Gollala Gudi Temple राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित, जानिए मंदिर की खासियत

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित प्राचीन गोल्लाला गुड़ी मंदिर (Gollala Gudi Temple) को ‘राष्ट्रीय महत्व का स्मारक’ (Monument of National Importance) घोषित किया गया.
गोल्लाला गुड़ी मंदिर के बारे में:
- परिचय: Gollala Gudi Temple, दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक उत्कृष्ट प्रतीक है. यह मंदिर तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में स्थित है.
- यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर के ठीक दक्षिण-पश्चिम में स्थित है.
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- कालखंड और राजवंश: यह मंदिर लगभग 12वीं से 13वीं शताब्दी ईस्वी का प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण प्रसिद्ध काकतीय राजवंश (Kakatiya Dynasty) के शासनकाल के दौरान किया गया था.
- निर्माण: मध्यकालीन दक्कन क्षेत्र में वास्तुकला को बढ़ावा देने के लिए काकतीय राजाओं और उनके सेनापतियों द्वारा इस धार्मिक परिसर का निर्माण करवाया गया था. इसके निर्माण में इंजीनियरिंग का उपयोग किया गया, जिसके तहत पत्थरों को बिना किसी गारे (Binding Mortar) के आपस में जोड़ा गया था. वर्तमान में इसका लगभग 60% ढांचा सुरक्षित पाया गया है.
- विशेषताएं:
- त्रिकुटालय शैली (Trikutalaya Style): स्थापत्य कला शैली (Architectural Style) के अनुसार यह एक ‘त्रिकुटालय’ मंदिर है. इसका अर्थ है कि इसमें तीन गर्भगृह (Sanctum Sanctorums) बने हुए हैं.
- विन्यास (Layout): मंदिर का एक मुख्य प्रवेश मंडप (Pillared Hall) पूर्व दिशा की ओर उन्मुख है. यह केंद्रीय मंडप उत्तर, दक्षिण और पश्चिम दिशा में स्थित तीन गर्भगृहों से जुड़ता है, जिनमें से प्रत्येक के आगे एक अंतराल (Antechamber) बना हुआ है. केंद्रीय गर्भगृह में एक शिवलिंग स्थापित है.
- अलंकरण और नक्काशी (Exquisite Carvings): मंदिर की बाहरी और आंतरिक दीवारों पर अद्भुत नक्काशी की गई है. प्रवेश द्वारों पर नक्काशीदार हंसों (Hansas) की पंक्तियां, बारीक जाली का काम (Jali Work) और गर्भगृह के मुख्य द्वारों पर ‘द्वारपालों’ (Dvarapalas) की मूर्तियां उकेरी गई हैं.
- प्रतिमा (Iconography): मंदिर की दीवारों और आलों (Niches) में भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और महिषासुरमर्दिनी (Mahiṣāsuramardinī) की उत्कृष्ट मूर्तियां स्थापित हैं. पूरा मंदिर एक ऊंचे चबूतरे (Jagati) पर टिका है, जिस पर पशु आकृतियां और पुष्प डिजाइन बने हुए हैं.
राष्ट्रीय महत्व का स्मारक दर्जा (National Monument Status): प्रक्रिया और लाभ
- प्रक्रिया: भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act, 1958) के प्रावधानों के तहत किसी साइट को चुनता है.
- इसके तहत एएसआई (ASI) पहले एक प्रारंभिक अधिसूचना (Preliminary Notification) जारी करता है और जनता से दो महीने के भीतर आपत्तियां या सुझाव मांगता है.
- इसके बाद भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अंतिम अधिसूचना प्रकाशित करके इसे राष्ट्रीय स्मारक (National Monument India) घोषित किया जाता है.
- गोल्लाला गुड़ी के लिए यह अधिसूचना 31 अगस्त 2026 को जारी की गई.
- लाभ:
- विधिक संरक्षण (Legal Protection): स्मारक के चारों ओर 100 मीटर का क्षेत्र ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (Prohibited Area) और अगले 200 मीटर का क्षेत्र ‘विनियमित क्षेत्र’ घोषित हो जाता है, जिससे वहां अवैध खनन या निर्माण नहीं हो सकता.
- वित्तीय और तकनीकी सहायता: अब एएसआई (ASI) हैदराबाद सर्कल वार्षिक संरक्षण योजना के तहत बजट आवंटित करके इसके जीर्णोद्धार, जलभराव की समस्या को दूर करने और पर्यटकों के लिए रास्तों का निर्माण करेगा.
- एकीकृत पर्यटन परिसर (Integrated Tourism Complex): यूनेस्को (UNESCO) की शर्तों के अनुसार, इस दर्जे के बाद राज्य सरकार द्वारा सौंपी गई 16 एकड़ भूमि पर रामप्पा मंदिर, शिव मंदिर और गोल्लाला गुड़ी को मिलाकर एक बड़ा सांस्कृतिक कॉरिडोर (Heritage Corridor) विकसित किया जाएगा.
भारत के कुछ अन्य प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के स्मारक:
इस सूची में वर्तमान में भारत के 3,689 स्मारक शामिल हैं, जिनमें से मुख्य हैं:
- ताजमहल (उत्तर प्रदेश)
- खजुराहो के मंदिर (मध्य प्रदेश)
- कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा)
- महाबलिपुरम के स्मारक (तमिलनाडु)
- गोलकोंडा किला (तेलंगाना)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q. गोल्लाला गुड़ी मंदिर कहां स्थित है?
उत्तर: यह ऐतिहासिक मंदिर भारत के तेलंगाना राज्य के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में, प्रसिद्ध रामप्पा मंदिर के समीप स्थित है.
Q. गोल्लाला गुड़ी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक क्यों घोषित किया गया?
उत्तर: इसकी सदियों पुरानी उत्कृष्ट वास्तुकला, काकतीय शिल्प कौशल और दुर्लभ त्रिकुटालय स्थापत्य विरासत को संरक्षित करने के लिए यह दर्जा दिया गया है.
Q. गोल्लाला गुड़ी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह 12वीं-13वीं शताब्दी के काकतीय राजवंश के काल का है, जो मध्यकालीन दक्कन की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक कूटनीति को दर्शाता है.
Q. इस मंदिर की प्रमुख स्थापत्य विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर: यह तीन गर्भगृहों वाला त्रिकुटालय मंदिर है, जो बिना गारे के पत्थरों से बना है और इस पर हंसों, द्वारपालों तथा महीषासुरमर्दिनी की नक्काशी है.
Q. राष्ट्रीय महत्व का स्मारक किसे कहा जाता है?
उत्तर: AMASR अधिनियम, 1958 के तहत एएसआई द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक संरचनाओं को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक (National Monument India) कहा जाता है.