Elephanta Island का समुद्री इतिहास, अध्ययन हेतु संयुक्त शोध परियोजना शुरू

संदर्भ:
हाल ही में आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur), मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एलिफेंटा द्वीप (Elephanta Island) के प्राचीन समुद्री इतिहास और वैश्विक व्यापार संपर्कों के अध्ययन के लिए संयुक्त शोध परियोजना (Joint Research Project) शुरू की.
एलिफेंटा द्वीप के बारे में:
- स्थिति: एलिफेंटा द्वीप, जिसे स्थानीय रूप से घरापुरी (गुफाओं का शहर) के नाम से जाना जाता है, ओमान सागर (अरब सागर) में मुंबई हार्बर (Mumbai Harbour) के भीतर स्थित एक विश्व प्रसिद्ध द्वीप है. यह गेटवे ऑफ इंडिया (मुंबई) से लगभग 11 किलोमीटर पूर्व में स्थित है.
- इतिहास:
- प्राचीन काल: प्राचीन काल में यह द्वीप कोंकण मौर्यों और बाद में अन्य राजवंशों के अधीन एक समृद्ध प्रशासनिक और धार्मिक केंद्र था.
- पुर्तगाली खोज (16वीं शताब्दी): इस द्वीप को ‘एलिफेंटा’ नाम 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली खोजकर्ताओं द्वारा दिया गया था. जब वे इस द्वीप के तट पर उतरे, तो उन्हें काले बेसॉल्ट पत्थर से निर्मित एक विशालकाय हाथी की मूर्ति (Monolithic Basalt Elephant) मिली. इसी मूर्ति के आधार पर उन्होंने इसका नाम ‘एलिफेंटा’ रख दिया.
- ब्रिटिश काल: पुर्तगालियों के शासन के दौरान देखरेख के अभाव में गुफाओं को भारी नुकसान पहुँचाया गया. बाद में ब्रिटिश काल (19वीं शताब्दी) में इसका पुरातात्विक प्रलेखन शुरू हुआ. वर्ष 1864 से 1914 के बीच, उस मूल पत्थर के हाथी को सुरक्षा के दृष्टिकोण से मुंबई के ‘वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान’ (विक्टोरिया गार्डन्स) में स्थानांतरित कर दिया गया.
- विशेषताएं:
- क्षेत्रफल: इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल लगभग 16 वर्ग किलोमीटर है.
- भूभाग: यह द्वीप मुख्यतः दो पहाड़ियों (पूर्वी और पश्चिमी पहाड़ी) से मिलकर बना है, जो एक संकीर्ण और उथली घाटी द्वारा आपस में अलग होती हैं. इसकी मुख्य शिव गुफाएं पश्चिमी पहाड़ी पर स्थित हैं.
- भूवैज्ञानिक संरचना: यह संपूर्ण द्वीप ज्वालामुखीय चट्टानों (Volcanic Rocks) से निर्मित है, जो दक्कन ट्रैप (Deccan Traps) के अंतिम क्रेटेशियस या प्रारंभिक पेलियोसीन काल (लगभग 6.5 से 6.6 करोड़ वर्ष पूर्व) के लावा प्रवाह से बनी थीं.
- एलिफेंटा गुफाएं (Elephanta Caves): यह द्वीप मुख्य रूप से अपनी भव्य रॉक-कट गुफाओं (Rock-cut Caves) के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें वर्ष 1987 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था.
- शिल्पकला: यहाँ की मुख्य गुफा (गुफा संख्या 1) भगवान शिव को समर्पित है. इसमें शिव के विभिन्न रूपों जैसे त्रिमूर्ति (Trimurti – ब्रह्मा, विष्णु, महेश के रूप में शिव), अर्धनारीश्वर और गंगाधर की विशाल मूर्तियां भारतीय मूर्तिकला का चरमोत्कर्ष हैं.
- इसका निर्माण मुख्य रूप से 5वीं से 6ठी शताब्दी ईस्वी के दौरान महिष्मती के कलचुरी राजवंश (Kalachuri Dynasty) के राजा कृष्णराज के संरक्षण में हुआ माना जाता है.
एलिफेंटा द्वीप का समुद्री इतिहास और खोज:
- प्राचीन बंदरगाह क्षेत्र (Ancient Port Localities): यह द्वीप पहली सहस्राब्दी में एक बड़ा समुद्री केंद्र (Maritime Hub) था, जहाँ से रोम (भूमध्यसागरीय क्षेत्र) और मेसोपोटामिया के साथ सीधा व्यापार होता था.
- ऐतिहासिक भूगोल के अनुसार, इस द्वीप पर संगठित समुद्री गतिविधियों के लिए तीन प्रमुख बंदरगाह बस्तियां (Port Localities) सक्रिय थीं: मोराबंदर (Morabandar), राजबंदर (Rajbandar) और शेटबंदर (Shethbandar)।
- उत्खनन और प्राप्त सामग्रियां: हाल ही में एएसआई (ASI) के डॉ. अभिजीत अंबेडकर के नेतृत्व में की गई खुदाई से कई साक्ष्य मिले हैं:
- 1500 साल पुराना जलाशय: पुरातत्वविदों को मोराबंदर में 165 वर्ग मीटर क्षेत्र और 8 मीटर गहरा एक विशाल आयताकार प्राचीन जलाशय मिला है जो टी-आकार (T-shaped stepped tank) की सीढ़ियों से जुड़ा है. चट्टानी बेसॉल्टिक भूभाग होने के कारण यहाँ वर्षा जल संचयन (Water Management) की यह अद्भुत प्राचीन इंजीनियरिंग तकनीक थी.
- वैश्विक समुद्री व्यापार (Global Maritime Trade): खुदाई में भूमध्यसागरीय मूल के लगभग 3,000 एंफोरे मृद्भांडों के टुकड़े (Indo-Mediterranean Amphorae) और मेसोपोटामिया/फारस की खाड़ी मूल के टारपीडो जार (Torpedo Jars) मिले हैं. इनका उपयोग प्राचीन काल में रोम और पश्चिम एशिया से शराब, तेल और मछली के सॉस के परिवहन के लिए किया जाता था.
- औद्योगिक साक्ष्य: यहाँ सूती वस्त्रों की रंगाई के लिए ईंटों से बना एक कुंड (Dyeing Vat) मिला है, जो निर्यात के लिए कपड़ों के उत्पादन को दर्शाता है.
- सिक्के (Numismatic Evidence): कलचुरी राजवंश के शासक कृष्णराज के काल के तांबे और सीसे के सिक्के मिले हैं, जिन पर बैठे हुए बैल (Seated Bull) की आकृति बनी है. इसके अतिरिक्त, चालुक्य और त्रैकूटक राजवंश के शिलालेखों से संकेत मिलता है कि पुलकेसिन द्वितीय के ऐहोल शिलालेख में वर्णित प्रसिद्ध रणनीतिक तटीय गढ़ ‘पुरी’ संभवतः यही घरापुरी (एलिफेंटा) द्वीप था.
- संयुक्त शोध परियोजना 2026: इस समृद्ध विरासत को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने के लिए ₹1 करोड़ के बजट के साथ बहुविषयक शोध परियोजना (Interdisciplinary Research Project) की शुरुआत की गई है, जिसे मुंबई पोर्ट अथॉरिटी द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है.
- यह परियोजना यह जांच करेगी कि पिछले 1,500 से 1,000 वर्षों (प्रारंभिक ऐतिहासिक से मध्यकाल) के दौरान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और समुद्र के जलस्तर में उतार-चढ़ाव ने भारत के पश्चिमी तट पर समुद्री व्यापार (Maritime Trade) और मानव बस्तियों के उदय और पतन को कैसे प्रभावित किया.
- इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) का अनुमान है कि वर्ष 2100 तक भारत के पश्चिमी तट पर समुद्र का जलस्तर 1 मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे मुंबई के निचले इलाके और एलिफेंटा की गुफाएं डूबने के कगार पर आ सकती हैं. यह शोध यह समझने में मदद करेगा कि प्राचीन समाज ने समुद्र के बढ़ते स्तर के प्रति कैसे अनुकूलन (Adaptation) किया था.
- आईआईटी खड़गपुर की मुख्य अन्वेषक (Investigator) प्रो. मेलिंडा बेरा और प्रो. वी. रविकांत के नेतृत्व में निम्नलिखित एडवांस्ड तकनीकों का उपयोग किया जाएगा:
- कोर ड्रिलिंग और तलछट अध्ययन (Core Drilling & Sediments): एलिफेंटा द्वीप और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में गहरे कोर ड्रिल करके पृथ्वी की परतों और तलछटों का अध्ययन किया जाएगा.
- आइसोटोप विश्लेषण (Isotope Analysis): प्राचीन मौसम का सटीक पता लगाने के लिए ऑक्सीजन, कार्बन और नाइट्रोजन आइसोटोप का विश्लेषण किया जाएगा. साथ ही, मिट्टी के बर्तनों के भौगोलिक स्रोत (Geographical Sources of Clay) को जानने के लिए स्ट्रॉन्टियम (Strontium) और नियोडिमियम आइसोटोप परीक्षण किया जाएगा.
- रेडियोकार्बन डेटिंग (Radiocarbon Dating): कार्बनिक अवशेषों और प्राचीन बंदरगाह संरचनाओं (Submerged Wharf Structures) की सटीक समयावधि का निर्धारण करने के लिए.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q. एलिफेंटा द्वीप कहां स्थित है?
उत्तर: एलिफेंटा द्वीप (घरापुरी) भारत के महाराष्ट्र राज्य में, मुंबई हार्बर (अरब सागर) के भीतर गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 11 किमी की दूरी पर स्थित है.
Q. एलिफेंटा द्वीप का समुद्री इतिहास क्या है?
उत्तर: यह द्वीप पहली सहस्राब्दी में एक बड़ा समुद्री केंद्र (Maritime Hub) था, जहाँ से मोराबंदर जैसे पत्तनों के माध्यम से रोम (भूमध्यसागरीय क्षेत्र) और मेसोपोटामिया के साथ सीधा व्यापार होता था.
Q. एलिफेंटा द्वीप के अध्ययन के लिए संयुक्त शोध परियोजना क्यों शुरू की गई?
उत्तर: प्राचीन काल में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के जलस्तर में बदलाव का व्यापारिक बस्तियों पर क्या असर पड़ा, इसका वैज्ञानिक अध्ययन करने और भविष्य के तटीय खतरों से निपटने के लिए यह परियोजना शुरू की गई है.
Q. एलिफेंटा गुफाएं क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: ये गुफाएं 5वीं-6ठी शताब्दी ईस्वी के बेजोड़ रॉक-कट वास्तुकला और भगवान शिव की त्रिमूर्ति जैसी मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं.
Q. एलिफेंटा द्वीप का मुंबई के इतिहास में क्या महत्व है?
उत्तर: पुरातात्विक साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि जब आधुनिक मुंबई मात्र सात अलग-अलग द्वीपों का समूह थी, तब एलिफेंटा इस क्षेत्र का पहला बड़ा राजनीतिक, प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र (First Millennium ‘Mumbai’) था.