Dirghavadhi Krishak Punji Sahakar Yojana

संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में लगी सहकारी समितियों के लिए दीर्घकालिक ऋण उपलब्धता को मजबूत करने हेतु ‘दीर्घावधि कृषक पुंजी सहकार योजना’ शुरू की।
दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना (Dirghavadhi Krishak Punji Sahakar Yojana):
यह भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की एक नई और महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी समितियों के माध्यम से दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
उद्देश्य:
- ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना: सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के लिए बिना किसी रुकावट के दीर्घकालिक ऋण सुनिश्चित करना।
- पूंजी निर्माण: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजी निवेश को बढ़ावा देना।
- विविधीकरण: किसानों को गैर-कृषि उद्यमों में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
- संस्थागत मजबूती: सहकारी समितियों की वित्तीय और परिचालन क्षमता में सुधार कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
कार्यान्वयन एजेंसियां:
- मुख्य एजेंसी: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), जो सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक संगठन है।
- निगरानी ढांचा: NCDC अपने मुख्यालय, 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और 9 उप-कार्यालयों के माध्यम से इस योजना के कार्यान्वयन की सक्रिय निगरानी करता है।
मुख्य विशेषताएं:
- पात्रता शर्तें:
- सहकारी समिति कम से कम 3 वर्षों से कार्यरत होनी चाहिए।
- समिति की नेट-वर्थ सकारात्मक होनी चाहिए और शेयर पूंजी में कोई क्षरण नहीं होना चाहिए।
- पिछले 3 वर्षों में कोई नकद हानि नहीं होनी चाहिए और कम से कम 2 वर्षों में शुद्ध लाभ दर्ज होना चाहिए।
- मूल्यांकन प्रक्रिया: परियोजनाओं का चयन IRR (Internal Rate of Return), NPV (Net Present Value), और DSCR (Debt Service Coverage Ratio) जैसे कठोर वित्तीय मानकों के आधार पर किया जाता है।
- वसूली तंत्र: चूक (Default) की स्थिति में SARFAESI अधिनियम, 2002 की धारा 13(4) और ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के माध्यम से सख्त कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।
महत्व:
यह योजना ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और अन्य सहकारी बैंकों के संसाधनों को पूरक बनाती है, जिससे किसानों को आधुनिक खेती और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों के लिए आसान किस्तों पर बड़ी पूंजी मिल पाना आसान हो सकता है।