Public Trust Provisions Amendment Bill 2026
संदर्भ:
हाल ही में सरकार ने जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया। यह विधेयक वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा पेश किया गया, जो भारत में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 के मुख्य बिंदु:
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व्यापक विधायी दायरा: इस विधेयक का लक्ष्य 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों के कुल 784 प्रावधानों में संशोधन करना है। यह 2023 के अधिनियम (जिसमें 42 कानून शामिल थे) की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत है। इसमें पर्यावरण, कृषि, वाणिज्य, और सड़क परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
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अपराधों का गैर-अपराधीकरण (Decriminalization): विधेयक के माध्यम से छोटे और तकनीकी उल्लंघनों के लिए कारावास की सजा को समाप्त करना प्रस्तावित है। इसमें कुल 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव है। मामूली चूकों (जैसे रिकॉर्ड रखने में देरी या तकनीकी त्रुटि) के लिए जेल के बजाय अब केवल वित्तीय दंड लगेगा।
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जुर्माना’ बनाम ‘शास्ति’: विधेयक ‘जुर्माने’ (Fine) को ‘शास्ति’ (Penalty) में परिवर्तित करता है। जुर्माना जो न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से न्यायालय द्वारा लगाया जाता है। इसे अब अधिनिर्णय अधिकारियों (Adjudicating Officers) द्वारा प्रशासनिक स्तर पर लगाया जाएगा।
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श्रेणीबद्ध प्रवर्तन तंत्र: प्रवर्तन को अधिक मानवीय बनाने के लिए विधेयक में सजा का स्तर निर्धारित किया गया है: पहली बार उल्लंघन करने पर कड़ी सजा के बजाय चेतावनी या ‘सुधार नोटिस’ देने का प्रावधान है। यदि उल्लंघन दोहराया जाता है, तो वित्तीय दंड को आनुपातिक रूप से बढ़ाया जाएगा।
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विधेयक में एक विशिष्ट प्रावधान है कि निर्धारित शास्ति और जुर्माने की न्यूनतम राशि में प्रत्येक तीन वर्ष में 10% की स्वतः वृद्धि की जाएगी। इसका उद्देश्य दंड की प्रभावशीलता को मुद्रास्फीति (Inflation) के साथ बनाए रखना है।
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विशिष्ट कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव:
- सार्वजनिक परिसर अधिनियम, 1971: सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए नियमों को सख्त किया गया है, जिसमें बाजार दर से 40 गुना तक लाइसेंस शुल्क वसूलने का प्रावधान है।
- पर्यावरण संरक्षण: नियमों के उल्लंघन पर भारी वित्तीय दंड का प्रावधान किया गया है, लेकिन मामूली तकनीकी चूकों को जेल की श्रेणी से बाहर रखा गया है।
- परिवहन: मोटर वाहन अधिनियम के तहत कुछ स्वास्थ्य संबंधी अयोग्यताओं के साथ वाहन चलाने को अब नागरिक दंड (Civil Penalty) के दायरे में लाया गया है।
