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National Steel Policy 2047: आवश्यकता, लक्ष्य और विशेषताएं

National Steel Policy 2047: आवश्यकता, लक्ष्य और विशेषताएं

National Steel Policy 2047

संदर्भ:

हाल ही में इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ने ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप राष्ट्रीय इस्पात नीति-विजन 2047 (Draft National Steel Policy – Vision 2047) का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। यह नीति दस्तावेज राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 (NSP 2017) का स्थान लेगा।

राष्ट्रीय इस्पात नीति-विजन 2047 की आवश्यकता:

  • अभूतपूर्व विकास: भारतीय इस्पात उद्योग (India Steel Industry) ने पिछले दशक में अभूतपूर्व विकास देखा है। भारत का कच्चा इस्पात उत्पादन वर्ष 2014-15 के 89 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 170 मिलियन टन हो चुका है और वर्तमान स्थापित क्षमता 220 मिलियन टन प्रति वर्ष है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक बन चुका है।
  • कम प्रति व्यक्ति खपत: भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत वर्तमान में केवल 116 किलोग्राम है, जो वैश्विक औसत (209 किलोग्राम) से काफी कम है। 
  • कच्चे माल की आयात निर्भरता: भारत लौह अयस्क में आत्मनिर्भर है, लेकिन स्टील निर्माण के लिए आवश्यक कोकिंग कोल (Coking Coal) का लगभग 92% आयात करता है।
  • उच्च कार्बन उत्सर्जन: भारत का इस्पात क्षेत्र देश के कुल CO₂ उत्सर्जन में 10-12% का योगदान देता है। वैश्विक स्तर पर लागू हो रहे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नियमों के कारण पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन आवश्यक है।

विजन 2047 के प्रमुख लक्ष्य:

इस नीति के तहत वर्ष 2047 तक भारतीय इस्पात क्षेत्र के विकास (Indian Steel Sector Growth) के लिए निम्नलिखित महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं: 

  • उत्पादन क्षमता का लक्ष्य (India’s Steel Production Target 2047): भारत की कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 604 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।
  • तैयार इस्पात की मांग (Steel Demand India 2047): देश में तैयार इस्पात (Finished Steel) की कुल मांग को बढ़ाकर 505 मिलियन टन तक पहुँचाना है।
  • प्रति व्यक्ति खपत: प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत को बढ़ाकर 302 किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • निर्यात लक्ष्य: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाते हुए इस्पात निर्यात को 45 मिलियन टन तक पहुँचाना है।
  • कार्बन तीव्रता में कटौती: कच्चे इस्पात के प्रति टन औसतन कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 2.54 टन CO₂ से घटाकर 1.54 टन CO₂ करना है।
  • कच्चे माल की अनुमानित मांग: वर्ष 2047 तक भारत को 772 मिलियन टन लौह अयस्क और 236 मिलियन टन कोकिंग कोल की वार्षिक आवश्यकता होगी। 

नीति के रणनीतिक स्तंभ:

  • कच्चे माल की सुरक्षा और वैश्विक पहुंच (Raw Material Security): लागत का 65-70% हिस्सा कच्चे माल पर खर्च होता है। इसके शमन के लिए नीति ‘रणनीतिक वैश्विक आउटरीच’ (Strategic Global Outreach) और विदेशी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण का प्रस्ताव करती है। इसके साथ ही, घरेलू कोयला वाशरी (Coal Washeries) के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘कोल ब्लेंड ऑप्टिमाइजेशन’ पर जोर दिया जाएगा।
  • डीकार्बोनाइजेशन और ग्रीन स्टील (Decarbonisation & Green Steel): भारत के वर्ष 2070 के शुद्ध-शून्य (Net-Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति में चरणबद्ध ऊर्जा संक्रमण की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत हाइड्रोजन-आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI), स्क्रैप-आधारित उत्पादन (स्क्रैप की खपत 123 मिलियन टन तक बढ़ाना), और कार्बन कैप्चर तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। 
  • माध्यमिक इस्पात क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण (Strengthening Secondary Steel Sector): भारत में लगभग 2,550 माध्यमिक इस्पात इकाइयाँ (SSIs) हैं, जो कुल क्षमता का 47% हिस्सा हैं। नीति इन्हें कच्चे माल की आसान पहुंच, आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए आसान वित्त पोषण, और सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए सहायता प्रदान करेगी।
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल अवसंरचना (Technology & Digital Infrastructure): आयात की मॉनिटरिंग और निम्न-मानक या सब-स्टैंडर्ड स्टील के आयात को रोकने के लिए एआई-संचालित उन्नत डेटा एनालिटिक्स (Advanced Data Analytics) नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही पूंजीगत सामानों (Capital Goods) और स्पेशलिटी स्टील के विनिर्माण का स्वदेशीकरण किया जाएगा। 
  • लॉजिस्टिक्स और पीएम गति शक्ति का एकीकरण: लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए इस्पात संयंत्रों के स्थानों को खनिज भंडारों और परिवहन गलियारों के साथ जोड़ने हेतु पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग किया जाएगा। रेल और स्लरी पाइपलाइनों (Slurry Pipelines) के माध्यम से परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय द्वारा जारी एक दीर्घकालिक विजन नीति (Steel Industry Vision 2047) का मसौदा है, जो देश को वैश्विक इस्पात शक्ति बनाने का रोडमैप तैयार करता है। 

प्रश्न 2: National Steel Policy 2047 की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर: भारत में इस्पात की कम प्रति व्यक्ति खपत को सुधारने, कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता घटाने और इस्पात क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए इसकी आवश्यकता है। 

प्रश्न 3: भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता का लक्ष्य क्या है?

उत्तर: इस नीति के अंतर्गत वर्ष 2047 तक भारत की वार्षिक कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता (Indian Steel Production Capacity) को वर्तमान 220 मिलियन टन से बढ़ाकर 604 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।

प्रश्न 4: राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: इसकी प्रमुख विशेषताओं में कच्चे माल की सुरक्षा के लिए वैश्विक पहुंच, डीकार्बोनाइजेशन, एआई-आधारित आयात निगरानी, स्पेशलिटी स्टील का घरेलू विनिर्माण और माध्यमिक क्षेत्र का सशक्तिकरण शामिल हैं।

प्रश्न 5: इस नीति से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या लाभ होगा?

उत्तर: बुनियादी ढांचे का विकास (Infrastructure Development) तेज होगा, आयात पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा बचेगी और डाउनस्ट्रीम विनिर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

प्रश्न 6: Green Steel क्या है और इसका उत्पादन कैसे किया जाता है?

उत्तर: ग्रीन स्टील (Green Steel) वह इस्पात है जिसके उत्पादन में जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा, स्क्रैप रिसाइक्लिंग और हाइड्रोजन आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम (Sustainable Steel Manufacturing) हो।

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