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भारत औद्योगिक विकास योजना (Bharat Audyogik Vikas Yojna) | UPSC

Bharat Audyogik Vikas Yojna

Bharat Audyogik Vikas Yojna

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में विनिर्माण और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को मंजूरी दी। यह योजना ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

BHAVYA योजना क्या हैं? 

  • परिचय: भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) एक केंद्रीय पहल है, जिसके तहत निवेश के माध्यम से ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे ताकि भारत के विनिर्माण और व्यापार सुगमता को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिल सके।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: यह योजना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) द्वारा संचालित की जाएगी।
  • कुल परिव्यय: इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
  • अवधि: यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर छह वर्षों के लिए लागू की जाएगी।

योजना का उद्देश्य:

  • विनिर्माण क्षमता को अनलॉक करना: भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाना।
  • रोजगार सृजन: इस योजना से लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है।
  • आयात पर निर्भरता कम करना: बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था की रक्षा करना।
  • निवेश आकर्षित करना: देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और घरेलू निवेश को बढ़ावा देना।
  • पार्क का विकास: पूरे भारत में 100 प्लग-एंड-प्ले (Plug-and-Play) औद्योगिक पार्कों का विकास करना।

बुनियादी ढांचे का वर्गीकरण:

  • कोर इंफ्रास्ट्रक्चर: आंतरिक सड़कें, भूमिगत उपयोगिता गलियारे (No-dig environment), जल निकासी और सामान्य उपचार सुविधाएं।
  • मूल्य वर्धित इंफ्रास्ट्रक्चर: तैयार कारखाने (Ready-built sheds), परीक्षण प्रयोगशालाएं और वेयरहाउसिंग।
  • सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर: श्रमिकों के लिए आवास और अन्य आवश्यक जन सुविधाएं।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • प्लग-एंड-प्ले मॉडल: निवेशकों को पूर्व-अनुमोदित भूमि, तैयार बुनियादी ढांचा और एकीकृत सेवाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे कंपनियां जमीन मिलने के तुरंत बाद परिचालन शुरू कर सकेंगी।
  • वित्तीय सहायता: केंद्र सरकार प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, बाहरी बुनियादी ढांचे (कनेक्टिविटी) के लिए परियोजना लागत का 25% तक सहयोग दिया जाएगा।
  • चुनौती मोड (Challenge Mode) चयन: पार्कों का चयन राज्यों के बीच एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें निवेश की तैयारी और सुधार-उन्मुख प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आकार की सीमा: औद्योगिक पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए न्यूनतम सीमा 25 एकड़ रखी गई है।
  • पीएम गतिशक्ति का एकीकरण: ये पार्क मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और कुशल रसद (Logistics) सुनिश्चित करने के लिए पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों पर आधारित होंगे। 

महत्व:

  • Ease of Doing Business: सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और नियामक बाधाओं को कम करके निवेशकों के लिए प्रवेश बाधाओं को समाप्त करने में यह योजना मददगार होगी।
  • आत्मानिर्भर भारत: घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में सक्षम है। 
  • क्षेत्रीय विकास: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।
  • सतत विकास: ग्रीन एनर्जी और संसाधन दक्षता पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘फ्यूचर-रेडी’ और टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने में मदद मिलेगी।

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