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ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2026

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2026

BRICS Foreign Ministers Meeting 2026

संदर्भ:

हाल ही में भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक (BRICS Foreign Ministers’ Meeting) संपन्न हुई। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2026 के मुख्य बिंदु:

  • आयोजनकर्ता: 14-15 मई 2026 को भारत की मेजबानी में नई दिल्ली के भारत मंडपम में (BRICS Foreign Ministers’ Meeting) आयोजित की गई।
  • प्रतिभागी: इसमें ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों और राजनयिकों ने भाग लिया।
    • हाल ही में शामिल हुए नए सदस्य देशों (जैसे मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया) तथा भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी हिस्सा लिया 
  • मुख्य विषय: भारत की अध्यक्षता में इस बैठक का आधिकारिक विषय “BRICS@20: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण) था. 
  • मुख्य चर्चाए: बैठक के दौरान दो दिनों में विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई:
  • वैश्विक शासन और बहुपक्षीय सुधार: दूसरे सत्र में संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IMF) जैसी प्रणालियों में लोकतांत्रिक सुधारों की आवश्यकता पर कड़ा बल दिया गया।
  • पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा: ईरान संघर्ष और लाल सागर नौवहन संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) के विखंडन और तेल की बढ़ती कीमतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
  • फ़िलिस्तीन मुद्दे पर दो-राज्य समाधान: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए भारत के पारंपरिक रुख को दोहराते हुए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (इजरायल और फिलिस्तीन का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व) का पुरजोर समर्थन किया।
  • ग्लोबल साउथ की आवाज: प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया कि ब्रिक्स बहुध्रुवीय व्यवस्था में विकासशील देशों की आकांक्षाओं को मंच देने का सशक्त जरिया बन चुका है।
  • आर्थिक सहयोग और फिनटेक: देशों के बीच आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में सीमा पार व्यापार और भारत के यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के प्रसार पर चर्चा हुई।
  • आतंकवाद का मुकाबला: शांति और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी दोहरे मापदंड के सीमा पार आतंकवाद और उसके वित्तपोषण को रोकने की प्रतिबद्धता जताई गई।

ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया) का एक शक्तिशाली अंतर्राष्ट्रीय समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना, बहुपक्षवाद को मजबूत करना और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों की रक्षा करना है।

  • गठन और नामकरण: ‘BRIC’ शब्द पहली बार 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’निल द्वारा गढ़ा गया था। वर्ष 2006 में इसे एक औपचारिक समूह के रूप में स्थापित किया गया।
  • सदस्य विस्तार: 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से यह ‘BRICS’ बना। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई (UAE) शामिल हुए। इसके बाद इंडोनेशिया भी इसका पूर्ण सदस्य बन गया है। 
  • आर्थिक ताकत: ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जहाँ क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर इनका सामूहिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) दुनिया के कई विकसित समूहों से भी अधिक है।
    • यह समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP PPP) का लगभग 37% से अधिक और दुनिया की 45% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): ब्रिक्स देशों ने मिलकर ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) की स्थापना की है, जो सदस्य देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण प्रदान करता है। 

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