एशियाई उत्पादकता संगठन

संदर्भ:
हाल ही में एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) के शासी निकाय (Governing Body) का 68वां सत्र भारत की अध्यक्षता में 20 से 22 मई 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया।
सत्र के मुख्य बिंदु:
- APO विजन 2030 फ्रेमवर्क: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक उत्पादकता-आधारित विकास और सहयोग की रणनीतियों की समीक्षा।
- वित्तीय योजना: द्विवार्षिक सत्र (2027-28) के लिए प्रारंभिक बजट प्रस्तावों पर विचार-विमर्श।
- संस्थागत सुधार: संगठन के महानिदेशक (Secretary-General) के चुनाव की प्रक्रियाओं की समीक्षा और प्रशासनिक सुधार।
- राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार: उत्पादकता को बढ़ावा देने वाले तकनीकी विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं को ‘APO राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित करना।
- पर्यवेक्षक देशों की भागीदारी: कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, भूटान और ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (GGGI) ने पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया।
एशियाई उत्पादकता संगठन क्या हैं?
एशियाई उत्पादकता संगठन (Asian Productivity Organization – APO) एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और सतत विकास को गति देने वाला एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन है।
- उत्पत्ति: इसकी पृष्ठभूमि वर्ष 1959 और 1960 में आयोजित ‘एशियाई गोलमेज उत्पादकता सम्मेलनों’ से तैयार हुई थी।
- औपचारिक स्थापना: संगठन की स्थापना 11 मई 1961 को मनीला अभिसमय (Convention) के तहत एक गैर-राजनीतिक, गैर-लाभकारी और गैर-भेदभावपूर्ण निकाय के रूप में की गई थी।
- मुख्यालय: इसका सचिवालय और मुख्यालय टोक्यो, जापान में स्थित है।
मिशन, विजन और मुख्य उद्देश्य:
- मिशन: पारस्परिक सहयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाकर एशिया और प्रशांत क्षेत्र के सतत सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना।
- विजन: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समावेशी और नवाचार-संचालित उत्पादकता वृद्धि हासिल करना।
- मुख्य लक्ष्य (Core Goals):
- निरंतर उत्पादकता विकास (Sustained Productivity Growth)।
- एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Robust Innovation Ecosystem) का निर्माण।
- समावेशी जुड़ाव और साझा समृद्धि (Shared Prosperity) सुनिश्चित करना।
संगठनात्मक संरचना:
- सदस्यता: वर्तमान में इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 21 सदस्य अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं (जैसे- भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ईरान आदि)।
- इसकी सदस्यता उन देशों के लिए उपलब्ध है जो संयुक्त राष्ट्र के ‘UN ESCAP’ के सदस्य हैं।
- शासी निकाय (Governing Body – GB): यह संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी बैठक प्रतिवर्ष होती है, जहां रणनीतिक दिशा, बजट और नीतियों का निर्धारण किया जाता है।
- राष्ट्रीय उत्पादकता संगठन (NPO): प्रत्येक सदस्य देश में एक नोडल एजेंसी होती है जो इसके कार्यक्रमों को लागू करती है।
मुख्य गतिविधियां:
APO मुख्य रूप से एक थिंक टैंक, उत्प्रेरक (Catalyst) और क्षेत्रीय सलाहकार के रूप में पांच प्रमुख स्तंभों पर कार्य करता है:
- नीतिगत परामर्श (Policy Advisory): यह सदस्य देशों की आर्थिक और विकास नीतियों की समीक्षा करता है तथा राष्ट्रीय उत्पादकता मास्टर प्लान तैयार करने में मदद करता है।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building): उद्योगों, कृषि, सेवा और सार्वजनिक क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और अध्ययन मिशन आयोजित करना।
- उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence): नवाचार, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक तकनीकों (जैसे- AI, Industry 4.0) को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट केंद्रों की स्थापना।
- हरित उत्पादकता (Green Productivity): आर्थिक गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए उत्पादकता बढ़ाने वाली तकनीकों (Green Productivity 2.0 फ्रेमवर्क) का प्रसार करना।
- लघु एवं मध्यम उद्योग (SME) विकास: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना।
भारत और एशियाई उत्पादकता संगठन:
- संस्थापक सदस्य: भारत वर्ष 1961 से ही APO का एक सक्रिय संस्थापक सदस्य रहा है।
- नोडल एजेंसी: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत स्वायत्त निकाय ‘राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद’ (National Productivity Council – NPC) भारत में इसकी गतिविधियों का संचालन करती है।
- अध्यक्षता (Chairmanship): भारत ने वर्ष 2025-26 के कार्यकाल के लिए संगठन की औपचारिक अध्यक्षता संभाली है। आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव, अमरदीप सिंह भाटिया (IAS), इसके वर्तमान अध्यक्ष हैं।
महत्व:
- क्षेत्रीय सहयोग: यह संगठन दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बीच आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने का एक मंच प्रदान करता है, जो भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के अनुकूल है।
- सतत विकास लक्ष्य (SDGs): हरित उत्पादकता (Green Productivity) पर इसका ध्यान SDG 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास) और SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) को प्राप्त करने में सहायक है।
- तकनीकी कूटनीति: डिजिटल परिवर्तन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से यह विकासशील सदस्य देशों के बीच आर्थिक असमानता को कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है।