प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन योजना | Technology Development and Investment Promotion Scheme

संदर्भ:
केंद्रीय संचार मंत्रालय ने हाल ही में प्रौद्योगिकी विकास और निवेश प्रोत्साहन (TDIP) योजना के संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए।
प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन (TDIP) योजना क्या है?
TDIP योजना दूरसंचार विभाग (DoT) का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे भारत की वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण प्रक्रियाओं में भागीदारी को मजबूत करने और स्वदेशी दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- मंत्रालय: संचार मंत्रालय (दूरसंचार विभाग)।
- कार्यान्वयन एजेंसियां: योजना का निष्पादन तीन प्रमुख निकायों के माध्यम से किया जाता है:
- TSDSI टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी, इंडिया।
- TCoE India टेलीकॉम सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, इंडिया।
- TCIL टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड।
प्रमुख उद्देश्य:
- वैश्विक नेतृत्व: ITU, 3GPP और oneM2M जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों में भारत के प्रतिनिधित्व और प्रभाव को बढ़ाना।
- नवाचार को बढ़ावा: 5G एडवांस्ड और 6G जैसी अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों के स्वदेशी विकास को प्रोत्साहित करना।
- स्वदेशी विनिर्माण: घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना।
- IPR निर्माण: भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट) के निर्माण को बढ़ावा देना।
योजना के मुख्य घटक:
- मानकीकरण सहायता: अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भाग लेने, तकनीकी पत्र प्रस्तुत करने और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए वित्तीय सहायता।
- पायलट प्रोजेक्ट्स: अनुसंधान और वाणिज्यिक तैनाती के बीच की दूरी को कम करने के लिए ‘प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट’ (PoC) और पायलट परियोजनाओं का समर्थन।
- आयोजन और क्षमता निर्माण: भारत में अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए फंडिंग।
प्रमुख विशेषताएं:
- बजटीय आवंटन: 2026 से 2031 की अवधि के लिए ₹203 करोड़ का कुल परिव्यय।
- व्यापक दायरा: अब इस योजना में स्टार्टअप्स, MSMEs, शिक्षाविदों (Academia), अनुसंधान संस्थानों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) को भी शामिल किया गया है।
- तकनीकी फोकस: विशेष रूप से 5G एडवांस्ड और 6G प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना।
- नीतिगत तालमेल: यह योजना भारत 6G मिशन और टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) की पूरक है।
महत्व:
- रणनीतिक स्वायत्तता: अपनी तकनीक विकसित करने से विदेशी मानकों और उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।
- निर्यात क्षमता: भारतीय तकनीकों को वैश्विक मानकों का हिस्सा बनाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- आर्थिक विकास: स्टार्टअप और MSMEs की भागीदारी से रोजगार के अवसर और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।