बारासिंघा वन्यजीव अभयारण्य | Barasingha Wildlife Sanctuary

संदर्भ:
हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने उत्तर प्रदेश के बारासिंघा वन्यजीव अभयारण्य (Barasingha Wildlife Sanctuary) के चारों ओर 408.7 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को ‘इको-सेंसिटिव जोन’ (ESZ) घोषित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की।
बारासिंघा वन्यजीव अभयारण्य के बारे में:
- स्थापना: इसे सर्वप्रथम वर्ष 1986 में गंगा बेसिन की पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संरक्षण के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था।
- भौगोलिक विस्तार: यह उत्तर प्रदेश के ऊपरी गंगा क्षेत्र में स्थित है और पाँच जिलों—मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा और हापुड़ में फैला हुआ है।
- कुल क्षेत्रफल: मुख्य अभयारण्य का क्षेत्रफल लगभग 2,073 वर्ग किलोमीटर है, जो इसे राज्य के सबसे बड़े वन्यजीव अभयारण्यों में से एक बनाता है।
- नाम परिवर्तन: इस अभयारण्य को पहले हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य के रूप में जाना जाता था।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने 11 जून, 2023 को आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर ‘राज्य वन्यजीव बारासिंघा अभयारण्य’ कर दिया।
- महत्व: अभयारण्य के भीतर स्थित हैदरपुर वेटलैंड को दिसंबर 2021 में भारत के 47वें और उत्तर प्रदेश के 10वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता दी गई।
- यह एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि है, जो 1984 में मध्य गंगा बैराज के निर्माण के कारण बनी थी। यह बारासिंघा के मौसमी प्रवास के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में कार्य करता है।
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पारिस्थितिक तंत्र: अभयारण्य की वनस्पति मुख्य रूप से ऊँचे गीले घास के मैदानों (Tall Wet Grasslands), सूखे घास के मैदानों और झाड़ियों का मिश्रण है।
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यहाँ 80 से अधिक औषधीय पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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जैव विविधता:
- बारासिंघा (Swamp Deer): यह उत्तर प्रदेश का राजकीय पशु है। यहाँ बारासिंघा की उत्तरी उप-प्रजाति (Rucervus duvaucelii duvaucelii) पाई जाती है। IUCN रेड लिस्ट में इसे ‘Vulnerable’ (संवेदनशील) की श्रेणी में रखा गया है।
- जलीय जीव: गंगा नदी के प्रवाह के कारण यहाँ गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं की दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- अन्य वन्यजीव: यहाँ भारतीय तेंदुआ, सांभर, चीतल, हॉग डियर (Hog Deer), नीलगाय, ऊदबिलाव (Otter), और जंगली बिल्लियाँ निवास करती हैं।
- पक्षी: यहाँ पक्षियों की 370 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें राज्य पक्षी सारस क्रेन और विभिन्न प्रवासी पक्षी शामिल हैं।
संरक्षण प्रयास:
- हाल ही में घोषित 408.7 वर्ग किमी का ESZ अभयारण्य के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा (Buffer Zone) के रूप में कार्य करेगा।
- इसके अंतर्गत आने वाले 307 गाँवों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- यह क्षेत्र जैव विविधता को मानवीय हस्तक्षेप से बचाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।