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International Day for Disaster Risk Reduction 2026: परिचय, इतिहास, थीम एवं महत्व

International Day for Disaster Risk Reduction 2026: परिचय, इतिहास, थीम एवं महत्व  

International Day for Disaster Risk Reduction 2026

संदर्भ:

विश्व भर में जोखिम जागरूकता (Risk Awareness) और आपदा न्यूनीकरण की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 13 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2026 (International Day for Disaster Risk Reduction 2026) मनाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस (IDDRR):

  • परिचय: अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस (International Day for Disaster Risk Reduction) हर साल 13 अक्टूबर को मनाए जाने वाला एक जागरूकता दिवस है।
    • जिसका उद्देश्य प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं (जैसे बाढ़, भूकंप, सूखा, चक्रवात) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना है।
  • शुरुआत: इस दिवस की स्थापना वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा जोखिम जागरूकता और आपदा न्यूनीकरण की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। 
  • तारीख में बदलाव: प्रारंभ में यह दिवस ‘अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण दशक (1990-1999)’ के हिस्से के रूप में अक्टूबर के दूसरे बुधवार को मनाया जाता था।
    • बाद में वर्ष 2009 में महासभा ने प्रस्ताव 64/200 के माध्यम से आधिकारिक तौर पर 13 अक्टूबर को इसकी स्थायी तिथि निर्धारित की और इसका नाम बदलकर ‘अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस’ (IDDRR) कर दिया। 
  • नोडल संस्था: वैश्विक स्तर पर इस दिवस के कार्यक्रमों और रणनीतियों का समन्वय संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (United Nations Office for Disaster Risk Reduction – UNDRR) द्वारा किया जाता है। 
  • Official Theme for IDDRR 2026: “लचीलापन घर से शुरू होता है” (Resilience Starts at Home)

भारत में आपदा जोखिम की प्रमुख चुनौतियाँ:

  • भूकंपीय और बाढ़ का खतरा: देश का 58% से अधिक भूभाग भूकंपीय जोखिम के अधीन है, लगभग 72% जिले बाढ़ संभावित हैं और 68% क्षेत्र सूखे की चपेट में आते हैं। 
  • अनियोजित शहरीकरण और हीट आइलैंड प्रभाव: बढ़ते शहरों में कंक्रीट, डामर और सघन निर्माण के कारण तापमान और बाढ़ का जोखिम बढ़ गया है। चेन्नई, सूरत और लखनऊ जैसे शहरों में तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक दर्ज हो रहा है। 
  • जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाएँ: अचानक बादल फटने (Cloudbursts), भारी वर्षा, सूखे और चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में तेजी आई है। 
  • कमजोर बुनियादी ढांचा: कई क्षेत्रों में आज भी पुराने मानकों के आधार पर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और मकान बनाए जा रहे हैं, जो बढ़ते मौसम संकटों को सहन करने में असमर्थ हैं।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और स्थानीय स्तर की कमी: पर्याप्त प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का अभाव और ग्रामीण व स्थानीय स्तर पर समुदाय की सीमित तैयारी राहत कार्यों को प्रभावित करती है। 
  • वित्तीय एवं संस्थागत चुनौतियाँ: केंद्र और राज्यों के बीच राजकोषीय विषमता तथा राहत-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर जोखिम-न्यूनीकरण (Risk-reduction) पर पूरी तरह अमल न हो पाना बड़ी बाधा है। 

आपदा जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियाँ और वैश्विक फ्रेमवर्क:

  • सेंडाई फ्रेमवर्क 2015-2030 (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction): यह आपदा जोखिम को कम करने के लिए अपनाया गया 15-वर्षीय अंतरराष्ट्रीय स्वैच्छिक समझौता है, जिसे मार्च 2015 में सेंडाई (जापान) में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में स्वीकार किया गया था। इसके चार मुख्य स्तंभ हैं:
    • आपदा जोखिम को समझना।
    • आपदा जोखिम के प्रबंधन के लिए आपदा जोखिम शासन (Governance) को मजबूत करना।
    • लचीलेपन (Resilience) के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण में संरचनात्मक निवेश करना।
    • प्रभावी प्रतिक्रिया और पुनर्प्राप्ति (Recovery) के लिए आपदा तैयारी को बढ़ाना। 
  • भारत का संस्थागत ढांचा (India’s Institutional Framework): भारत ने सेंडाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों के अनुरूप अपने आपदा जोखिम प्रबंधन (Disaster Risk Management) को मजबूत किया है:
  • विधिक ढांचा: देश में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के तहत एक त्रिस्तरीय प्रशासनिक ढांचा काम करता है।
  • राष्ट्रीय निकाय: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) नीतियां तय करता है, तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) अग्रिम राहत अभियानों का संचालन करता है।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण का महत्व:

  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति: आपदा तैयारियों और पर्यावरण लचीलेपन (Climate Resilience) के बिना सतत विकास लक्ष्य-11 (सुरक्षित और लचीले शहर) को प्राप्त करना असंभव है।
  • आर्थिक नुकसान को कम करना: आपदाओं के बाद पुनर्निर्माण (Rebuilding) की लागत, निर्माण के समय ही आपदा-रोधी तकनीक (Resilient Infrastructure) अपनाने की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
  • कमजोर वर्गों का संरक्षण: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और प्राकृतिक आपदाओं का सबसे घातक प्रभाव गरीब परिवारों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों पर पड़ता है। जोखिम प्रबंधन इन वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर: यह दिवस वैश्विक स्तर पर प्रत्येक वर्ष 13 अक्टूबर को नागरिकों और सरकारों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

प्रश्न 2: अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस 2026 की थीम क्या है?

उत्तर: वर्ष 2026 की आधिकारिक थीम “Resilience Starts at Home” (लचीलापन घर से शुरू होता है) निर्धारित की गई है

प्रश्न 3: इस दिवस को मनाने की शुरुआत कब और किस संस्था द्वारा की गई थी?

उत्तर: इसकी शुरुआत वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के एक प्रस्ताव द्वारा वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी। 

प्रश्न 4: आपदा जोखिम न्यूनीकरण का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: इसका अर्थ योजनाबद्ध प्रयासों द्वारा आपदा के कारणों का विश्लेषण करना और उनके नुकसान (जनहानि व आर्थिक क्षति) को न्यूनतम करना है। 

प्रश्न 5: सेंडाई फ्रेमवर्क क्या है और आपदा जोखिम को कम करने में इसकी क्या भूमिका है?

उत्तर: यह 2015-2030 तक का एक वैश्विक समझौता है जो देशों को पूर्व चेतावनी, लचीले बुनियादी ढांचे और बेहतर आपदा प्रबंधन रणनीतियाँ बनाने का मार्ग दिखाता है।

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