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फ्रंटलाइन युद्धपोत INS Mysore, ‘समुद्र लक्ष्मण’ अभ्यास में भाग लेने पहुंचा मलेशिया 

फ्रंटलाइन युद्धपोत INS Mysore, ‘समुद्र लक्ष्मण’ अभ्यास में भाग लेने पहुंचा मलेशिया 

INS Mysore

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत आईएनएस मैसूर (INS Mysore) द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण 2026’ में भाग लेने के लिए 9 सितंबर 2026 को मलेशिया के लुमुट नौसेना बेस (Lumut Naval Base) पर सफलतापूर्वक पहुंचा।

आईएनएस मैसूर के बारे में:

  • परिचय: आईएनएस मैसूर (D60) भारतीय नौसेना (Indian Navy) का एक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Guided-destroyer) है।
    • यह भारतीय नौसेना के विशिष्ट दिल्ली-क्लास (Delhi-class Destroyer) का दूसरा युद्धपोत है।
  • निर्माणकर्ता: इस युद्धपोत का निर्माण भारत की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड मझगांव डॉक लिमिटेड (Mazagon Dock Limited – MDL), मुंबई द्वारा किया गया था।
  • लॉन्च एवं कमीशन: इसे 4 जून 1993 को लॉन्च किया गया था और 2 जून 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में आधिकारिक रूप से कमीशन (Commissioned) किया गया था।
  • प्रोजेक्ट: इसका निर्माण ‘प्रोजेक्ट 15’ (Project 15) के तहत स्वदेशी डिजाइन के आधार पर किया गया था।
    • वर्तमान में यह नौसेना के पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • विशेषताएं:
    • आकार और विस्थापन: इस पोत की कुल लंबाई 163 मीटर (535 फीट) है और इसका पूर्ण भार विस्थापन (Full Load Displacement) लगभग 6,700 टन है।
    • प्रणोदन प्रणाली (Propulsion): यह पोत गैस टर्बाइन प्रणोदन (Combined Gas and Gas – COGAG) प्रणाली द्वारा संचालित होता है, जो इसे 32 समुद्री मील (Knots) से अधिक की शीर्ष गति प्रदान करती है।
    • हथियार और मिसाइल प्रणालियाँ:
      • यह लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों से लैस है।
      • हवाई खतरों से निपटने के लिए इसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Barak/Shtil SAM) लगी है।
      • इसमें 100 मिमी की मुख्य गन और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) शामिल हैं।
    • पनडुब्बी रोधी क्षमता (Anti-Submarine Warfare): यह पोत उन्नत सोनार प्रणालियों, टॉरपीडो लॉन्चर्स और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों (RBU-6000) से लैस है।
    • विमानन क्षमता: इसके डेक पर दो ध्रुव (ALH) या सी किंग (Sea King) हेलीकॉप्टर एक साथ तैनात किए जा सकते हैं, जो टोह लेने और हमले के मिशनों को अंजाम देते हैं।
  • उपलब्धियां:
    • सप्रेशन ऑफ पायरेसी (Anti-Piracy Operations): वर्ष 2008 में अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) में सोमाली समुद्री डाकुओं के खिलाफ ऑपरेशन में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां कमांडो ने कई पायरेसी प्रयासों को विफल किया और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की।
    • ऑपरेशन राहत (2015) और लीबिया रेस्क्यू (2011): खाड़ी देशों और उत्तरी अफ्रीका में भू-राजनीतिक संकट के दौरान, आईएनएस मैसूर ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों और विदेशी प्रवासियों को सुरक्षित बाहर निकालने (Non-combatant Evacuation Operations) में अद्वितीय योगदान दिया।
    • वैश्विक अभ्यास और कूटनीति: यह पोत संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ‘मालाबार’ (Malabar), रूस के साथ ‘इंद्र’ (INDRA) और ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका के साथ ‘इबसांमार’ (IBSAMAR) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों का हिस्सा रह चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: INS Mysore क्या है?

उत्तर: यह भारतीय नौसेना का एक शक्तिशाली स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Guided-missile Destroyer) है, जो दिल्ली-क्लास (Project 15) के अंतर्गत आता है।

प्रश्न 2: INS Mysore Malaysia क्यों पहुंचा?

उत्तर: यह युद्धपोत मलेशिया के लुमुट नौसेना बेस पर द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण 2026’ के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए पहुंचा है।

प्रश्न 3: INS Mysore ने Samudra Laksamana Exercise में क्या भूमिका निभाई?

उत्तर: आईएनएस मैसूर ने अभ्यास के बंदरगाह और समुद्री चरणों का नेतृत्व किया, जिसमें जटिल सामरिक युद्धाभ्यास, हेलीकॉप्टर संचालन और संयुक्त एंटी-पायरेसी ड्रिल शामिल हैं।

प्रश्न 4: INS Mysore Lumut कब पहुंचा?

उत्तर: अपनी निर्धारित परिचालन तैनाती (Naval Deployment) के तहत यह फ्रंटलाइन युद्धपोत 9 सितंबर 2026 को लुमुट (मलेशिया) पहुंचा।

प्रश्न 5: Samudra Laksamana में INS Mysore के साथ कौन शामिल है?

उत्तर: इस अभ्यास में आईएनएस मैसूर के साथ रॉयल मलेशियाई नौसेना के प्रमुख युद्धपोत केडी लेकिर (KD Lekir) और नौसैनिक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

प्रश्न 6: INS Mysore की deployment का क्या महत्व है?

उत्तर: यह तैनाती भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूत करती है, दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल बढ़ाती है और मलक्का जलडमरूमध्य के पास समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

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