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क्रोटालारिया फुलेईनामक नामक पुष्पीय पौधे की नई प्रजाति (New species of flowering plant named Crotalaria phulei)

क्रोटालारिया फुलेईनामक नामक पुष्पीय पौधे की नई प्रजाति (New species of flowering plant named Crotalaria phulei)

New species of flowering plant named Crotalaria phulei

 

संदर्भ:

हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के पास खैरी-उमरेड वन (Khairi-Umred Forest) में क्रोटालारिया फुलेई (Crotalaria phulei) नामक पुष्पीय पौधे की एक नई प्रजाति खोजी गई।

क्रोटालारिया फुलेई के बारे मे:

  • नामकरण (Nomenclature): इस पौधे का नाम भारत की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के सम्मान में ‘क्रोटालारिया फुलेई’ रखा गया है। 
  • पादप कुल (Plant Family): यह पौधा फैबेसी (Fabaceae) कुल (मटर या फलीदार पौधों का परिवार) से संबंधित है। 
  • प्रकृति (Habit): यह एक कम ऊंचाई वाली झाड़ी (Undershrub) है, जिसकी अधिकतम ऊंचाई लगभग 1.5 मीटर तक होती है।
  • शारीरिक विशेषताएं (Morphological Features): इसकी नई और उभरती हुई शाखाएं चांदी जैसे चमकीले रेशमी बालों (Silvery silky hair) से ढकी होती हैं। 
    • इस पर लगभग 3.4 से 3.5 सेंटीमीटर आकार के बड़े और चमकीले पीले रंग के फूल खिलते हैं। 
  • अद्वितीय बीज (Unique Seeds): इसके बीजों का रंग मटमैला मलाईदार-जैतून (Creamy-olive mottled colour) होता है, जो क्रोटालारिया वंश (Genus) के अन्य पौधों में नहीं पाया जाता। 
  • पुष्पन और फलन चक्र (Flowering and Fruiting): इस पौधे में फूल आने का समय नवंबर से जनवरी के बीच होता है, जबकि दिसंबर से जनवरी के मध्य इसमें फल (फली) लगते हैं।
  • वितरण: यह प्रजाति मुख्य रूप से महाराष्ट्र के नागपुर क्षेत्र में स्थित खैरी-उमरेड वन शृंखला की स्थानीय प्रजाति के रूप में देखी गई है। शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forest) और पथरीली मिट्टी वाले खुले मैदानी इलाके इसका प्राथमिक प्राकृतिक आवास हैं। 
  • निकटतम प्रजातियां: वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy) के अनुसार, क्रोटालारिया फुलेई अपनी शारीरिक संरचना में मुख्य रूप से दो प्रजातियों के साथ निकटता प्रदर्शित करती है:
  1. क्रोटालारिया जुनसिया (Crotalaria juncea): इसे सामान्य भाषा में ‘सनहेम्प’ (Sunhemp) कहा जाता है और यह भारत में व्यापक रूप से पाई जाती है।
  2. क्रोटालारिया श्रीरंगियाना (Crotalaria shrirangiana): यह महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट (Western Ghats) क्षेत्र की एक स्थानिक प्रजाति है। 
  • संरक्षण स्थिति: अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN – International Union for Conservation of Nature) के मानदंडों के आधार पर शोधकर्ताओं ने प्रारंभिक तौर पर इसे ‘आंकड़ों का अभाव’ (Data Deficient – DD) श्रेणी में वर्गीकृत किया है। 

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:

  • रैटलपॉड का महत्व (Rattlepods Family): क्रोटालारिया वंश के पौधों को सामान्यतः रैटलपॉड (Rattlepods) कहा जाता है। 
    • परिपक्व होने पर इसके बीज फली के भीतर ढीले हो जाते हैं, जिससे हिलाने पर खिलौने जैसी झुनझुनी की आवाज (Rattling sound) आती है।
  • पारिस्थितिक लाभ (Ecological Significance): फैबेसी कुल का सदस्य होने के कारण यह पौधा राइजोबियम जीवाणु की सहायता से नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) में सक्षम है। 
    • यह स्थानीय मृदा की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने और हरित खाद (Green Manure) के रूप में सहायक हो सकता है।

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