterilisation) के साथ-साथ भारतीय सेना की चौकियों पर कचरा प्रबंधन परियोजना (Waste Management) शुरू की गई है ताकि कुत्तों को भोजन न मिले।
- इसके तहत 1,000 से अधिक सैन्य कर्मियों को जैव विविधता संरक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Black-necked Crane India में कहां पाया जाता है?
उत्तर: भारत में यह दुर्लभ पक्षी मुख्य रूप से लद्दाख के चांगथांग शीत मरुस्थल क्षेत्र में और शीतकाल में अरुणाचल प्रदेश की सांगती घाटी में पाया जाता है।
प्रश्न 2: Black-necked Crane का वैज्ञानिक नाम क्या है?
उत्तर: इस विशिष्ट पर्वतीय पक्षी का वैज्ञानिक नाम ग्रस निग्रिकोलिस (Grus nigricollis) है, जो क्रेन परिवार का सदस्य है।
प्रश्न 3: Black-necked Crane Habitat कैसा होता है?
उत्तर: इनका आवास उच्च ऊंचाई वाली अल्पाइन आर्द्रभूमि (Alpine Wetlands), झीलों के किनारे के दलदली मैदान और कटीली नदी घाटियाँ होती हैं।
प्रश्न 4: भारत में Black-necked Crane की Population कितनी है?
उत्तर: भारत में इनकी आबादी गंभीर रूप से सीमित है और वर्तमान में पूरे देश में 100 से भी कम पक्षी बचे हैं।
प्रश्न 5: Black-necked Crane भारत में किन राज्यों या क्षेत्रों में दिखाई देता है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दिखाई देता है।
प्रश्न 6: Black-necked Crane Ladakh में कब दिखाई देता है?
उत्तर: यह अपने प्रजनन काल के दौरान वसन्त और ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल से अक्टूबर) के महीनों में लद्दाख की झीलों पर दिखाई देता है।
प्रश्न 7: Black-necked Crane की Conservation क्यों जरूरी है?
उत्तर: यह ट्रांस-हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का सूचक है और इसकी कम वैश्विक जनसंख्या के कारण इसे विलुप्त होने से बचाना आवश्यक है।
प्रश्न 8: क्या Black-necked Crane एक Migratory Bird है?
उत्तर: हाँ, यह एक प्रवासी पक्षी (Migratory Bird) है, जो सर्दियों में तिब्बत के अत्यधिक ठंडे पठार से लद्दाख और अरुणाचल के अपेक्षाकृत कम ऊंचे क्षेत्रों में आता है।फॉर्म-1 आवश्यक दस्तावेज हैं.
