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Census Amendment Rules 2026 लागू, जानिए क्या है नए जनगणना नियम?

Census Amendment Rules 2026 लागू, जानिए क्या है नए जनगणना नियम?

Census Amendment Rules 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 (Census Amendment Rules 2026) को लागू किया। 

भारत में जनगणना के नए नियम:

  • निजी क्षेत्र के शिक्षकों की नियुक्ति: नए नियमों के तहत अब सरकारी स्कूलों के साथ-साथ सहायता प्राप्त (Aided) और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों (Unaided Private Educational Institutions), सोसायटियों या ट्रस्टों द्वारा संचालित स्कूलों के शिक्षकों को भी जनगणना ड्यूटी पर लगाया जा सकेगा।
  • कॉर्पोरेट और बैंकिंग कर्मियों की भागीदारी: केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों के क्लर्कों (Clerks) और अधिकारियों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), वैधानिक निकायों, सरकारी व निजी बैंकों, कंपनियों और न्यासों (Trusts) के पात्र कर्मचारियों को भी प्रगणक (Enumerator) बनाया जा सकेगा।
  • राज्यों को विशेषाधिकार: यह संशोधन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को यह विशेष छूट देता है कि वे अपनी आवश्यकतानुसार किसी भी अन्य उपयुक्त व्यक्ति (Any other suitable person) को गणनाकर्ता नियुक्त कर सकते हैं।
  • मूल नियमों में प्रतिस्थापन: इस नए नियम के माध्यम से ‘जनगणना नियम, 1990’ (Census Rules 1990) के नियम 3 के तहत दी गई तालिका में क्रम संख्या 5 की प्रविष्टियों को पूरी तरह बदल दिया गया है।
    • हाल ही में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने निजी स्कूल के शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने के कुछ राज्य सरकारों के आदेशों पर रोक लगा दी थी, क्योंकि मूल नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस विधिक शून्यता को दूर करने के लिए केंद्र ने नियमों में बदलाव किया है।

भारत की जनगणना प्रक्रिया: 

1. संवैधानिक और वैधानिक ढांचा (Constitutional and Legal Framework)

  • संघ सूची का विषय: भारत में संघ की जनसंख्या जनगणना (Population Census India) एक केंद्रीय विषय है। यह भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के तहत संघ सूची (Union List) के क्रम संख्या 69 पर सूचीबद्ध है।
  • वैधानिक शक्ति: संपूर्ण प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948) के कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित की जाती है। यह अधिनियम उत्तरदाताओं को सटीक जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करता है।
  • नियामक प्राधिकरण: गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India – RGCCI) इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व करते हैं। वर्तमान में यह पद मृत्युंजय कुमार नारायण संभाल रहे हैं। 

2. जनगणना का उद्देश्य और प्रशासनिक महत्व (Objective & Significance of Census)

  • नीति निर्माण का आधार: इसका प्राथमिक जनगणना का उद्देश्य देश के नागरिकों के व्यापक जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक डेटा का संग्रह करना है, जो पंचवर्षीय योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का मुख्य आधार बनता है।
  • परिसीमन प्रक्रिया (Delimitation Process): लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावी क्षेत्रों के पुनर्गठन और अनुसूचित जातियों (SC) व अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों के आरक्षण का निर्धारण जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों पर ही निर्भर करता है।
  • वित्तीय आवंटन: वित्त आयोग (Finance Commission) द्वारा राज्यों के बीच केंद्रीय करों के वितरण (Devolution of Taxes) के लिए भी इन जनसंख्या आंकड़ों (Indian Population Data 2026) का उपयोग किया जाता है।

3. जनगणना की तकनीकी एवं विशिष्ट विशेषताएं

  • प्रथम डिजिटल जनगणना: यह भारत के इतिहास की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा संग्रह (Census Data Collection Rules) के लिए पारंपरिक कागज के फॉर्म के बजाय मोबाइल ऐप और डिजिटल पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
  • स्व-गणना (Self-Enumeration): नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन लॉगइन करके अपने परिवार की जानकारी दर्ज करने की सुविधा प्रदान की गई है। 
  • जातिगत गणना का समावेश: कैबिनेट के पूर्व निर्णयों के अनुरूप, इस बार नौ दशकों के बाद व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा भी संकलित किया जा रहा है, जिससे इसकी प्रशासनिक जटिलता और मानव संसाधन की मांग बढ़ गई है।
  • द्वि-चरणीय दृष्टिकोण (Two-Phase Approach):
    • प्रथम चरण: मकानों की सूचीकरण और आवासीय जनगणना (House Listing) जो अप्रैल से सितंबर 2026 के मध्य संचालित की गई।
    • द्वितीय चरण: वास्तविक जनसंख्या गणना (Population Enumeration), जो मुख्य रूप से फरवरी 2027 में निर्धारित है, जबकि चुनावी राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि) में इसे दिसंबर 2026 से ही शुरू किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 क्या हैं?

उत्तर: इसके तहत गृह मंत्रालय ने जनगणना नियम 1990 में संशोधन करके निजी स्कूल के शिक्षकों, बैंक, पीएसयू और निजी कंपनियों के कर्मचारियों को प्रगणक नियुक्त करने का वैधानिक रास्ता साफ किया है।

प्रश्न 2: Census Amendment Rules 2026 लागू होने से क्या बदलाव होंगे?

उत्तर: अब जनगणना के विशाल कार्य के लिए केवल सरकारी कर्मचारियों पर निर्भरता नहीं रहेगी; निजी और कॉर्पोरेट क्षेत्र के कर्मियों को भी इस राष्ट्रीय कार्य में तैनात किया जा सकेगा।

प्रश्न 3: भारत में जनगणना कराने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका उद्देश्य देश की आबादी, साक्षरता, रोजगार, भाषा और सामाजिक स्थिति के सटीक आंकड़े जुटाना है ताकि सटीक सरकारी नीतियां और वित्तीय योजनाएं बनाई जा सकें।

प्रश्न 4: भारत में Census प्रक्रिया कौन संचालित करता है?

उत्तर: यह प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन कार्यरत भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (RGCCI) के कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित की जाती है।

प्रश्न 5: जनगणना के दौरान नागरिकों से कौन-कौन सी जानकारी ली जाती है?

उत्तर: प्रगणक घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति, रोजगार, भाषा, पलायन, आवास की स्थिति और जाति से संबंधित आधिकारिक डिजिटल प्रश्नावली के आधार पर विवरण दर्ज करते हैं।

प्रश्न 6: Census Rules 2026 का आम नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: आम नागरिकों के लिए डेटा प्रविष्टि की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और त्वरित होगी, साथ ही उनके क्षेत्रों में निजी व कुशल गणनाकर्ताओं के माध्यम से डिजिटल रूप से सटीक डेटा दर्ज किया जा सकेगा।

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