Manipur-BHASHINI AI Partnership: भाषिनी शिल्पी और भाषिनी मित्रा पहल को मिलेगा बढ़ावा
संदर्भ:
Manipur-BHASHINI AI Partnership: हाल ही में इम्फाल, मणिपुर में डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (DIBD) और मणिपुर सरकार के बीच बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Multilingual AI) और भाषा प्रौद्योगिकी (Language Technology) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
Manipur-BHASHINI AI Partnership के मुख्य बिंदु:
- हस्ताक्षर: इस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत संचालित ‘भाषिनी राज्यम कार्यशाला’ (BHASHINI Rajyam Workshop) के दौरान किया गया।
- इस उच्च स्तरीय समझौते पर डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री अमिताभ नाग और मणिपुर सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री सोमरजीत सलाम (IAS) द्वारा आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए।
- कार्यशाला के दौरान एक जीवंत प्रदर्शन के रूप में अंग्रेजी से मणिपुरी भाषा में वास्तविक समय अनुवाद (Real-Time English-to-Manipuri Translation) का सफल लाइव डेमो दिखाया गया।
- उद्देश्य: इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission) के तहत ‘भाषिनी शिल्पी’ (Bhashini Shilpi Initiative) और ‘भाषिनी मित्रा’ (Bhashini Mitra Initiative) पहलों को गति प्रदान करना है।
- मणिपुर की भाषाई विविधता और एआई का एकीकरण: मणिपुर राज्य अपनी अद्वितीय और समृद्ध भाषाई विविधता के लिए जाना जाता है। इस Manipur BHASHINI AI Partnership के तहत एआई भाषा मॉडल को निम्नलिखित क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के लिए विकसित और मान्य (Validate) किया जाएगा:
- मणिपुरी (Manipuri)
- तंगखुल (Tangkhul)
- थाडौ (Thadou)
- पैते (Paite)
- हमार (Hmar)
- लियांगमाई (Liangmai)
राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन क्या हैं?
- परिचय: राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (National Language Translation Mission – NLTM) भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है।
- यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
- इसे प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) के ‘सिटिजन सेंट्रिक’ (नागरिक-केंद्रित) मिशनों के तहत हरी झंडी दी गई थी।
- मुख्य उद्देश्य: भारत की भाषाई विविधता के कारण पैदा होने वाले डिजिटल और सूचनात्मक अंतर (Digital & Language Divide) को समाप्त करना।
- इसका लक्ष्य इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को भारतीय भाषाओं (विशेष रूप से संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 आधिकारिक भाषाओं) में सुलभ बनाना है।
- तकनीक: यह मिशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित है।
- प्रमुख प्लेटफॉर्म – भाषिनी (BHASHINI): इसी मिशन के तहत जुलाई 2022 में ‘डिजिटल इंडिया भाषिनी’ (BHASHa INterface for India) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया, जो एक राष्ट्रीय सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना (Digital Public Infrastructure – DPI) के रूप में काम कर रहा है।
- ‘भाषिनी शिल्पी’ (Bhashini Shilpi Initiative): यह पहल डेवलपर्स, इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स और तकनीकी समुदाय को केंद्रित करके तैयार की गई है। ‘शिल्पी’ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘मूर्तिकार’ या ‘गढने वाला’।
- इस पहल के तहत तकनीकी क्षेत्र के लोग भारत के भाषा एआई इकोसिस्टम को नया आकार देते हैं।
- उद्देश्य: डेवलपर्स और तकनीकी दिमागों को भाषाई AI टूल्स और मॉडल्स के साथ प्रयोग करने, नए ऐप बनाने और मौजूदा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को समृद्ध करने के अवसर देना।
- मुख्य विशेषताएं:
- इसके तहत भाषिनी प्लेटफॉर्म के Open Bhashini APIs और 1000 से अधिक पूर्व-प्रशिक्षित AI मॉडल्स को डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
- स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए ‘भाषिनी स्प्रिंट’ (BHASHINI Sprint) जैसी चुनौतियां आयोजित की जाती हैं ताकि वे भारतीय भाषाओं के लिए वाणिज्यिक उत्पाद और नवाचार (जैसे वॉयस बॉट्स, ट्रांसलेशन ऐप्स) तैयार कर सकें।
- यह एआई-संचालित भाषा टूल्स का लोकतांत्रीकरण (Democratization) करता है ताकि कोई भी छोटा डेवलपर बिना किसी बड़ी लागत के बहुभाषी ऐप बना सके।
- ‘भाषिनी मित्रा’ (Bhashini Mitra Initiative): यह पहल संस्थागत जुड़ाव और सामुदायिक सह-निर्माण (Co-creation) पर आधारित है। ‘मित्रा’ (मित्र) का अर्थ है सहयोगी। इसके तहत सरकारी विभागों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों और नागरिक समाजों को एक साथ जोड़ा जाता है।
- उद्देश्य: विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में भाषिनी के अनुवाद टूल्स को एकीकृत (Integrate) करना और भाषाई समुदायों से डेटा एकत्र करना।
- मुख्य विशेषताएं:
- इसके तहत गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM), ओएनडीसी (ONDC) और राज्य सरकारों (जैसे मणिपुर, राजस्थान) के साथ साझेदारी की जाती है ताकि सरकारी सेवाओं को स्थानीय भाषा में डिलीवर किया जा सके।
- इसका एक प्रमुख हिस्सा ‘भाषादान’ (Bhasha Daan) क्राउडसोर्सिंग अभियान भी है, जहाँ देश के आम नागरिक अपनी स्थानीय बोलियों और भाषाओं में आवाज, टेक्स्ट और अनुवाद का योगदान देकर भाषा एआई के डेटासेट को मजबूत बनाते हैं।
अनुप्रयोग:
- ई-गवर्नेंस और लोक सेवा वितरण (Public Service Delivery): सरकारी योजनाएं, फॉर्म, प्रमाण पत्र और दिशा-निर्देश दूरदराज के क्षेत्रों के नागरिकों को उनकी मातृभाषा में उपलब्ध होंगे।
- स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों के मरीज वॉयस-आधारित एआई टूल्स के माध्यम से अपनी भाषा में डॉक्टरों से परामर्श या स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सरकारी जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे।
- शिक्षा (Education): स्थानीय भाषाओं में डिजिटल पाठ्यपुस्तकों और ई-लर्निंग सामग्रियों का त्वरित अनुवाद संभव हो सकेगा, जिससे गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा ग्रामीण स्तर तक सुलभ होगी।
- कानूनी सेवाएँ और लोक शिकायत निवारण (Legal Services & Grievance Redressal): आम नागरिक अपनी स्थानीय बोली में शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और एआई बिना किसी मानवीय बाधा के उसका सटीक अनुवाद और वर्गीकरण कर प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँचाएगा।
महत्व:
- डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion): भारत के राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति भी इसका उपयोग कर सके। भाषिनी के माध्यम से ‘भाषा-प्रथम’ (Language-First) दृष्टिकोण अपनाकर निरक्षरता और भाषाई बाधा को समाप्त किया जा रहा है।
- पूर्वोत्तर भारत का विकास: पूर्वोत्तर राज्यों में अक्सर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सूचनाओं का प्रवाह धीमा होता है। यह एआई साझेदारी मणिपुर के पहाड़ी और घाटी समुदायों के बीच डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को कम कर सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगी।
- सॉफ्ट पावर और कूटनीति: डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग वर्तमान में 36 भारतीय पाठ (Text) भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि (Voice) भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है।
- इसकी तकनीकें 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित कर दैनिक 24 मिलियन से अधिक एआई अनुमानों (AI Inferences) को प्रोसेस कर रही हैं। मणिपुर में इसका सफल अनुप्रयोग सीमावर्ती राज्यों के लिए एक रोल मॉडल बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Manipur-BHASHINI AI Partnership क्या है?
Ans: यह डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (DIBD) और मणिपुर सरकार के बीच 14 अक्टूबर 2026 को हुआ एक समझौता है, जिसके तहत मणिपुर की स्थानीय भाषाओं और बोलियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से डिजिटल सरकारी सेवाओं में एकीकृत किया जाएगा।
Q2. Bhashini Shilpi और Bhashini Mitra पहल क्या हैं?
Ans: ‘भाषिनी शिल्पी’ डेवलपर्स और छात्रों के लिए भाषा एआई के साथ प्रयोग और नवाचार करने का एक मंच है। वहीं ‘भाषिनी मित्रा’ एक क्राउडसोर्सिंग पहल है जो स्थानीय समुदायों से भाषाई इनपुट और डेटा एकत्र कर एआई मॉडल को प्रशिक्षित करती है।
Q3. मणिपुर और BHASHINI के बीच AI साझेदारी से क्या लाभ होंगे?
Ans: मणिपुर के नागरिक अब अपनी स्थानीय भाषाओं (जैसे मणिपुरी, तंगखुल, थाडौ आदि) में बिना किसी भाषा की बाधा के शिक्षा, स्वास्थ्य, और लोक शिकायतों जैसी ई-गवर्नेंस सेवाओं का उपयोग वॉयस या टेक्स्ट के माध्यम से आसानी से कर सकेंगे।
