Development of next generation polymer materials
संदर्भ:
हाल ही में भारत के वैज्ञानिकों ने अगली पीढ़ी की बहुलक सामग्री (Next-Generation Polymeric Materials) विकसित की है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो आने वाले समय में बैटरी और सुपरकैपेसिटर की क्षमता बढ़ाने के साथ ही हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
खोज संबंधी विवरण:
- समन्वय बहुलक का संश्लेषण : सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने जिंक (Zn) और कैडमियम (Cd) आयनों के साथ ‘3,3’-डाईअमीनोबेंज़िडाइन’ (DAB) जैसे कार्बनिक अणुओं का उपयोग करके नए समन्वय बहुलक (Coordination Polymers) संश्लेषित किए हैं।
- निर्माण प्रक्रिया: इन्हें कमरे के तापमान पर एक सरल प्रक्रिया के माध्यम से बनाया गया है, जो औद्योगिक स्तर पर उत्पादन को सस्ता और सुलभ बनाता है।
- ऊर्जा भंडारण क्षमता: प्रयोगशाला परीक्षणों में, Zn(DAB) ने 2091.4 F/g और Cd(DAB) ने 1341.6 F/g की असाधारण धारिता (Capacitance) प्रदर्शित की है।
- स्थायित्व: इन सामग्रियों ने 5,000 निरंतर चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों के बाद भी अपनी क्षमता को बरकरार रखा, जो इनकी उच्च स्थिरता को दर्शाता है।
विशेषताएं:
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन: ये सामग्री इलेक्ट्रोकैटलिटिक रूप से जल को विभाजित (Water Splitting) कर स्वच्छ हाइड्रोजन बनाने में सक्षम हैं। इसके लिए इन्हें बहुत कम ‘ओवरपोटेंशियल’ (Zn: 263 mV, Cd: 209 mV) की आवश्यकता होती है।
- स्व-उपचार (Self-healing): कुछ उन्नत पॉलिमर नैनोकंपोजिट्स में सूक्ष्म दरारों को खुद ठीक करने की क्षमता है, जिससे उपकरणों का जीवनकाल बढ़ जाता है।
- लचीलापन: पारंपरिक धातु या सिरेमिक सामग्री के विपरीत, ये बहुलक लचीले (Flexible) होते हैं, जो इन्हें ‘वेयरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ (Wearable Electronics) के लिए आदर्श बनाते हैं।
अनुप्रयोग:
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उपकरण |
बहुलक की भूमिका |
प्रमुख लाभ |
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बैटरी (Li-ion/Na-ion) |
ठोस बहुलक इलेक्ट्रोलाइट (SPE) और बाइंडर्स |
तरल इलेक्ट्रोलाइट्स के विपरीत आग लगने का खतरा कम; हल्का वजन। |
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सुपरकैपेसिटर |
इलेक्ट्रोड सामग्री (जैसे PANI, Ppy) |
तीव्र चार्जिंग और विसर्जन (Discharging); उच्च शक्ति घनत्व। |
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फ्यूल सेल (PEMFC) |
बहुलक इलेक्ट्रोलाइट झिल्ली |
शून्य उत्सर्जन; केवल उप-उत्पाद के रूप में जल का उत्सर्जन। |
महत्व:
- राष्ट्रीय मिशन: यह खोज भारत के ‘राष्ट्रीय उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण कार्यक्रम’ (NPACC) और ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ के लक्ष्यों के अनुरूप है।
- ऊर्जा सुरक्षा: वर्तमान में भारत अपनी 85% कच्चे तेल की जरूरतों और बैटरी घटकों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसी स्वदेशी तकनीक ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ की दिशा में मील का पत्थर है।
- पर्यावरण अनुकूल: ये बहुलक सीसा-मुक्त (Lead-free) और पर्यावरण के अनुकूल हैं, जो ‘नेट-जीरो 2070’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे।
