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अमोघ ज्वाला सैन्य अभ्यास (Amogh Jwala military exercise) | Apni Pathshala

Amogh Jwala military exercise

Amogh Jwala military exercise

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान (Southern Command) ने ‘अमोघ ज्वाला’ (Exercise Amogh Jwala) नामक सैन्य अभ्यास का सफलतापूर्वक संचालन किया। जिसमें आधुनिक युद्धक्षेत्र की उभरती चुनौतियों और भविष्य की युद्ध तैयारियों से निपटने के लिए सैन्य अभ्यास किया गया। 

अभ्यास अमोघ ज्वाला के बारे मे:

  • परिचय: यह सैन्य अभ्यास भारतीय सेना की दक्षिणी कमान द्वारा संचालित एक बहु-आयामी एकीकृत मारक क्षमता अभ्यास (Integrated Firepower Exercise) है। इसका मुख्य केंद्र मशीनीकृत बलों, हमले वाले हेलीकॉप्टरों और आधुनिक निगरानी उपकरणों के बीच वास्तविक समय (Real-time) में तालमेल बिठाना है।
  • संचालन अवधि: मार्च 2026 (लगभग 13 दिन)।
  • स्थान: बबीना फील्ड फायरिंग रेंज, झाँसी (उत्तर प्रदेश)
  • नेतृत्व: इसका निरीक्षण दक्षिणी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने किया।
  • सहभागिता: इसमें इन्फैंट्री (पैदल सेना), आर्मर्ड (बख्तरबंद कोर), आर्टिलरी (तोपखाना), आर्मी एविएशन और वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।

मुख्य उद्देश्य:

  • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध: विभिन्न सेना इकाइयों के बीच डिजिटल और सुरक्षित संचार नेटवर्क के माध्यम से सूचना साझा करने की क्षमता को परखना।
  • प्रौद्योगिकी समावेशन: ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) जैसे आधुनिक उपकरणों को पारंपरिक युद्ध कौशल में शामिल करना।
  • संयुक्त संचालन: थल और वायु सेना के बीच निर्बाध समन्वय (Seamless Synergy) स्थापित करना।
  • मारक क्षमता का परीक्षण: लंबी दूरी के हथियारों और सटीक हमले (Precision Strikes) की प्रभावशीलता का मूल्यांकन।

प्रमुख गतिविधियां:

  • ड्रोन आधारित टोही: लक्ष्य का पता लगाने और उसे नष्ट करने के लिए उन्नत निगरानी ड्रोन्स का उपयोग।
  • लाइव फायरिंग: टैंकों (T-90/T-72), स्वदेशी तोपों और हमलावर हेलीकॉप्टरों द्वारा समन्वित गोलाबारी।
  • रात्रि युद्ध अभ्यास: रात के अंधेरे में थर्मल इमेजरी और नाइट विजन उपकरणों की मदद से आक्रामक ऑपरेशन करना।
  • सॉफ़्टवेयर-परिभाषित रेडियो (SDR): जैम-प्रूफ संचार प्रणालियों का परीक्षण ताकि शत्रु के इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप को विफल किया जा सके।

रणनीतिक महत्व:

  • उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर तत्परता: दक्षिणी कमान की यह कवायद भारत की सीमाओं पर किसी भी खतरे का त्वरित और निर्णायक जवाब देने की तैयारी को दर्शाती है।
  • आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण: यह अभ्यास ‘डिफेंस विजन 2047’ के अनुरूप है, जहाँ स्वदेशी तकनीक और आधुनिकीकरण के माध्यम से सेना को एक फुर्तीले और अनुकूलनीय बल (Agile and Adaptable Force) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • संयुक्तता (Jointness): थल और वायु सेना के बीच निर्बाध समन्वय आधुनिक युद्धक्षेत्र में ‘संयुक्तता’ के महत्व को रेखांकित करता है। 
नोट: दक्षिणी कमान के बारे में: यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कमानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1895 में हुई थी। इसका मुख्यालय पुणे में स्थित है। यह कमान भारत के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी प्रायद्वीपीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है।

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