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चीन में Giant Fungus Discovery, ‘D-Rex’ दिया गया नाम

चीन में Giant Fungus Discovery, ‘D-Rex’ दिया गया नाम

Giant Fungus Discovery in China

Image Credit: Frontiers

संदर्भ: 

हाल ही में कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी (Kunming Institute of Botany) के वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पश्चिमी चीन के जंगलों में एक अद्वितीय विशालकाय कवक की खोज (Giant Fungus Discovery) की। इसे आधिकारिक रूप से डियानजुनस रेक्स (Dianjunus rex) नाम दिया गया, जिसे शोधकर्ताओं ने प्यार से ‘डी-रेक्स’ (D-Rex) का उपनाम दिया है। 

डियानजुनस रेक्स (D-Rex) कवक के बारे में:

  • कुल और वंश: D-Rex कवक न केवल एक नई प्रजाति है, बल्कि यह अपने अनोखे आनुवंशिक गुणों के कारण जाइलैरिएल्स (Xylariales) गण के अंतर्गत एक पूर्णतः नए वंश (New Genus) और एक नए कवक कुल डियानजुनिएसी (Dianjunaceae) के अंतर्गत शामिल है। 
  • एस्कोमायकोटा संघ: यह कवक एस्कोमायकोटा (Ascomycota) संघ से संबंधित है। एस्कोमायकोटा कवकों का सबसे बड़ा समूह है, जिसमें 64,000 से अधिक ज्ञात प्रजातियां शामिल हैं। डी-रेक्स इस पूरे संघ में अब तक का सबसे बड़ा फलन काय (Fruiting Body) बनाने वाला कवक बन गया है।
  • भौगोलिक अवस्थिति: इस विशाल कवक की खोज चीन के युन्नान प्रांत (Yunnan Province, China) के घने और जैविक रूप से समृद्ध वनों में की गई।
  • पारिस्थितिक तंत्र: वैज्ञानिकों को यह कवक मुख्य रूप से युन्नान के शीतोष्ण शंकुधारी वनों (Temperate Coniferous Forests) तथा उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (Tropical Rainforests) में सर्वेक्षण के दौरान मिला। 
  • मेजबान वृक्ष: यह कवक चीनी कॉर्क ओक (Quercus variabilis) के पेड़ों की लकड़ी की जड़ों के पास राइजोस्फीयर (Rhizosphere – जड़ों के आसपास की मिट्टी) से उगता हुआ पाया गया। 
  • प्रमुख शारीरिक विशेषताएं (D-Rex Fungus Characteristics):
  • असाधारण आकार (Towering Stature): सामान्य खुम्बों (Mushrooms) के विपरीत, यह कवक सीधी उठी हुई उंगली जैसी सफेद संरचनाएं बनाता है जिसे स्ट्रोमाटा (Stromata) कहा जाता है। इसकी ऊंचाई 50 सेंटीमीटर (लगभग 20 इंच) तक हो सकती है। इससे पहले इस समूह के अधिकतम कवक केवल 20-30 सेमी तक ही बढ़ते थे।
  • वजन: इसके फलन काय का वजन 2.2 किलोग्राम (लगभग 4.9 पाउंड) तक दर्ज किया गया है, जो कवक जगत की इस श्रेणी में एक नया रिकॉर्ड है।
  • पोषण पद्धति: यह कवक जाइलैरिएल्स गण के अन्य सदस्यों की तरह सड़ी-गली लकड़ियों और मृत पादप ऊतकों को पचाने के लिए विशेष एंजाइमों का स्राव करता है।
    • यह एक महत्वपूर्ण अपघटक (Decomposer) के रूप में कार्य करता है। 

खोज का महत्व:

  • डायनासोर युग से सीधा संबंध: आनुवंशिक विश्लेषण और आणविक घड़ी डेटिंग (Molecular-clock Dating) से पता चला है कि इस कवक की वंशावली लगभग 65 मिलियन (साढ़े 6 करोड़) वर्ष पुरानी है। यह ठीक वह समय था जब धरती से डायनासोरों का सामूहिक विलोपन (Mass Extinction) हुआ था।
  • पारिस्थितिकीय अवसर (Ecological Opportunities): वैज्ञानिकों का मानना है कि डायनासोरों के अंत के बाद जब वैश्विक स्तर पर विशाल वन नष्ट हुए और भारी मात्रा में मृत लकड़ियां उपलब्ध हुईं, तब इन अपघटक कवकों के पूर्वजों को फलने-फूलने का अभूतपूर्व पारिस्थितिक अवसर मिला।
  • विकासवादी अनुकूलन (Evolutionary Adaptation): डी-रेक्स का इतना विशाल आकार यह समझने में मदद करता है कि घने जंगलों में हवा के माध्यम से अपने बीजाणुओं (Spores) को अधिक दूर तक फैलाने के लिए पौधों और कवकों ने खुद को कैसे अनुकूलित किया।
  • जैव-प्रौद्योगिकी क्षमता (Biotechnological Potential): सड़ी हुई सख्त लकड़ी को पचाने की क्षमता के कारण इसके एंजाइमों का उपयोग भविष्य में बायो-फ्यूल उत्पादन (Biofuel Production), अपशिष्ट प्रबंधन और फार्मास्युटिकल उद्योगों में किया जा सकता है।
  • पूर्वी हिमालयी क्षेत्र: चीन का युन्नान प्रांत भारत के जैव-विविधता हॉटस्पॉट पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas) के भौगोलिक रूप से बेहद करीब है। यह खोज दर्शाती है कि इस क्षेत्र के जंगलों में अभी भी कई अज्ञात प्रागैतिहासिक सूक्ष्मजीव और कवक छिपे हो सकते हैं, जिसके लिए भारत को भी अपने कवक जैव विविधता अनुसंधान (Fungal Biodiversity Research) को तेज करना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: चीन में खोजे गए विशालकाय कवक को डी-रेक्स नाम क्यों दिया गया है?

उत्तर: इसके प्रभावशाली विशाल आकार और प्रागैतिहासिक काल (डायनासोर विलोपन काल) से जुड़ाव के कारण वैज्ञानिकों ने इसे टायरानोसोरस रेक्स (T-Rex) से प्रेरित होकर ‘डी-रेक्स’ (D-Rex) का उपनाम दिया है। इसका वैज्ञानिक नाम डियानजुनस रेक्स (Dianjunus rex) है। 

प्रश्न 2: डी-रेक्स कवक की खोज चीन में कहां हुई है?

उत्तर: इस दुर्लभ कवक की खोज दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत (Yunnan Province) के शीतोष्ण शंकुधारी और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में चीनी कॉर्क ओक के पेड़ों की जड़ों के पास की गई है। 

प्रश्न 3: डी-रेक्स कवक की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: यह कवक 50 सेमी तक ऊंचा बढ़ सकता है और इसका वजन 2.2 किलोग्राम तक हो सकता है। यह एस्कोमायकोटा संघ का सबसे बड़ा कवक है और इसकी फलन संरचनाएं सफेद, उंगली जैसी (स्ट्रोमाटा) होती हैं।

प्रश्न 4: इस विशालकाय कवक की खोज वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह खोज कवक जगत में एक नए परिवार (Dianjunaceae) को जोड़ती है। इसकी वंशावली 65 मिलियन वर्ष पुरानी होने के कारण यह डायनासोरों के विलुप्त होने के बाद पृथ्वी के वानस्पतिक और पारिस्थितिक बदलावों पर नई रोशनी डालती है। 

प्रश्न 5: डी-रेक्स कवक अन्य कवक प्रजातियों से किस प्रकार अलग है?

उत्तर: सामान्य एस्कोमायकोटा कवक आकार में छोटे (8-12 इंच) होते हैं। डी-रेक्स अपने समूह के पिछले सभी रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए लगभग दोगुना बड़ा है और इसमें मृत लकड़ी को अपघटित करने वाले विशिष्ट एंजाइम पाए जाते हैं।

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