पश्चिमी घाट संरक्षण के लिए ESE योजना
संदर्भ:
हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पश्चिमी घाट (Western Ghats) के संरक्षण के लिए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र योजना (Ecologically Sensitive Area – ESA Scheme) के कार्यान्वयन को अंतिम रूप (Final Stage) दिया जा रहा है।
- जून 2026 की नवीनतम The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार एक दशक से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करते हुए चरणबद्ध तरीके से तीन राज्यों में इसे तुरंत लागू करने की तैयारी में है।
ESE (Ecologically Sensitive Area) योजना क्या है?
- परिचय: इस व्यापक पर्यावरण नीति (Conservation Policy) के तहत 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया जा रहा है।
- यह कदम जलवायु संरक्षण (Climate Protection) और जैव विविधता के संरक्षण (Western Ghats Biodiversity) के लिए उठाया गया कदम है।
- उद्देश्य: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) योजना का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट की संवेदनशील पारिस्थितिकी को मानव-जनित विनाशकारी गतिविधियों से बचाना है।
- कानूनी आधार (Legal Framework): इस योजना को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया जा रहा है, जिससे केंद्र सरकार को इन क्षेत्रों में प्रदूषणकारी गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की कानूनी शक्ति मिलती है।
- छह राज्यों का विस्तार: यह योजना भारत के पश्चिमी तट के छह राज्यों—गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में फैले 1,500 किलोमीटर लंबे पहाड़ी क्षेत्र को कवर करती है।
- के. कस्तूरीरंगन समिति का आधार: वर्तमान मसौदा वर्ष 2013 में इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है।
- कस्तूरीरंगन समिति ने कुल पश्चिमी घाट के 37% हिस्से को ईएसए घोषित करने का सुझाव दिया था।
- सांस्कृतिक बनाम प्राकृतिक परिदृश्य: योजना के तहत पूरे परिदृश्य को दो भागों में बांटा गया है—सांस्कृतिक परिदृश्य (Cultural Landscape) (जहां कृषि और बस्तियां हैं) और प्राकृतिक परिदृश्य (Natural Landscape) (उच्च जैव विविधता वाले घने जंगल)। प्रतिबंध केवल प्राकृतिक परिदृश्य पर लागू होंगे।
पश्चिमी घाट (Western Ghats) के बारे में:
- परिचय: पश्चिमी घाट (सह्याद्री) भारत की पश्चिमी तटरेखा के समानांतर फैली एक सतत पर्वत श्रृंखला है।
- यह हिमालय से भी प्राचीन है, जो गोंडवाना के टूटने के समय बनी थी। यह पारिस्थितिक, भौगोलिक और जलवायु संबंधी दृष्टिकोण से देश के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है।
- विस्तार: यह गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु राज्यों में लगभग 1,600 किमी तक फैली है।
- स्थानीय नाम: इसे उत्तरी महाराष्ट्र में ‘सह्याद्री’ और केरल में ‘सह्या पर्वतम’ कहा जाता है।
- प्रमुख दर्रे: इसे मुख्य रूप से थाल घाट, भोर घाट, और पालघाट (पलक्कड़ गैप) विभाजित करते हैं।
- सबसे ऊँची चोटी: अनामुडी (Anamudi – 2,695 मीटर) इसकी और संपूर्ण दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
- विश्व धरोहर: यूनेस्को द्वारा इसे 2012 में ‘विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल’ का दर्जा दिया गया है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: यह दुनिया के 8 ‘हॉटस्पॉट’ में से एक है। यहाँ भारत की 30% से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।
- स्थानिकता (Endemism): यहाँ हज़ारों की संख्या में ऐसे पौधे और जीव मिलते हैं, जो दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते (जैसे- लायन-टेल्ड मकाक)।
- जलवायु नियंत्रक: यह दक्षिण-पश्चिम मानसून की नमी वाली हवाओं को रोककर भारी पर्वतीय वर्षा कराता है।
- जल विभाजक: यह प्रायद्वीपीय भारत की मुख्य जल विभाजक रेखा है, जहाँ से गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ निकलती हैं।
- पारिस्थितिकी तंत्र: इसमें अद्वितीय शोला वन (Shola forests) और घास के मैदान शामिल हैं।
- कार्बन सिंक: यह क्षेत्र प्रतिवर्ष भारी मात्रा में (लगभग 40 लाख टन) कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर जलवायु परिवर्तन से लड़ता है।
- पर्यावरण संरक्षण समितियां: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) के निर्धारण के लिए गाडगिल (2011) और कस्तूरीरंगन (2013) समितियां गठित की गईं।
पश्चिमी घाट ESE मसौदे के मुख्य बिंदु:
नवीनतम नीतिगत बदलावों (Western Ghats Policy Update) और मसौदे के तहत निम्नलिखित कड़े नियम तय किए गए हैं:
- विनाशकारी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban): संपूर्ण अधिसूचित 56,825.7 वर्ग किमी के दायरे में खनन (Mining), पत्थर उत्खनन (Quarrying) और रेत खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
- प्रदूषणकारी उद्योगों पर रोक: पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक ‘रेड कैटेगरी’ (Red Category) के नए उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
- बुनियादी ढांचा विनियमन: बड़े पैमाने पर होने वाले टाउनशिप निर्माण, वाणिज्यिक रियल एस्टेट परियोजनाओं और जलविद्युत परियोजनाओं को कड़े पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के बिना मंजूरी नहीं दी जाएगी।
- चरणबद्ध अधिसूचना (Phased Notification): जून 2026 के नए प्रावधान के तहत, सभी छह राज्यों की एक साथ सहमति का इंतजार करने के बजाय, जिन राज्यों में सहमति बन गई है (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा), वहां इसे पहले चरण में लागू किया जाएगा।
- केरल और कर्नाटक का विरोध: केरल अपने ईएसए क्षेत्र से आवासीय और कृषि क्षेत्रों को बाहर रखने की मांग कर रहा है, जबकि कर्नाटक आर्थिक विकास की दुहाई देते हुए इस सीमांकन का व्यापक विरोध कर रहा है।
FAQs:
Q 1. ESE (ESA) योजना क्या है?
उत्तर: यह पश्चिमी घाट के वनों और वन्यजीवों को मानवीय विनाश से बचाने के लिए केंद्र सरकार की एक विशेष पर्यावरण संरक्षण योजना है।
Q 2. पश्चिमी घाट को संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: खनन, अनियंत्रित पर्यटन और वनों की कटाई के कारण यहाँ बार-बार भूस्खलन और पर्यावरण का भारी क्षरण हो रहा है।
Q 3. Ecologically Sensitive Area का क्या अर्थ है?
उत्तर: ऐसा नाजुक पारिस्थितिक क्षेत्र जहाँ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले उद्योगों, खनन और बड़े निर्माण कार्यों पर कानूनी रोक होती है।
Q 4. इस योजना से पर्यावरण को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे नदियों के जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, कार्बन सिंक बढ़ेगा, मानसून चक्र नियंत्रित रहेगा और भीषण आपदाओं से बचाव होगा।
Q 5. पश्चिमी घाट का पारिस्थितिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह दुनिया के शीर्ष आठ ‘हॉटेस्ट हॉटस्पॉट’ में से एक है, जो भारत की 30% वनस्पतियों और जीवों को आश्रय देता है।
