भारतीय नौसेना में शामिल हुआ INS Mangrol, 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से है निर्मित
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड (Naval Dockyard, Mumbai) में आयोजित समारोह में अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस मांगरोल (INS Mangrol) को आधिकारिक तौर पर बेड़े में शामिल (कमिशन) कर लिया है।
INS मांगरोल के बारे में:
- परिचय: INS मांगरोल, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) है, जिसे स्वदेशी रूप से विकसित किया है।
- आईएनएस मांगरोल भारतीय नौसेना के 16 जहाजों वाले ‘एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट’ अधिग्रहण कार्यक्रम का एक हिस्सा है।
- परियोजना के तहत 8 जहाजों के निर्माण का अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) को तथा शेष 8 जहाजों के निर्माण की जिम्मेदारी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited – CSL) को सौंपी गई है।
- श्रेणी: आईएनएस मांगरोल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित माहे क्लास (Mahe-class) श्रृंखला का तीसरा युद्धपोत है। संपूर्ण 16-जहाज परियोजना के क्रम में यह बेड़े में शामिल होने वाला सातवां जहाज है।
- नामकरण: इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह ‘मांगरोल’ के नाम पर रखा गया है।
- इससे पहले ‘आईएनएस मांगरोल (M85)’ नाम का एक सुरंग-रोधी जहाज (Minesweeper) भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दे चुका है, जिसे अप्रैल 2004 में डीकमिशन किया गया था।
- आदर्श वाक्य (Motto): आईएनएस मांगरोल का आधिकारिक आदर्श वाक्य “अदृश्ये विजयः” (Victory over the Unseen) है, जो पानी के नीचे छिपे अदृश्य खतरों पर विजय प्राप्त करने के इसके मुख्य संकल्प को दर्शाता है।
- कमिशनिंग: मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित समारोह की अध्यक्षता भारतीय नौसेना के पश्चिमी नौसेना कमान (Western Naval Command) के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल संजय वात्सयान ने की।
- समारोह के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण (Indian Naval Modernisation) के तहत अब तक कुल 10 युद्धपोतों को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा चुका है।
- विशेषताएं:
- आकार और विस्थापन: इसकी कुल लंबाई लगभग 78 मीटर और चौड़ाई 11.36 मीटर है, जबकि इसका ड्राफ्ट 2.7 मीटर है। इसका मानक विस्थापन (Displacement) 896 से 1,100 टन के बीच है।
- पंप-जेट/वाटरजेट प्रोपल्शन तकनीक (Waterjet Propulsion): यह भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी श्रेणी के युद्धपोत हैं जिन्हें पारंपरिक प्रोपेलर (पंखे) और पतवार के बजाय वाटरजेट प्रोपल्शन तकनीक द्वारा संचालित किया जाता है। यह तीन शक्तिशाली मरीन डीजल इंजनों (6 मेगावाट आउटपुट) से संचालित होता है, जो इसे उथले पानी में भी बिना अटके 25 नॉट्स (लगभग 46 किमी/घंटा) की तेज गति और उच्च गतिशीलता (Manoeuvrability) प्रदान करते हैं।
- परिचालन रेंज और क्षमता: यह जहाज 14 नॉट्स की गति पर 1,800 नॉटिकल मील (लगभग 3,300 किमी) की दूरी तय कर सकता है और लगातार 14 दिनों तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इस पर 7 अधिकारियों और 50 नाविकों सहित कुल 57 चालक दल के रहने की व्यवस्था है।
- उन्नत सेंसर और सोनार सूट (Sensors Suite): पानी के नीचे छिपे खतरों को पकड़ने के लिए यह डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार (Abhay Hull-Mounted Sonar) और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) से लैस है। इसके साथ ही इसमें अत्याधुनिक ‘इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम’ (IPMS) स्थापित है।
- घातक हथियार प्रणाली (Armament): दुश्मन पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए इसमें एक स्वदेशी RBU-6000 पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर, दो ट्रिपल-ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर और पनडुब्बी-रोधी बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए विशेष रेल्स दी गई हैं। आत्मरक्षा के लिए 30 मिमी की एक नेवल सरफेस गन और दो 12.7 मिमी की स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन (SRCG) लगाई गई हैं।
- टॉर्पीडो सुरक्षा कवच: यह युद्धपोत दुश्मन के आने वाले टॉरपीडो को हवा में ही भ्रमित कर नष्ट करने वाली स्वदेशी ‘मारीच’ एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम (Maareech Advanced Torpedo Decoy System) से सुसज्जित है।
रणनीतिक महत्व:
- उथले पानी की सुरक्षात्मक चुनौतियों का समाधान (Littoral Warfare Capabilities): बड़े फ्रंटलाइन युद्धपोत (जैसे डिस्ट्रॉयर या फ्रिगेट) अपने गहरे ड्राफ्ट और भारी आकार के कारण देश के संकीर्ण तटीय इलाकों, बंदरगाहों के प्रवेश मार्गों और उथले समुद्री क्षेत्रों में आसानी से गश्त नहीं कर पाते।
- आईएनएस मांगरोल अपने हल्के आकार और वाटरजेट तकनीक के कारण इन क्षेत्रों में रक्षा कवच प्रदान करेगा।
- असिमेट्रिक अंडरवॉटर खतरों से निपटना: हिंद महासागर और अरब सागर में विदेशी ताकतों की पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, छोटे सबमर्सिबल और ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स (AUVs) की बढ़ती पैठ को रोकने के लिए यह तटीय क्षेत्रों में जलमग्न नेटवर्क को मजबूत करेगा।
- महत्वपूर्ण आर्थिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा: भारत की विशाल तटीय सीमा (7,516 किमी) पर मौजूद रणनीतिक बंदरगाहों, नौसैनिक अड्डों और ‘बॉम्बे हाई’ जैसे अपतटीय ऊर्जा बुनियादी ढांचा क्षेत्रों (Offshore Assets) को पानी के भीतर होने वाले किसी भी गुप्त या आतंकवादी हमले से सुरक्षा प्रदान करेगा।
- बहु-आयामी मिशन लचीलापन (Multi-Mission Flexibility): अपने प्राथमिक एएसडब्ल्यू कार्य के अलावा, यह युद्धपोत निम्न-तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशनों (LIMO), तटीय निगरानी, खोज और बचाव (SAR) अभियानों तथा जरूरत पड़ने पर माइन-वॉरफेयर (सुरंग बिछाने या हटाने) से जुड़े कार्यों को भी पूरा कर सकता है।
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बल (Aatmanirbhar Bharat in Defence): यह स्वदेशी युद्धपोत 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (80% Indigenous Content) से निर्मित है, जो रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat Defence) के बढ़ते कदमों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- यह सिद्ध करता है कि भारत की घरेलू शिपबिल्डिंग और एमएसएमई (MSMEs) इकाइयाँ अब वैश्विक स्तर के सेंसर, प्रणोदन प्रणाली (Propulsion) और हथियार बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: INS मांगरोल क्या है और इसे भारतीय नौसेना में कब शामिल किया गया?
उत्तर: आईएनएस मांगरोल (INS Mangrol) एक अत्याधुनिक स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) है, जिसे 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में नौसेना में कमिशन किया गया।
प्रश्न 2: INS मांगरोल का निर्माण किस शिपयार्ड द्वारा किया गया है?
उत्तर: इस स्वदेशी युद्धपोत का निर्माण रक्षा मंत्रालय के मेक इन इंडिया (Make in India) कार्यक्रम के तहत कतरनी-प्रणाली पर कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है।
प्रश्न 3: INS मांगरोल में कितने प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है?
उत्तर: इस युद्धपोत के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है, जिसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और डीआरडीओ (DRDO) के तकनीकी उपकरण शामिल हैं।
प्रश्न 4: INS मांगरोल की प्रमुख विशेषताएं और क्षमताएं क्या हैं?
उत्तर: यह 78 मीटर लंबा जहाज वॉटरजेट प्रोपल्शन तकनीक से लैस है और 25 नॉट्स की गति पकड़ सकता है। इसमें पानी के नीचे निगरानी के लिए अभय सोनार, मारीच प्रणाली और पनडुब्बी-रोधी रॉकेट/टॉरपीडो लॉन्चर लगे हैं।
प्रश्न 5: भारतीय नौसेना में INS मांगरोल के शामिल होने से समुद्री सुरक्षा कैसे मजबूत होगी?
उत्तर: यह कम गहराई वाले तटीय क्षेत्रों, बंदरगाहों के प्रवेश मार्गों और संवेदनशील नौसैनिक अड्डों को दुश्मन की पनडुब्बियों और पानी के भीतर छिपे खुफिया खतरों से बहुस्तरीय सुरक्षा (Coastal Defence) प्रदान करेगा।
