Apni Pathshala

आकाश300 3D प्रिंटर (Aakash300 3D Printer) | UPSC Preparation

Aakash300 3D Printer

Aakash300 3D Printer

संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में केरल स्थित एक स्टार्टअप से Akasha300 नामक एक उन्नत 3D प्रिंटर प्राप्त किया है। यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

Akasha300 3D प्रिंटर क्या हैं?

Akasha300 एक इंडस्ट्रियल-ग्रेड, उच्च-तापमान वाला ‘मल्टी-मटेरियल एक्सट्रूज़न’ 3D प्रिंटर है। इसे तिरुवनंतपुरम स्थित डीप-टेक स्टार्टअप Spacetime 4D Printing Solution द्वारा विकसित किया गया है। 

  • सहयोग: इस परियोजना को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) के STIIC और केरल स्टार्टअप मिशन (KSUM) का समर्थन प्राप्त है। 

प्रमुख तकनीकी विशेषताएं:

  • उच्च तापमान क्षमता: इसकी नोजल 350°C तक तापमान पर काम कर सकती है, जिसे भविष्य में 500°C तक बढ़ाया जा सकता है।
  • मल्टी-मटेरियल एक्सट्रूज़न: इसमें ‘डुअल-एक्सट्रूज़न’ तकनीक है, जिससे एक साथ दो अलग-अलग सामग्रियों (जैसे उच्च-शक्ति पॉलिमर और घुलनशील सपोर्ट) का उपयोग किया जा सकता है।
  • नियंत्रित वातावरण: इसमें 110°C (150°C तक अपग्रेड करने योग्य) का हीटेड बेड और 80°C तक तापमान बनाए रखने वाला एक बंद चैम्बर है, जो प्रिंटिंग के दौरान सामग्री की स्थिरता सुनिश्चित करता है।
  • सामग्री का उपयोग: यह PEEK, PEKK और कार्बन-फाइबर जैसे उन्नत इंजीनियरिंग थर्मोप्लास्टिक्स और कंपोजिट्स को प्रोसेस कर सकता है। 

ISRO के लिए इसका महत्व:

  • त्वरित प्रोटोटाइपिंग: पारंपरिक निर्माण में हफ्तों लगने वाले काम अब कुछ ही दिनों में पूरे किए जा सकेंगे।
  • लागत में कमी: 3D प्रिंटिंग (Additive Manufacturing) से सामग्री की बर्बादी कम होती है और विशेष औजारों (tooling) की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • जटिल डिजाइन: यह ऐसे जटिल ज्यामितीय आकार (complex geometries) बना सकता है जो पारंपरिक मशीनिंग से असंभव हैं। 
  • भविष्य के मिशन: इस तकनीक का लाभ भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और भविष्य के चंद्र मिशनों में हल्के और मजबूत पुर्जे बनाने के लिए लिया जाएगा।

सरकारी पहले:

  • भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: यह निजी संस्थाओं को उपग्रह संचालन, प्रक्षेपण यान विकसित करने और एंड-टू-एंड अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेने का कानूनी ढांचा प्रदान करती है।
  • IN-SPACe: यह एकल खिड़की (Single-window) एजेंसी निजी कंपनियों को ISRO की सुविधाओं का उपयोग करने और मिशनों की अनुमति देने के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करती है।
  • FDI उदारीकरण: उपग्रह विनिर्माण में 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है, जिससे वैश्विक पूंजी और तकनीक का आगमन सुलभ हुआ है।
  • ₹1000 करोड़ का वेंचर कैपिटल फंड: सरकार ने अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने के लिए इस विशेष फंड की घोषणा की है।
  • NSIL: यह संस्था ISRO की तकनीक को निजी उद्योगों को स्थानांतरित (Transfer of Technology) करने का कार्य करती है।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top