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Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029, तीन वर्षीय रोडमैप हुआ लॉन्च

Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029, तीन वर्षीय रोडमैप हुआ लॉन्च

Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा के पणजी में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद आधिकारिक रूप से नशा मुक्त भारत रोडमैप 2029 (Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029) लॉन्च किया।

नशा मुक्त भारत रोडमैप 2029 के बारे में:

  • परिचय: Nasha Mukt Bharat Roadmap 2026 से 2029 तक की अवधि के लिए तैयार की गई एक व्यापक और समयबद्ध रणनीतिक कार्ययोजना है। सरकार ने इस तीन वर्षीय रोडमैप (Three Year Drug-Free India Roadmap) की अवधि को ‘मिशन मोड’ (Mission Mode) घोषित किया है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों की जवाबदेही तय की गई है।
  • महत्वाकांक्षी लक्ष्य: मादक पदार्थों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
  • नेटवर्क का खात्मा: कम से कम 100 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट (Drug Networks) को पूरी तरह समाप्त करना।
  • भगोड़ों की वापसी: मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 100 बड़े भगोड़ों को इंटरपोल (Interpol) और विदेश मंत्रालय के सहयोग से भारत वापस लाना।
  • गुप्त प्रयोगशालाओं को नष्ट करना: वर्ष 2026 के भीतर ही देश में सक्रिय कम से कम 75 गुप्त मादक पदार्थ प्रयोगशालाओं (Clandestine Labs) को नष्ट करना। 
  • पूर्ण दृश्यता: मार्च 2027 तक मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की एंड-टू-एंड दृश्यता सुनिश्चित करना। 
  • चार-स्तंभ रणनीति: नशा मुक्त भारत 2029 (Nasha Mukt Bharat 2029) का लक्ष्य हासिल करने के लिए यह रणनीति चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: 
  • खुफिया और अभियान-आधारित प्रवर्तन (Intelligence- and Operations-based Enforcement): इसके तहत सुरक्षा एजेंसियां जब्ती-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर नेटवर्क-केंद्रित दृष्टिकोण (Network-Centric Enforcement) अपनाएंगी. “नीचे से ऊपर” (Bottom-up) और “ऊपर से नीचे” (Top-down) जांच मॉडल के जरिए ड्रग पैकेट के स्रोत से लेकर उसके वित्तीय आकाओं तक को पकड़ा जाएगा. 
  • पूर्वगामी और कृत्रिम दवाओं पर नियंत्रण (Control of Precursor and Synthetic Drugs): कृत्रिम मादक पदार्थों के निर्माण में उपयोग होने वाले पूर्वगामी रसायनों (Precursor Chemicals) के अवैध व्यापार और फार्मास्युटिकल डायवर्जन पर सख्त विनियामक नियंत्रण लगाना। 
  • मांग और नुकसान में कमी (Demand and Harm Reduction): समाज में मादक पदार्थों की मांग को कम करने के लिए उपचार, पुनर्वास और बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाना. नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 1,751 की जाएगी। 
  • क्षमता निर्माण और समन्वय (Capacity Building and Coordination): केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के तकनीकी और प्रशासनिक कौशल को बढ़ाना। 
  • नोडल निकाय: गृह मंत्रालय के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और बहु-स्तरीय एनकॉर्ड (NCORD) तंत्र इसके क्रियान्वयन की मुख्य नोडल इकाइयां हैं।
  • तकनीकी अनुप्रयोग: डार्कनेट गतिविधियों, कूटबद्ध संचार (Encrypted Communications) और क्रिप्टोकरेंसी आधारित भुगतानों पर नज़र रखने के लिए एक समर्पित डार्कनेट-क्रिप्टो सेल (Darknet-Crypto Cell) स्थापित किया गया है.
    • इसके अतिरिक्त, लत से पीड़ित लोगों की मदद के लिए ‘मानस’ (MANAS) हेल्पलाइन शुरू की गई है।
  • एजेंसियों का समन्वय: BSF, CISF, भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और सीमा शुल्क विभाग को भूमि सीमाओं व बंदरगाहों पर स्कैनर लगाने और जोखिम-आधारित प्रोफाइलिंग करने का निर्देश दिया गया है। 
  • जनभागीदारी: इस अभियान का एक प्रमुख घटक नागरिक संपर्क है, जिसके तहत 50 करोड़ नागरिकों तक पहुँचने और 1 लाख ‘नशा मुक्त मित्रों’ (Nasha Mukt Mitras) का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है.
    • इसमें युवाओं को जोड़ने के लिए एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) और ‘माय भारत’ (MY Bharat) जैसे मंचों का उपयोग किया जाएगा। 

इस प्रकार के रोडमैप की आवश्यकता क्यों है?

  • नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) का खतरा: मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित किए गए अवैध धन (Black Money) का सीधा उपयोग भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों और वामपंथी उग्रवाद को वित्तपोषित करने में किया जाता है।
  • भू-राजनीतिक स्थिति: भारत दुनिया के दो सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों—‘डेथ क्रेसेंट’ (गोल्डन क्रेसेंट: ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान) और ‘डेथ ट्रायंगल’ (गोल्डन ट्रायंगल: म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) के बीच स्थित है, जिससे सीमा पार तस्करी का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है.
  • सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता जाल: पारंपरिक नशीले पदार्थों की तुलना में मेथामफेटामाइन जैसी कृत्रिम दवाएं (Synthetic Drugs) बनाना और छुपाना आसान है, जिसके लिए सख्त तकनीकी निगरानी की आवश्यकता है.
  • जनसांख्यिकीय लाभांश की रक्षा: भारत की युवा शक्ति को नशे की लत से बचाकर ही वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

पूर्ववर्ती योजनाएं और उनकी उपलब्धियां:

भारत सरकार ने वर्ष 2019 से ही नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है: 

  • नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA): वर्ष 2020 में सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक 5.7 लाख से अधिक नागरिकों को नशे की लत से सफलतापूर्वक मुक्त कराया जा चुका है.
  • मादक पदार्थों की जब्ती में ऐतिहासिक वृद्धि: तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004-2014 के बीच जहाँ ₹40,000 करोड़ मूल्य का 26 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया था, वहीं 2014 से 2026 के बीच यह बढ़कर 1.19 करोड़ किलोग्राम से अधिक हो गया, जिसका बाजार मूल्य ₹1.89 लाख करोड़ है।
  • अपराधियों पर नकेल: जुलाई 2019 से जुलाई 2026 के बीच मिशन-मोड दृष्टिकोण के माध्यम से 36 अलग-अलग देशों से 274 वांछित अपराधियों या भगोड़ों को भारत वापस लाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029 क्या है?

उत्तर: यह भारत को मादक पदार्थों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए तैयार किया गया एक राष्ट्रीय नीतिगत ढांचा (Drug-Free India Mission) है, जो 2026-2029 तक संचालित होगा। 

प्रश्न 2: Nasha Mukt Bharat 2029 Roadmap किसने लॉन्च किया?

उत्तर: इस ऐतिहासिक और समयबद्ध तीन वर्षीय रोडमैप को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 सितंबर 2026 को पणजी (गोवा) में लॉन्च किया।

प्रश्न 3: Nasha Mukt Bharat Roadmap 2029 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य मार्च 2029 तक सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना, अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करना और युवाओं को नशे से बचाना है। 

प्रश्न 4: Three-Year Drug-Free India Roadmap में किन बातों पर focus किया गया है?

उत्तर: इसमें मुख्य रूप से नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन, सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, डार्कनेट-क्रिप्टो ट्रैकिंग, वित्तीय जांच और पुनर्वास (Rehabilitation) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 

प्रश्न 5: 2029 तक India को drug-free बनाने के लिए सरकार की क्या योजना है?

उत्तर: सरकार 100 अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खत्म करने, 100 भगोड़े वापस लाने, नशामुक्ति केंद्र 1,751 करने और 50 करोड़ नागरिकों को जागरूक करने की योजना पर काम कर रही है।पनिवेशिक दमन के इतिहास को प्रदर्शित करती है।समय से प्रक्रियाधीन थीं।

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