BIMSTEC Delhi Declaration 2026: आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए औपचारिक रूप से अपनाया गया
संदर्भ:
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित पहले बिम्सटेक गृह मंत्रियों की बैठक (First BIMSTEC Home Ministers’ Meeting) में ऐतिहासिक BIMSTEC दिल्ली घोषणापत्र 2026 (BIMSTEC Delhi Declaration 2026) को औपचारिक रूप से अपनाया गया है।
बिम्सटेक दिल्ली घोषणापत्र 2026 के बारे में:
- परिचय: BIMSTEC Delhi Declaration 2026, बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation – BIMSTEC) के सदस्य देशों द्वारा अपनाया गया एक सामूहिक सुरक्षा संकल्प है।
- इसके माध्यम से यह क्षेत्रीय समूह पारंपरिक व्यापारिक एकीकरण (Trade Integration) से आगे बढ़कर एक औपचारिक क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना (BIMSTEC Security Framework) के रूप में अग्रसर हो रहा है।
- बिम्सटेक में कुल सात सदस्य देश शामिल हैं: भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
- इसके माध्यम से यह क्षेत्रीय समूह पारंपरिक व्यापारिक एकीकरण (Trade Integration) से आगे बढ़कर एक औपचारिक क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना (BIMSTEC Security Framework) के रूप में अग्रसर हो रहा है।
- उद्देश्य: इस घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आतंकवाद, सीमा-पार उग्रवाद और कट्टरपंथ से सामूहिक रूप से निपटना है।
- आयोजन: इस बैठक का आयोजन 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में किया गया था। यह बिम्सटेक के इतिहास में गृह मंत्रियों के स्तर की पहली आधिकारिक बैठक थी।
- अध्यक्षता: इस ऐतिहासिक सुरक्षा बैठक (BIMSTEC Security Meeting) की अध्यक्षता भारत के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई।
- प्रावधान:
- सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा: सभी सात सदस्य देशों ने हर रूप में आतंकवाद, विशेष रूप से सीमा-पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) की बिना किसी शर्त के कड़ी निंदा की है।
- संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का अनुपालन: घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रतिबंधों, विशेष रूप से 1267 प्रतिबंध समिति (1267 Sanctions Committee) के फैसलों को क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया गया है।
- टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक: आतंकवाद रोधी सहयोग (BIMSTEC Counter Terrorism Cooperation) के तहत आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing), भर्ती और धन शोधन (Money Laundering) को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानकों (FATF) का कड़ाई से पालन करने पर सहमति बनी।
- नई तकनीकों के दुरुपयोग पर नियंत्रण: आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट, सोशल मीडिया और उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक संयुक्त साइबर प्रतिक्रिया नेटवर्क विकसित किया जाएगा।
- सुरक्षा घटक और पहल: भारत के नेतृत्व में इस सुरक्षा स्तंभ के तहत पाँच प्रमुख क्षेत्रीय पहलों को मंजूरी दी गई है:
- मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Enforcement): अवैध नशीले पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए वार्षिक ड्रग रिपोर्ट का प्रकाशन और डेटा साझाकरण अनिवार्य किया गया है।
- मानव तस्करी विरोधी अभियान: सीमा पार मानव तस्करी (Human Trafficking) से निपटने के लिए नोडल एजेंसियों का नेटवर्क मजबूत करना।
- पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT): 2022 की बिम्सटेक एमएलएटी (BIMSTEC MLAT) को तेजी से लागू करने और राष्ट्रीय स्तर पर इसके अनुसमर्थन (Ratification) पर जोर दिया गया है, ताकि अपराधी दूसरे देशों की कानूनी खामियों का फायदा न उठा सकें।
- लंबित संधियों को अंतिम रूप देना: तीन महत्वपूर्ण लंबित संधियों—बिम्सटेक प्रत्यर्पण संधि (BIMSTEC Convention on Extradition), सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण पर अभिसमय, और मानव तस्करी विरोधी संधि को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया।
- प्राकृतिक आपदा प्रबंधन: बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करना।
इसका महत्व:
- ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों का अभिसरण: पाकिस्तान प्रायोजित गतिरोध के कारण सार्क (SAARC) के निष्क्रिय होने के बाद, भारत बिम्सटेक को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले एक मुख्य मंच के रूप में देख रहा है। यह घोषणापत्र भारत की ‘पड़ोस पहले’ नीति को सुरक्षा आयाम देता है।
- रणनीतिक समुद्री सुरक्षा (Maritime Domain Awareness): बंगाल की खाड़ी के पास स्थित मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) से हर साल 80,000 से अधिक जहाज गुजरते हैं। इस क्षेत्र की सुरक्षा भारत के व्यापारिक हितों के लिए जीवन रेखा है। भारत गुरुग्राम स्थित अपने इन्फर्मेशन फ्यूजन सेंटर-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) और ‘व्हाइट शिपिंग सूचना विनिमय’ समझौतों के जरिए इस पूरे क्षेत्र में नौसैनिक और पुलिसिंग समन्वय का नेतृत्व कर रहा है।
- आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण: म्यांमार और बांग्लादेश के साथ भारत की खुली और संवेदनशील सीमाएं हैं। उग्रवाद, हथियार तस्करी और अवैध प्रवासन को रोकने के लिए इन देशों के गृह मंत्रालयों के बीच सीधा परिचालन समन्वय भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: BIMSTEC दिल्ली घोषणापत्र 2026 क्या है?
उत्तर: यह नई दिल्ली में 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में अपनाया गया एक संयुक्त सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी समझौता (BIMSTEC Security Framework) है।
प्रश्न 2: BIMSTEC दिल्ली घोषणापत्र को औपचारिक रूप से क्यों अपनाया गया?
उत्तर: बंगाल की खाड़ी क्षेत्र (Bay of Bengal) में पैर पसार रहे अंतरराष्ट्रीय अपराधों, साइबर धोखाधड़ी, कट्टरपंथ और सीमा-पार आतंकवाद से निपटने के लिए एक कानूनी सुरक्षा ढांचा बनाने हेतु इसे अपनाया गया।
प्रश्न 3: BIMSTEC में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
उत्तर: बिम्सटेक में कुल सात सदस्य देश (BIMSTEC Member Countries) शामिल हैं: भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
प्रश्न 4: दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद से निपटने के लिए क्या प्रावधान हैं?
उत्तर: इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 प्रतिबंधों को लागू करने, टेरर फाइनेंसिंग को रोकने, तथा अपराधियों के प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए कानूनी सहयोग को मजबूत करने के प्रावधान हैं।
प्रश्न 5: BIMSTEC आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ कैसे सहयोग करेगा?
उत्तर: सदस्य देश नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने, सुरक्षा बलों के बीच रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और लंबित प्रत्यर्पण संधियों को शीघ्र लागू करके सहयोग करेंगे।
प्रश्न 6: BIMSTEC का भारत के लिए क्या महत्व है?
उत्तर: यह संगठन भारत को सार्क के विकल्प के रूप में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा नेतृत्व करने, हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों की रक्षा करने और अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को प्रभावी बनाने का मंच देता है।
