भारत-नेपाल संबंध (India-Nepal Relations)

संदर्भ:
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल 5 से 7 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। काठमांडू में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेतृत्व वाली प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह की नई सरकार के गठन के बाद यह किसी शीर्ष नेपाली मंत्री का पहला आधिकारिक दिल्ली दौरा है। जो भारत-नेपाल संबंध के लिए आवश्यक हैं।
- इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सहयोग, कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचों की समीक्षा, व्यापार एवं निवेश और सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना है।
भारत-नेपाल संबंध:
- साझा विरासत: दोनों देश हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म की साझी विरासत से जुड़े हैं। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी नेपाल में है, जबकि ज्ञान स्थली बोधगया भारत में है।
- रामायण सर्किट: भारत का अयोध्या और नेपाल का जनकपुर (माता सीता की जन्मस्थली) सांस्कृतिक रूप से आपस में जुड़े हुए हैं।
- रोटी-बेटी का संबंध: भारत के सीमावर्ती राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड) और नेपाल के नागरिकों के बीच सदियों से पारिवारिक और वैवाहिक संबंध रहे हैं।
- 1950 की शांति और मित्रता संधि (1950 Treaty): यह द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य कानूनी स्तंभ है। इसके तहत दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के यहाँ बिना किसी रुकावट के रहने, संपत्ति खरीदने और रोजगार पाने के समान अधिकार प्राप्त हैं।
- बफर स्टेट (Buffer State): नेपाल भारत और चीन के बीच एक प्राकृतिक बफर स्टेट के रूप में कार्य करता है, जो भारत की उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- खुली सीमा (Open Border): दोनों देश लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करते हैं, जो भारत के 5 राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम) से होकर गुजरती है।
- सैन्य सहयोग: भारत की ‘गोरखा रेजिमेंट’ (Gorkha Regiment) में नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को भर्ती किया जाता है। दोनों देशों की सेनाएं हर साल ‘सूर्य किरण’ (Surya Kiran) नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं। जून 2025 में पुणे में भारत-नेपाल द्विपक्षीय सुरक्षा सलाहकार समूह की 16वीं बैठक संपन्न हुई।
- सबसे बड़ा साझेदार: भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $7.33 बिलियन तक पहुंच गया।
- पारगमन सुविधा (Transit Facility): चारों तरफ से जमीन से घिरे (Landlocked) नेपाल को वैश्विक व्यापार के लिए भारत अपने बंदरगाहों के माध्यम से पारगमन सुविधाएं प्रदान करता है।
- डिजिटल भुगतान एकीकरण: डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने UPI भुगतान प्रणाली को एकीकृत किया है, जिससे सीमा पार वित्तीय लेनदेन बेहद आसान हो गया है।
- एकीकृत चेक पोस्ट (ICPs): व्यापार को सुगम बनाने के लिए बीरगंज (नेपाल का पहला ICP), विराटनगर, नेपालगंज और भैरहवा में एकीकृत चेक पोस्ट विकसित किए गए हैं।
- ऊर्जा सहयोग (Hydropower Projects): दोनों देशों के बीच 2024 लॉन्ग-टर्म पावर ट्रेड एग्रीमेंट प्रभावी है। इसके तहत नेपाल भारत को 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना (Pancheshwar Project) और अरुण-III जलविद्युत परियोजना पर काम जारी है।
- रेलवे और पाइपलाइन: जयनगर (भारत) से कुर्था (नेपाल) के बीच सीमा पार रेल लिंक चालू है। मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम पाइपलाइन दक्षिण एशिया की पहली सीमा पार पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन है।
India Nepal Bilateral Relations की हालिया चुनौतियां:
- सीमा विवाद: भारत और नेपाल के बीच लगभग 98% सीमा का सीमांकन हो चुका है, लेकिन सुस्ता और कालापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा क्षेत्र को लेकर विवाद बना हुआ है। वर्ष 2020 में नेपाल द्वारा जारी नए राजनीतिक मानचित्र को भारत ने ऐतिहासिक साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया था।
- जून 2026 में, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि गंडक नदी के मार्ग बदलने के कारण कुछ हिस्सों में सीमांकन का काम नेपाल-भारत तकनीकी समिति द्वारा संयुक्त रूप से जारी है।
- चीन कारक: नेपाल में चीन का बढ़ता बुनियादी ढांचा निवेश और ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) परियोजनाओं में नेपाल की भागीदारी भारत के लिए चिंता का विषय है।
- नेपाल की नई सरकार द्वारा सीमा विवाद में किसी तीसरे पक्ष (चीन या ब्रिटेन) को शामिल करने के संकेतों पर भारत ने कड़े शब्दों में कहा है कि यह एक शुद्ध द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
- आंतरिक सुरक्षा: खुली सीमा का दुरुपयोग करके जाली भारतीय मुद्रा, मानव तस्करी, माओवादी उग्रवाद और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) द्वारा समर्थित असामाजिक तत्वों की घुसपैठ भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह:
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighbourhood First) नीति के तहत दोनों देशों को आपसी ‘ट्रस्ट डेफिसिट’ (विश्वास की कमी) को दूर करना होगा।
- भारत को अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा करके नेपाल में अपनी विश्वसनीयता बढ़ानी चाहिए।
- विवादों को स्थापित राजनयिक तंत्र और द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी के साथ संबंध हमेशा मजबूत बने रहें।