India way to becoming electro-tech supply hub
संदर्भ:
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत स्वयं को दुनिया के लिए इलेक्ट्रो-टेक (Electro-Tech) आपूर्ति केंद्र के रूप में तेज़ी से स्थापित कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारत सौर ऊर्जा और बैटरी जैसे स्वच्छ विकल्पों के माध्यम से औद्योगीकरण का एक नया मार्ग चुन रहा है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): 2025 तक, भारत की कुल बिजली का 9% हिस्सा सौर ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है। भारत अब अपने कोयला उत्पादन के शिखर (peak) के करीब पहुँच रहा है।
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: भारत तीन-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, जहाँ 60% बाज़ार हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक मॉडल्स की है। यात्री ई-वाहनों की बिक्री भी कुल कार बिक्री के 5% के करीब पहुँच रही है।
- लागत दक्षता: जब चीन की बिजली खपत प्रति व्यक्ति 1,500 kWh थी, तब कोयला सौर ऊर्जा से 10 गुना सस्ता था। आज समान स्तर पर, भारत के लिए ‘सौर प्लस स्टोरेज’ की लागत नए कोयला संयंत्रों से आधी है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स का विस्तार: पिछले एक दशक में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग छह गुना बढ़कर $130 बिलियन हो गया है, जो इलेक्ट्रो-टेक क्षेत्र (सौर पैनल, बैटरी, EV) के लिए प्रवेश द्वार का काम कर रहा है।
भारत की प्रमुख रणनीतियाँ:
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नीतिगत समर्थन और विनिर्माण:
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- PLI 2.0 और ISM: सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के माध्यम से घरेलू क्षमताओं को मज़बूत कर रही है। ISM 2.0 के तहत 10 परियोजनाओं के लिए ₹1.60 लाख करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
- आत्मनिर्भरता: सौर मॉड्यूल उत्पादन 120 GW तक पहुँच गया है, जो भारत की घरेलू ज़रूरतों के लिए पर्याप्त है।
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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव:
- ‘चीन +1’ रणनीति: वैश्विक कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण के लिए भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही हैं।
- ऊर्जा संप्रभुता: भारत ने 2024 में जीडीपी का 3.6% जीवाश्म ईंधन आयात पर खर्च किया। इलेक्ट्रो-टेक का विकास इस वित्तीय बोझ को कम कर देश को ऊर्जा स्वतंत्र बनाएगा।
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तकनीकी गहराई और कौशल विकास:
- DLI योजना: ‘डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव’ के तहत 24 स्टार्टअप्स को समर्थन दिया जा रहा है और 30 स्वदेशी रणनीतिक चिपसेट विकसित करने की योजना है।
- कौशल विकास: ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ और ‘फ्यूचरस्किल्स प्राइम’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 1 लाख से अधिक इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
चुनौतियां:
- घटक पारिस्थितिकी तंत्र: भारत को उच्च-जटिलता वाले घटकों (High-complexity components) के निर्माण में अभी और निवेश की आवश्यकता है।
- पूंजी की लागत: भारत में वित्तपोषण की लागत (9-13%) प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक बनी हुई है।
