Jantar Mantar Protest Site Status Removed, इसके स्थान पर तीन नए स्थल धरना-प्रदर्शन के लिए अधिसूचित
संदर्भ:
हाल ही में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) द्वारा जारी स्थायी आदेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल का दर्जा समाप्त (Jantar Mantar Protest Site Status Removed) कर दिया गया है। इसके स्थान पर दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थलों को अधिसूचित किया।
मुख्य बिंदु:
- अधिसूचना: दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार द्वारा 11 अक्टूबर 2026 को जारी नए स्थायी आदेश (संख्या L&O/48/2026) के माध्यम से जंतर-मंतर को आधिकारिक रूप से वि-अधिसूचित (De-notified) कर दिया गया।
- यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Ministry of Home Affairs) द्वारा गठित एक विशेष उच्च स्तरीय समीक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया।
- हटाने के मुख्य कारण:
- सुरक्षात्मक चुनौतियाँ (Security Challenges): जंतर-मंतर संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास जैसी महत्वपूर्ण वीवीआईपी (VVIP) इमारतों के अत्यंत निकट (लगभग 2 किमी) स्थित है। कानून व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।
- हालिया हिंसक आंदोलन और अव्यवस्था: हाल के महीनों में विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों (जैसे CJP आंदोलन) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर बढ़ने और वीवीआईपी क्षेत्रों को बाधित करने का प्रयास किया। जुलाई 2026 में हुए उग्र प्रदर्शनों के कारण पूरी दिल्ली में यातायात व्यवस्था ठप हो गई थी।
- सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में हो रहे बड़े प्रदर्शनों की सुरक्षा समीक्षा करने और आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों व दैनिक जीवन के बीच संतुलन बनाने का निर्देश दिया था। इसी पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय की समिति ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन सूची से बाहर करने की अनुशंसा की।
- धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए अधिसूचित स्थल (Three New Designated Protest Sites): दिल्ली में सार्वजनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल (Alternative Protest Venues Delhi) के रूप में निम्नलिखित तीन मैदानों को अधिसूचित किया है:
| नए प्रदर्शन स्थल का नाम (Name of New Site) | भौगोलिक स्थिति (Location in Delhi) | अनुमानित क्षमता (Approx Capacity) | रणनीतिक एवं ऐतिहासिक महत्व (Significance & History) |
| 1. रामलीला मैदान (Ramlila Ground) | नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास, सेंट्रल दिल्ली | ~50,000 लोग | यह दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध मैदान है। यह 1975 के जेपी आंदोलन और 2011 के अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का मुख्य केंद्र रहा है। यह नए स्थलों में सत्ता के केंद्र से सबसे नजदीक (6 किमी) है। |
| 2. बुराड़ी मैदान (Burari Ground) | उत्तरी दिल्ली (North Delhi) | ~80,000 लोग | यह सबसे बड़ा अधिसूचित मैदान है, जो संसद भवन से लगभग 23 किमी दूर स्थित है। पूर्व में 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान भी इसका उपयोग निरंकारी समागम मैदान के रूप में किया गया था। |
| 3. सीबीडी ग्राउंड (CBD Ground East Delhi) | शाहदरा, पूर्वी दिल्ली (East Delhi) | ~15,000 लोग | दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा प्रबंधित यह 12 एकड़ का मैदान विकास मार्ग से सटा हुआ है, जो एक व्यस्त वाणिज्यिक केंद्र (Commercial Hub) है। |
जंतर-मंतर: इतिहास, वास्तुकला और आंदोलन का केंद्र
- पृष्ठभूमि: जंतर-मंतर दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास स्थित एक ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला (Astronomical Observatory) है। इसका निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 1724 में करवाया गया था।
- उन्होंने देश में कुल पांच ऐसी वेधशालाओं का निर्माण कराया था (दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा)।
- ‘जंतर-मंतर’ शब्द का संस्कृत अर्थ ‘यंत्र और गणना’ (Instruments and Formulae) होता है। यहाँ समय, ग्रहों और नक्षत्रों की गति को मापने के लिए ‘सम्राट यंत्र’, ‘जयप्रकाश यंत्र’ और ‘मिश्र यंत्र’ जैसे विशाल पाषाण उपकरण स्थापित हैं।
- प्रदर्शन स्थल बनने की कहानी (1993 से शुरुआत)
- वर्ष 1993 से पहले दिल्ली में बोट क्लब (इंडिया गेट के पास) मुख्य प्रदर्शन स्थल हुआ करता था। 1988 में प्रसिद्ध किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लाखों किसानों ने बोट क्लब को घेरकर पूरी दिल्ली ठप कर दी थी।
- इसके बाद सुरक्षा कारणों से सरकार ने बोट क्लब पर प्रतिबंध लगा दिया और 1993 में जंतर-मंतर को दिल्ली का आधिकारिक विरोध प्रदर्शन स्थल (Designated Protest Site Delhi) घोषित किया गया। पिछले 33 वर्षों से यह देश की लोकतांत्रिक आवाज़ का वैश्विक चेहरा बना हुआ था।
- बड़े और ऐतिहासिक आंदोलन:
- अन्ना हजारे का इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन (2011): लोकपाल बिल की मांग को लेकर हुए इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन की गूंज जंतर-मंतर से ही शुरू हुई थी, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी।
- निर्भया न्याय आंदोलन (2012): दिल्ली में हुए जघन्य सामूहिक बलात्कार के खिलाफ देश के युवाओं और नागरिकों का स्वतःस्फूर्त गुस्सा इसी सड़क पर फूटा था, जिसके बाद देश के आपराधिक कानूनों (Criminal Laws) में कड़े संशोधन किए गए।
- पहवानों का विरोध प्रदर्शन (2023): भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ देश के शीर्ष ओलंपिक पदक विजेता पहलवानों ने महीनों तक यहाँ ऐतिहासिक धरना दिया था।
- वन रैंक वन पेंशन (OROP) आंदोलन: पूर्व सैनिकों ने अपने अधिकारों और पेंशन विसंगतियों को दूर करने के लिए यहाँ लंबा संघर्ष चलाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: दिल्ली में जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल का दर्जा क्यों समाप्त किया गया है?
उत्तर: संसद भवन और वीवीआईपी (VVIP) क्षेत्र की उच्च सुरक्षा चिंताओं, बार-बार होने वाली यातायात बाधाओं तथा सुप्रीम कोर्ट की कानून-व्यवस्था समीक्षा के बाद यह दर्जा समाप्त किया गया है।
प्रश्न 2: दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन के लिए किन तीन नए स्थलों को अधिसूचित किया है?
उत्तर: दिल्ली पुलिस के नवीन आदेश के तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान, और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी (CBD) ग्राउंड को नया प्रदर्शन स्थल तय किया गया है।
प्रश्न 3: क्या अब जंतर-मंतर पर धरना और विरोध प्रदर्शन आयोजित नहीं किए जा सकेंगे?
उत्तर: जी नहीं, 11 अक्टूबर 2026 के वि-अधिसूचना (De-notification) आदेश के बाद जंतर-मंतर रोड पर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक जमावड़े या धरने की कानूनी अनुमति नहीं होगी।
प्रश्न 4: दिल्ली में नए प्रदर्शन स्थलों को अधिसूचित करने का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: इसका उद्देश्य नई दिल्ली के संवेदनशील प्रशासनिक जोन की सुरक्षा सुदृढ़ करना, आम जनता को ट्रैफिक जाम से बचाना और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार (Right to Peaceful Protest) को व्यवस्थित करना है।
प्रश्न 5: नए निर्धारित स्थलों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए क्या नियम लागू होंगे?
उत्तर: इन तीनों मैदानों पर प्रदर्शन के लिए आयोजकों को दिल्ली पुलिस से पूर्व अनुमति (NOC) लेनी होगी, जिसके लिए अलग से एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जा रही है।
