भारत का पहला निजी क्षेत्र मरीन गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स

संदर्भ:
हाल ही में भारत फोर्ज लिमिटेड (Bharat Forge Ltd.) ने भारत के पहले निजी क्षेत्र के मरीन गैस टर्बाइन (MGT) कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
निजी क्षेत्रीय मरीन गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स के बारे में:
- विकासकर्ता संस्था: भारत फोर्ज लिमिटेड (एयरोस्पेस डिवीजन के माध्यम से)।
- परियोजना स्थल: विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश रक्षा विनिर्माण गलियारा।
- क्षेत्रफल: लगभग 80 एकड़।
- सामरिक निकटता: यह सुविधा विशाखापट्टनम में नेवल डॉकयार्ड, आईएनएस एकशिला (INS Eksila) और पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय (ENC) के करीब सह-स्थित होगी।
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चरणबद्ध कार्यान्वयन: यह तकनीकी परियोजना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
- चरण 1: मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) परिसर: इस चरण में ब्लेड, वेन्स (vanes) और दहन लाइनर्स (combustion liners) का हॉट-सेक्शन रेस्टोरेशन किया जाएगा। इसमें कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और नॉन-डिस्ट्रक्टिव इवैल्यूएशन (NDE) प्रयोगशाला शामिल होगी।
- यह विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड के लिए 72-घंटे की टर्नअराउंड (TAT) क्षमता प्रदान करेगा, जिससे युद्धपोतों की सेवाक्षमता में तेजी आएगी।
- चरण 2: स्वदेशी विकास और असेंबली: इसके तहत भारत का पहला निजी क्षेत्र का मरीन गैस टर्बाइन डेवलपमेंट और असेंबली हॉल स्थापित होगा। सभी प्रोपल्शन रेटिंग के परीक्षण के लिए एक हॉट टेस्ट सेल (Hot Test Cell) का निर्माण किया जाएगा।
- पहली बार भारतीय धरती पर स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन का विकास और योग्यता प्रमाणीकरण (Qualification) किया जाएगा। [
महत्व:
- विदेशी निर्भरता में कमी: मरीन गैस टर्बाइन भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन युद्धपोतों (जैसे विध्वंसक और फ्रिगेट) की रीढ़ हैं। अब तक भारत रखरखाव और पुर्जों के लिए विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) पर निर्भर था। हाल के वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के कारण युद्धपोतों की मरम्मत में देरी हो रही थी। यह सुविधा इस निर्भरता को समाप्त करेगी।
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रक्षा विनिर्माण में भागीदारी: यह परियोजना भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक आदर्श बदलाव को दर्शाती है। अभी तक जटिल प्रोपल्शन प्रणालियों का प्रबंधन सार्वजनिक उपक्रमों या विदेशी फर्मों के पास था। निजी क्षेत्र में इस अत्याधुनिक क्षमता का आना देश के ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस’ को मजबूत करता है।
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क्षेत्रीय सहयोग: यह परिसर न केवल भारतीय नौसेना की सेवा करेगा बल्कि मित्र विदेशी नौसेनाओं (Friendly Foreign Navies) के लिए एक क्षेत्रीय मरम्मत और ओवरहॉल हब के रूप में भी काम करेगा। यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में ‘सुरक्षा प्रदाता’ (Net Security Provider) की भूमिका को सुदृढ़ करेगा।
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आर्थिक प्रभाव: इस निवेश से विशाखापट्टनम में लगभग 750 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अतिरिक्त, यह सटीक इंजीनियरिंग, धातुकर्म (metallurgy) और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में एक स्थानीय सूक्ष्म पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।