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अरावली परिभाषा समीक्षा हेतु सुप्रीम कोर्ट उच्च स्तरीय समिति (Aravalli Definition Review Committee)

अरावली परिभाषा समीक्षा हेतु सुप्रीम कोर्ट उच्च स्तरीय समिति (Aravalli Definition Review Committee)

Aravalli Definition Review Committee

 

संदर्भ: 

पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण अरावली पर्वतमाला की वैज्ञानिक परिभाषा और सीमांकन के पुनर्मूल्यांकन के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में एक 5 सदस्यीय उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति (HPC) का गठन किया है।

Aravalli Definition Review Committee के बारे में:

उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ द्वारा जून 2026 में Aravalli Definition Review Committee का गठन किया गया। जिसकी विस्तृत संरचना और कार्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं: 

  • समिति की संरचना: अदालत ने वैज्ञानिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए एक 5-सदस्यीय पैनल का गठन किया है, जिसमें वानिकी, भूविज्ञान और पारिस्थितिकी के शीर्ष विशेषज्ञ शामिल हैं: 

    • अध्यक्ष (Chairperson): कंचन देवी (महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद – ICFRE)। 
    • विशेषज्ञ सदस्य (Expert Members):
      • डॉ. सुभाष आशुतोष (पूर्व महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण – FSI)।
      • डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा (पूर्व निदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण – GSI)।
      • बृज मोहन सिंह राठौर (पूर्व संयुक्त सचिव, पर्यावरण मंत्रालय)।
      • प्रो. अशोक के. भटनागर (पूर्व विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय)। 
    • विशेष आमंत्रित सदस्य (Special Invitees): प्रोफेसर जगदीश कृष्णस्वामी (IIHS, बेंगलुरु) और प्रो. लक्ष्मीकांत शर्मा (हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय)।
    • सदस्य सचिव (Member Secretary): पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा नामित निदेशक रैंक के अधिकारी। 
  • समिति का कार्य क्षेत्र: सुप्रीम कोर्ट ने समिति को अरावली के ‘पारिस्थितिकी तंत्र’ की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी और वैज्ञानिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी है: 
  • मानदंडों की वैज्ञानिक समीक्षा (Scientific Review of Criteria): अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में प्रस्तावित “100 मीटर न्यूनतम ऊंचाई” और “500 मीटर गैप” के मानदंडों की वैज्ञानिक वैधता की जांच करना। 
  • डेटा की तथ्यात्मक शुद्धता (Factual Accuracy Check): यह जांचना कि क्या राजस्थान की 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानना व्यावहारिक रूप से सही है।
  • पारिस्थितिक निरंतरता (Ecological Continuity): मूल्यांकन करना कि क्या 500 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित पहाड़ियां भी एक अखंड पारिस्थितिक तंत्र (Continuous Ecological Formation) का हिस्सा हैं, और क्या उनके बीच के खाली क्षेत्रों में खनन (Mining) की अनुमति दी जा सकती है। 
  • नियामक कमियों की पहचान (Evaluating Regulatory Gaps): वर्तमान कानूनी सुरक्षा उपायों का विश्लेषण करना ताकि निचले पहाड़ी क्षेत्रों को सुरक्षा तंत्र से बाहर होने से बचाया जा सके। 
  • सार्वजनिक परामर्श (Public Participation): दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात की सरकारों, खनन धारकों, पर्यावरणविदों, किसानों और स्थानीय समुदायों से व्यापक सुझाव लेना।

समिति को अपनी अंतिम व्यापक वैज्ञानिक रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 तक न्यायालय को सौंपनी है।

 

यह भी पढ़ें: अरावली पर्वतमाला में खनन प्रतिबंध

 

FAQs:

  1. Is the Supreme Court Constitutes High-Level Committee for Aravalli Definition Review?

A: हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा और सीमांकन की निष्पक्ष वैज्ञानिक समीक्षा के लिए जून 2026 में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई है।

  1. Why the Supreme Court Formed an Aravalli Review Committee?

A: पुरानी परिभाषा से लगभग 91% पहाड़ियां सुरक्षा दायरे से बाहर हो रही थीं, जिससे अरावली पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

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