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FAO एग्रीकोला मेडल

FAO एग्रीकोला मेडल

FAO Agricola Medal

संदर्भ:

हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम (इटली) में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था (FAO) द्वारा प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल 2026’ (Agricola Medal) से सम्मानित किया गया।

  • पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय शासनाध्यक्ष की FAO मुख्यालय की यह पहली यात्रा है। मनमोहन सिंह (2008) के बाद यह पदक प्राप्त करने वाले वे दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
  • पीएम मोदी ने इस वैश्विक सम्मान को भारत के 11 करोड़ से अधिक ‘अन्नदाताओं’ (किसानों), पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया है। 

एग्रीकोला मेडल (Agricola Medal) के बारे में:

  • सर्वोच्च वैश्विक सम्मान: यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा वैश्विक नेताओं को दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • नाम का अर्थ: ‘एग्रीकोला’ एक लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘किसान’ (Farmer) होता है।
  • स्थापना वर्ष: दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले दूरदर्शी नेताओं को सम्मानित करने के लिए इस पदक की शुरुआत वर्ष 1977 में की गई थी।
  • मुख्य उद्देश्य: यह पदक मुख्य रूप से गरीबी उन्मूलन, भूख मिटाने और वैश्विक पोषण स्तर में सुधार (UN सतत विकास लक्ष्य- SDG 1 और 2) के लिए प्रदान किया जाता है।
  • चयन का आधार: यह मेडल उन राष्ट्राध्यक्षों को मिलता है जिन्होंने अपने देश में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ ग्रामीण विकास के लिए उल्लेखनीय सुधार किए हों।
  • पुरस्कार स्थल: यह प्रतिष्ठित पदक FAO के महानिदेशक द्वारा रोम (इटली) स्थित ऐतिहासिक प्लेनरी हॉल में प्रदान किया गया।
  • प्रमुख वैश्विक प्राप्तकर्ता: अतीत में यह पदक चीनी राष्ट्रपति जियांग जेमिन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो और पोप जॉन पॉल द्वितीय जैसे वैश्विक नेताओं को मिल चुका है।

भारत को मेडल दिए जाने के मुख्य कारण:

  • 80 करोड़ नागरिकों का पोषण: भारत सरकार द्वारा संचालित विश्व की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY), की वैश्विक मंच पर सराहना की गई।
  • वित्तीय समावेशन: PM-KISAN योजना के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की है।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: भारत ने ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop) जैसी सूक्ष्म सिंचाई पहलों को बढ़ावा दिया है।
  • जलवायु-अनुकूल किस्में: पिछले 10 वर्षों में भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने लगभग 3,000 जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) फसल किस्में विकसित की हैं।
  • प्राकृतिक खेती: रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल माना गया। 
  • तकनीकी सशक्तिकरण: भारत ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण किया है। एआई-आधारित कृषि परामर्श प्रणालियों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और ‘किसान ड्रोन’ के माध्यम से कृषि को डेटा-संचालित और सटीक बनाया गया है। 
  • अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष: भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष (2023) ने वैश्विक पोषण सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाया है।
  • G20 अध्यक्षता: भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों’ (Agrifood Systems) को वैश्विक एजेंडे में शीर्ष स्थान दिलाया।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: भारत की विज्ञान-संचालित कृषि तकनीक विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद कर रही है।

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