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आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि कार्यक्रम (Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming)

आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि कार्यक्रम (Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming)

Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming

 

संदर्भ:

आंध्र प्रदेश के ‘सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि कार्यक्रम’ (APCNF) को वैश्विक खाद्य प्रणालियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए प्रतिष्ठित ‘फूड प्लैनेट पुरस्कार 2026’ (Food Planet Prize 2026) से सम्मानित किया गया।

आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि (APCNF)

आंध्र प्रदेश सामुदायिक प्रबंधित प्राकृतिक कृषि (APCNF) कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर कृषि-पारिस्थितिकी (Agroecology) का सबसे बड़ा, महिलाओं के नेतृत्व वाला और सरकार द्वारा प्रायोजित अनूठा आंदोलन है। 

  • इसका उद्देश्य रासायनिक कृषि पद्धतियों को पूरी तरह समाप्त कर प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है। 
  • यह मृदा जीव विज्ञान (Soil Biology), पौधों के माइक्रोबायोम और कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) के आधुनिक विज्ञान पर आधारित रसायन-मुक्त कृषि मॉडल है। 
  • इस अभिनव कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। यह पूर्ववर्ती राज्य परियोजना ‘सामुदायिक प्रबंधित सतत कृषि’ (CMSA) और ‘गैर-कीटनाशक प्रबंधन’ (NPM) पहलों के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित हुआ। 
  • यह आंध्र प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के तत्वावधान में संचालित है। 
  • इसका क्रियान्वयन एक गैर-लाभकारी सरकारी संस्था ‘रायथु साधिकारा संस्था’ (Rythu Sadhikara Samstha – RySS) द्वारा किया जाता है। 

मुख्य विशेषताएं:

  • महिला सामूहिक नेतृत्व: यह आंदोलन ग्रामीण स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और उनके संघों द्वारा संचालित किया जाता है, जो इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया की धुरी हैं।
  • सहकर्मी-से-सहकर्मी शिक्षण (Farmer-to-Farmer Extension): इसमें ‘सामुदायिक संसाधन व्यक्ति’ (CRPs), जो स्वयं सफल प्राकृतिक किसान हैं, साथी किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हैं।
  • इनपुट आत्मनिर्भरता: खेती के लिए आवश्यक जीवामृत और बीजामृत स्थानीय रूप से देशी पशुओं के गोबर और गोमूत्र से तैयार किए जाते हैं।
  • नवधान्य प्रणाली और कवर क्रॉपिंग: मृदा में नमी बनाए रखने के लिए वर्षभर हरी खाद (Year-round Cover Cropping) और 9 फसलों के पारंपरिक मिश्रण (Navadhanya) की बुआई की जाती है।
  • घरेलू सहयोग: इसे भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ (NMNF) और बजटीय संसाधनों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। 
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: जर्मन विकास बैंक (KfW), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), और सस्टेनेबल इंडिया फाइनेंस फैसिलिटी (SIFF) जैसी वैश्विक संस्थाएं वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करती हैं।

प्रमुख उपलब्धियां:

  • व्यापक प्रसार: यह वर्तमान में 18 लाख से अधिक किसान परिवारों और 8,168 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित हो चुका है।
  • महिला सशक्तिकरण: कार्यक्रम में 3,40,000 महिला SHGs सक्रिय रूप से जुड़ी हैं।
  • आर्थिक लाभ: रासायनिक खेती की तुलना में प्राकृतिक किसानों की शुद्ध आय में 38% से 66% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: खेती में 50% तक जल की बचत और प्रति एकड़ 46% तक ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में कमी देखी गई है।
  • वैश्विक अनुकरण: इस सफल भारतीय मॉडल को भारत के 22 राज्यों सहित श्रीलंका और जाम्बिया जैसे देशों में भी साझा किया जा रहा है। 

फूड प्लैनेट पुरस्कार:

  • परिचय: कर्ट बर्गफोर्स फूड प्लैनेट पुरस्कार (Curt Bergfors Food Planet Prize) वैश्विक खाद्य प्रणालियों को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ बनाने वाली पहलों को दिया जाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार है।
  • शुरुआत: इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2019 में की गई थी।
  • संस्थापक: स्वीडन के प्रसिद्ध व्यवसायी और परोपकारी कर्ट बर्गफोर्स (Curt Bergfors) ने अपनी निजी संपत्ति से 500 मिलियन SEK की पूंजी के साथ इसकी नींव रखी थी।
  • संस्था: यह पुरस्कार प्रतिवर्ष स्वीडन के स्टॉकहोम में स्थित ‘कर्ट बर्गफोर्स फाउंडेशन’ (Curt Bergfors Foundation) द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • पुरस्कार श्रेणियां: यह पुरस्कार मुख्य रूप से दो श्रेणियों में दिया जाता है: 
  1. सतत खाद्य प्रणालियों के लिए मौजूदा स्केलेबल समाधान: जो व्यावहारिक रूप से बड़े पैमाने पर लागू हो चुके हों।
  2. अभिनव पहल (Innovative Initiatives): ऐसे विचार या नवाचार जो भविष्य में वैश्विक खाद्य क्षेत्र को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखते हों। 
  • पात्रता मानदंड: इसके लिए दुनिया के किसी भी कोने (6 महाद्वीप) से व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन (NGOs), संस्थान, वैज्ञानिक समूह या सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की पहल नामांकन के पात्र हैं।
    • परियोजना का सीधे तौर पर खाद्य प्रणाली (उत्पादन, वितरण, प्रसंस्करण या उपभोग) से जुड़ा होना अनिवार्य है।
    • सबसे महत्वपूर्ण पात्रता यह है कि परियोजना पहले से स्थापित होने के बजाय, वित्तीय सहायता मिलने पर “दुनिया को बदलने की प्रबल संभावना” रखती हो।
  • चयन प्रक्रिया: फाउंडेशन की वेबसाइट पर साल भर नामांकन फॉर्म खुला रहता है, जहां कोई भी संस्थान स्वयं को या किसी अन्य पहल को नामांकित कर सकता है।
    • पुरस्कार की विशेषज्ञ टीम साक्ष्यों (Evidence), प्रभावशीलता (Impact) in और प्रासंगिकता के आधार पर प्राप्त हजारों नामांकनों की गहन समीक्षा करती है।
  • पहले एक लॉन्गलिस्ट बनाई जाती है, जिससे घटाकर 4 फाइनलिस्ट चुने जाते हैं। अंततः एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशिष्ट जूरी विजेता का निर्धारण करती है।
  • पुरस्कार राशि: मुख्य विजेता को 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (USD) की विशाल राशि प्रदान की जाती है।
  • इसके साथ ही, फाइनल में पहुंचने वाले अन्य प्रत्येक फाइनलिस्ट (Finalists) को 150,000 अमेरिकी डॉलर की सांत्वना राशि दी जाती है।

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