India-Indonesia Prambanan Temple Restoration Agreement

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर (Prambanan Temple Complex) के जीर्णोद्धार के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। यह सहयोग मार्च 2026 में इंडोनेशियाई संस्कृति मंत्रालय और ASI के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद औपचारिक रूप दिया गया।
भारत-इंडोनेशिया प्रम्बानन जीर्णोद्धार परियोजना:
- ASI की भूमिका: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए परिसर के भीतर कई छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार में तेजी लाएगा।
- एनास्टिलोसिस तकनीक: जीर्णोद्धार कार्य में मुख्य रूप से एनास्टिलोसिस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें मूल पत्थरों को उनके मूल स्थान पर फिर से जोड़कर संरचना को पुनर्निर्मित किया जाता है।
- पायलट प्रोजेक्ट: कार्य की शुरुआत एक या दो पेरवारा (Perwara) मंदिरों (सहायक मंदिरों) के पायलट प्रोजेक्ट से होगी, जिसकी सफलता के आधार पर शेष 240 मंदिरों के जीर्णोद्धार का विस्तार किया जाएगा।
- आधुनिक तकनीक: पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल टूल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक संरक्षण विधियों का भी उपयोग किया जाएगा ताकि भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- सहयोग का दायरा: इंडोनेशियाई संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर ASI ‘सेवू’ (Sewu) और ‘प्लाओसान’ (Plaosan) जैसे आसपास के सांस्कृतिक परिदृश्य का भी संरक्षण करेगा।
प्रम्बानन मंदिर के बारे मे:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इसका निर्माण 9वीं शताब्दी (लगभग 850 ईस्वी) में संजय राजवंश (Sanjaya Dynasty) के राजा राकई पिकाटन (Rakai Pikatan) द्वारा शुरू किया गया था।
- धार्मिक महत्व: यह मंदिर त्रिमूर्ति (Trimurti)—ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (संरक्षक) और शिव (संहारक)—को समर्पित है। मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसे ‘शिवगृह’ (Shivagrha) भी कहा जाता है।
- वास्तुकला शैली:
- यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और दक्षिण-पूर्व एशिया में अंगकोर वाट के बाद दूसरा सबसे बड़ा।
- इसकी वास्तुकला लंबी और नुकीली (Tall and Pointed) है, जो पारंपरिक हिंदू मंदिर डिजाइन का प्रतिनिधित्व करती है।
- परिसर के मध्य भाग में 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर है, जिसके चारों ओर ब्रह्मा और विष्णु के मंदिर स्थित हैं।
- रामायण नक्काशी: मंदिर की दीवारों पर रामायण और कृष्णायन के दृश्यों को आधार-राहत (bas-reliefs) के माध्यम से खूबसूरती से उकेरा गया है।
- UNESCO मान्यता: इस परिसर को 1991 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।
महत्व:
यह साझेदारी भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सभ्यतागत संबंधों (Civilizational Ties) को मजबूत करती है। भारत इससे पहले इंडोनेशिया के बोरोबुदुर मंदिर के संरक्षण में भी योगदान दे चुका है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत द्वारा मंदिरों का जीर्णोद्धार (जैसे कंबोडिया में अंगकोर वाट और वियतनाम में चाम मंदिर) उसकी “सॉफ्ट पावर” कूटनीति, ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का हिस्सा है।