ग्रेट निकोबार ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट (Great Nicobar Greenfield International Airport Project)
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने अंडमान और निकोबार के दक्षिणी छोर पर ग्रेट निकोबार ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट हेतु₹13,000 करोड़ के बजट को मंजूरी दी। जिसका संचालन भारतीय नौसेना द्वारा किया जाएगा।
ग्रेट निकोबार ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट क्या हैं?
- परिचय: यह भारत की समुद्री और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी हिस्सा है। यह Dual-use (नागरिक और सैन्य) हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया जाएगा। जिसे अगले 5 वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- यह परियोजना नीति आयोग द्वारा परिकल्पित ₹81,000 करोड़ के समग्र ‘ग्रेट निकोबार द्वीप विकास कार्यक्रम’ (GNIDP) का एक मुख्य स्तंभ है।
- इसे Andaman and Nicobar Islands Integrated Development Corporation (ANIIDCO) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
- रनवे की क्षमता: हवाई अड्डे पर 3,300 मीटर लंबा रनवे प्रस्तावित है, जो भारी सैन्य मालवाहक जहाजों, फाइटर जेट्स और चौड़े आकार के नागरिक वाणिज्यिक विमानों (Wide-body aircraft) को संभालने में सक्षम होगा।
- यात्री क्षमता: इस ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 4,000 पीक ऑवर पैसेंजर्स (PHP) की क्षमता के साथ डिजाइन किया जा रहा है। अनुमान है कि 2040 तक यहाँ सालाना 13.5 लाख यात्रियों की आवाजाही होगी।
- फंडिंग पैटर्न: परियोजना की ₹13,000 करोड़ की लागत को रक्षा मंत्रालय (MoD) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) द्वारा संयुक्त रूप से साझा किया जाएगा।
- जनजातीय कल्याण: द्वीप की संवेदनशील और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है:
- शौम्पेन और निकोबारी समुदाय: प्रोजेक्ट के विनिर्देशों के अनुसार, शौम्पेन (Shompen) और निकोबारी जनजातियों का कोई विस्थापन (No Displacement) नहीं किया जाएगा।
- ट्राइबल रिजर्व सुरक्षा: री-नोटिफिकेशन के माध्यम से जनजातीय आरक्षित क्षेत्र के शुद्ध दायरे में कमी नहीं आने दी जाएगी।
- समग्र विकास: यह एयरपोर्ट अकेले काम नहीं करेगा, बल्कि यह एक एकीकृत इकोसिस्टम का हिस्सा है:
- इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): गैलाथिया बे में 14.2 मिलियन TEU क्षमता का विशाल बंदरगाह।
- गैस और सौर ऊर्जा संयंत्र: द्वीप की आत्मनिर्भरता के लिए 450 MVA का हाइब्रिड पावर प्लांट।
- स्मार्ट टाउनशिप: लगभग 16,610 हेक्टेयर में फैली आधुनिक सिटी, जो भविष्य की आबादी और सेवा प्रदाताओं को आवश्यक बुनियादी ढांचा देगी।
Great Nicobar Airport Project का महत्व:
- चोक पॉइंट की निकटता: ग्रेट निकोबार द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) से मात्र 40 नॉटिकल मील (लगभग 140-180 किमी) की दूरी पर स्थित है।
- चीन अपनी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति के तहत हिंद महासागर में पैर पसार रहा है। यह एयरपोर्ट भारत को इस क्षेत्र में एक मजबूत मिलिट्री आउटपोस्ट प्रदान करेगा।
- मैरीटाइम सर्विलांस: इस एयरफील्ड का उपयोग भारतीय नौसेना के P-8I पोसाइडन (Poseidon) टोही विमानों और लड़ाकू जेट विमानों के संचालन के लिए किया जाएगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चौबीसों घंटे निगरानी (ISR Capabilities) संभव हो सकेगी।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: हवाई अड्डे का सीधा लिंक गैलाथिया बे (Galathea Bay) में बनने वाले इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) से होगा, जिससे वैश्विक कार्गो कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट संबंधी पर्यावरणीय पहलू:
ग्रेट निकोबार एक यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व (UNESCO Biosphere Reserve) है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को लेकर कड़ी नियामक शर्तें लागू की गई हैं:
- वन डायवर्जन: इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए अंडमान और निकोबार के कुल वन क्षेत्र का 1.82% हिस्सा डाइवर्ट किया जाएगा।
- वनीकरण (Compensatory Afforestation): द्वीपों पर पहले से ही 75% से अधिक वन होने के कारण, इसके बदले मुख्य भूमि भारत के हरियाणा राज्य में 97.30 वर्ग किमी भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण किया जाएगा।
- वन्यजीव संरक्षण: जैव विविधता (जैसे लेदरबैक कछुए, निकोबार मेगापोड और मगरमच्छ) की सुरक्षा और कोरल रीफ बहाली के लिए 30 वर्षों में ₹2,220.41 करोड़ का बजट आवंटित है।
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की मंजूरी: एनजीटी ने कड़े सुरक्षा उपायों और तटीय प्रबंधन शर्तों (CRZ मानदंडों) के साथ इस परियोजना को मंजूरी दी है।
FAQs:
Q1. ग्रेट निकोबार एयरपोर्ट प्रोजेक्ट क्या है?
यह ₹13,000 करोड़ की लागत वाला एक अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जिसका उपयोग नागरिक विमानन और भारतीय नौसेना दोनों (दोहरे उपयोग) के लिए किया जाएगा।
Q2. यह परियोजना कहाँ विकसित की जा रही है?
यह महत्वाकांक्षी परियोजना बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी छोर पर स्थित भारत के रणनीतिक द्वीप ग्रेट निकोबार (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) में विकसित की जा रही है।
Q3. परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की सैन्य निगरानी क्षमता को बढ़ाना, रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।
Q4. इस प्रोजेक्ट से क्या लाभ होंगे?
इससे नौसेना को अटूट विमान वाहक (परमानेंट बेस) मिलेगा, मलक्का जलडमरूमध्य पर निगरानी आसान होगी और वैश्विक समुद्री व्यापार गलियारे में भारत की पहुंच बढ़ेगी।
Q5. पर्यावरणीय चिंताएं क्या हैं?
मुख्य चिंताएं लगभग 130 वर्ग किमी वर्षावनों की कटाई (लाखों पेड़ों का नुकसान), प्राचीन शोंपेन व निकोबारी जनजातियों के प्राकृतिक आवास और दुर्लभ कछुओं (Leatherback Turtles) पर पड़ने वाला प्रभाव हैं।या बल (SDRF) और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी शामिल हैं।
