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विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) | Apni Pathshala

Appropriation Bill

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संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने राज्यसभा में विनियोग विधेयक, 2026 पेश किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि से अतिरिक्त राशियों के भुगतान और विनियोजन को अधिकृत करने के लिए इस पर गहन चर्चा हुई। 

विनियोग विधेयक क्या हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत, विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण है जो सरकार को भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। जब तक संसद इस विधेयक को पारित नहीं कर देती, सरकार देश के खजाने से एक रुपया भी खर्च नहीं कर सकती।

विनियोग विधेयक से संबंधित मुख्य बाते: 

    • प्रक्रिया: बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) पेश होने के बाद, लोकसभा में ‘अनुदान की मांगों’ (Demands for Grants) पर चर्चा और मतदान होता है। इन मांगों के पारित होने के बाद, विनियोग विधेयक पेश किया जाता है।
    • अनुच्छेद 114(1): यह प्रावधान करता है कि लोकसभा द्वारा पारित अनुदानों और संचित निधि पर भारित व्यय को पूरा करने के लिए विनियोग विधेयक लाया जाएगा।
    • प्रकृति: यह एक धन विधेयक (Money Bill) है, जिसे केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
  • राज्यसभा की भूमिका: चूँकि यह एक धन विधेयक है, इसलिए राज्यसभा की शक्तियाँ इसमें सीमित हैं: राज्यसभा इसे संशोधित या अस्वीकार नहीं कर सकती। साथ ही उच्च सदन को इसे 14 दिनों के भीतर सुझावों के साथ या बिना सुझावों के वापस करना होता है। यदि 14 दिनों में वापस नहीं किया जाता, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
  • व्यय: विनियोग विधेयक में दो प्रकार के खर्च शामिल होते हैं:
  • मतदान योग्य (Voted): वे खर्चे जिन पर संसद में मतदान होता है (जैसे विभिन्न मंत्रालयों की योजनाएं)।
  • भारित व्यय (Charged Expenditure): ये वे खर्च हैं जिन पर मतदान नहीं होता, जैसे राष्ट्रपति का वेतन, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन, तथा सरकारी कर्ज का ब्याज।
  • प्रतिबंध: अनुच्छेद 114(2) के अनुसार, विनियोग विधेयक में ऐसा कोई संशोधन प्रस्तावित नहीं किया जा सकता जो अनुदान की राशि में बदलाव करे या उसके गंतव्य (Destination) को बदल दे।
  • कानूनी अनिवार्यता: राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद ही यह ‘विनियोग अधिनियम’ बनता है, जिसके बाद ही सरकार आधिकारिक रूप से खर्च शुरू कर सकती है।
  • लेखानुदान (Vote on Account): सामान्यतः बजट प्रक्रिया में समय लगता है। इसलिए, नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) के शुरुआती खर्चों के लिए संविधान के अनुच्छेद 116 के तहत ‘लेखानुदान’ लिया जाता है, जो विनियोग विधेयक का ही एक संक्षिप्त रूप है।

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