GARBH-INi Program
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्री द्वारा इंडिया हैबिटेट सेंटर में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की GARBH-INi कार्यक्रम की सफलता और उपलब्धियां के बारे में चर्चा की।
GARBH-INi कार्यक्रम क्या हैं?
- GARBH-INi (Interdisciplinary Group for Advanced Research on Birth Outcomes) भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार करना है।
- यह कार्यक्रम 2015 में ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI), फरीदाबाद द्वारा शुरू किया गया था।
- यह ‘अटल जय अनुसंधान जैव प्रौद्योगिकी मिशन – UNATI’ का एक हिस्सा है। इसका मुख्य केंद्र समय से पहले जन्म (Preterm Birth) की समस्याओं को समझना और उनका स्वदेशी समाधान खोजना है।
सफल परिणाम और प्रमुख उपलब्धियां:
- भारत-विशिष्ट AI मॉडल (Garbhini-GA2):
- सटीक गर्भावस्था निर्धारण: शोधकर्ताओं ने IIT मद्रास के सहयोग से Garbhini-GA2 नामक एक AI मॉडल विकसित किया है।
- महत्व: वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले पश्चिमी मॉडलों (जैसे Hadlock) की तुलना में यह भारतीय महिलाओं के लिए भ्रूण की आयु (Gestational Age) बताने में 3 गुना अधिक सटीक है। यह दूसरी और तीसरी तिमाही में विशेष रूप से प्रभावी है। [7, 8, 9]
- दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा ‘प्रेग्नेंसी कोहोर्ट’ (Pregnancy Cohort):
- इस अध्ययन में 12,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत किया गया है।
- यह दक्षिण एशिया के सबसे बड़े डेटासेट में से एक है, जो गर्भावस्था से लेकर प्रसवोत्तर (postpartum) तक के विस्तृत डेटा को ट्रैक करता है। [1, 6, 10, 11]
- राष्ट्रीय बायो-रिपॉजिटरी और GARBH-INi-DRISHTI:
- डेटा रिपॉजिटरी: एक विशाल भंडार बनाया गया है जिसमें 16 लाख से अधिक बायो-नमूनों (Biospecimens) और 10 लाख से अधिक अल्ट्रासाउंड छवियों का संग्रह है।
- DRISHTI प्लेटफॉर्म: यह एक डेटा डैशबोर्ड है जो शोधकर्ताओं को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य पर शोध के लिए व्यापक डेटा तक पहुँच प्रदान करता है। [6, 12, 13, 14]
- आणविक और आनुवंशिक खोजें:
- समय से पहले जन्म से जुड़े 19 आनुवंशिक मार्करों (Genetic Markers) और सूक्ष्मजीवविज्ञानी (Microbiome) संकेतकों की पहचान की गई है।
- योनि माइक्रोबायोम (Vaginal Microbiome) के माध्यम से जोखिम का जल्दी पता लगाने के लिए ‘डिपस्टिक परीक्षण’ (Dipstick assays) पर शोध जारी है। [15, 16, 17]
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer):
- सूक्ष्मजीवी उपचार: ‘लैक्टोबेसिलस क्रिस्पैटस’ (Lactobacillus crispatus) आधारित माइक्रोबियल कंसोर्टियम के व्यावसायीकरण के लिए निजी कंपनियों के साथ समझौते किए गए हैं।
- AI अल्ट्रासाउंड: Qure.ai जैसी कंपनियों के साथ मिलकर AI-आधारित अल्ट्रासाउंड रिपोर्टिंग सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।
प्रमुख AI मॉडल और संस्करण:
- Garbhini-GA2 (प्रगतिशील संस्करण): यह वर्तमान का सबसे उन्नत मॉडल है जिसे विशेष रूप से गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही (4-9 महीने) के लिए विकसित किया गया है। यह पश्चिमी देशों के ‘Hadlock’ और ‘INTERGROWTH-21st’ मॉडल का भारतीय विकल्प है।
- GARBH-INi-DRISHTI: यह इस पहल का आधिकारिक डेटा रिपॉजिटरी और सूचना साझाकरण हब है। इसे हाल ही में 2025-26 के आसपास एक उन्नत ‘डेटा डैशबोर्ड’ के रूप में लॉन्च किया गया। इसमें 12,000 से अधिक प्रतिभागियों का डेटा, 1.6 मिलियन बायो-नमूने और 10 लाख से अधिक अल्ट्रासाउंड चित्र शामिल हैं।
- DRISHTI VizGarbh: यह डैशबोर्ड का एक दृश्य (visual) संस्करण है जो शोधकर्ताओं को 1500 से अधिक विभिन्न मापदंडों (parameters) का विश्लेषण करने की सुविधा देता है।
- जोखिम स्तरीकरण प्लेटफॉर्म (Risk Stratification): GARBH-INi-AnandiMaa पहल के तहत, Qure.ai और DOTO Health जैसी कंपनियों के साथ मिलकर समय से पहले जन्म (Preterm Birth) के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने वाले नए सॉफ्टवेयर मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।
