इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस

संदर्भ:
हाल ही में सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने की पुष्टि की। सऊदी अरब इस गठबंधन में 26वें सदस्य के रूप में शामिल होने वाला नया देश बनने वाला है।
- यह घोषणा नई दिल्ली में 1-2 जून, 2026 को आयोजित होने वाले पहले IBCA शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है।
इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) क्या हैं?
भारत के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक पहल है, जिसे वैश्विक स्तर पर “पर्यावरण कूटनीति” का एक नया स्तंभ माना जा रहा है।
- इस गठबंधन की अवधारणा पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में वैश्विक मंच पर रखी गई थी।
- आधिकारिक तौर पर इसे 9 अप्रैल, 2023 को कर्नाटक के मैसूर में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लॉन्च किया गया।
- 23 जनवरी, 2025 को भारत सरकार द्वारा फ्रेमवर्क समझौते को मंजूरी मिलने के बाद, यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया।
- जून 2026 में नई दिल्ली में इसके पहले आधिकारिक शिखर सम्मेलन का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें “दिल्ली घोषणा” को अपनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रमुख उद्देश्य:
- IBCA का प्राथमिक लक्ष्य दुनिया की सात प्रमुख ‘बिग कैट’ प्रजातियों का संरक्षण करना है: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा। इनमें से पहली पांच प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं, जबकि जगुआर और प्यूमा का संरक्षण अन्य सदस्य देशों के सहयोग से किया जाएगा।
- गठबंधन का मुख्य ध्यान इन प्रजातियों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित करने, अवैध वन्यजीव व्यापार और शिकार को रोकने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर है।
- यह देशों को तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने हेतु एक साझा मंच प्रदान करता है।
संगठनात्मक ढांचा और शासन:
- गठबंधन का मुख्यालय और सचिवालय भारत (नई दिल्ली) में स्थित है।
- इसके शासन की मुख्य इकाई ‘असेंबली’ (Assembly) है, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और यह सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
- इसके कार्यों में सहायता के लिए एक ‘स्थायी समिति’ का गठन किया गया है। सचिवालय का नेतृत्व एक महानिदेशक करते हैं, जो दैनिक परिचालन और सदस्य देशों के बीच समन्वय सुनिश्चित करते हैं।
- यह बहु-एजेंसी मॉडल पर आधारित है जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन, संरक्षण विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र के भागीदार भी शामिल हो सकते हैं।
सदस्यता और वैश्विक भागीदारी:
- सऊदी अरब के 26वें सदस्य के रूप में शामिल होने के साथ ही, IBCA अब उन 95 से अधिक ‘रेंज देशों’ (जहाँ ये प्रजातियां प्राकृतिक रूप से रहती हैं) को एकजुट करने की क्षमता रखता है।
- संस्थापक देशों में भारत के अलावा रूस, नेपाल, भूटान, कंबोडिया, बांग्लादेश और कई अफ्रीकी राष्ट्र शामिल हैं।
- यूएनडीपी (UNDP) और आईयूसीएन (IUCN) जैसे 9 अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इसके साथ सहयोग कर रहे हैं।
वित्तीय ढांचा और बजटीय सहायता:
- भारत ने इस गठबंधन की शुरुआती स्थिरता के लिए 2023-24 से 2027-28 तक की पांच वर्षों की अवधि के लिए 150 करोड़ रुपये (लगभग $18 मिलियन) की एकमुश्त बजटीय सहायता का वादा किया है।
- इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे के निर्माण, तकनीकी ज्ञान का संग्रह तैयार करने और संरक्षण परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जा रहा है।
- प्रारंभिक अवधि के बाद, संगठन को सदस्य देशों की फीस, द्विपक्षीय व बहुपक्षीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के योगदान से आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
महत्व:
- IBCA भारत की वैश्विक “ग्रीन लीडरशिप” का परिचायक है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और बायोफ्यूल अलायंस की सफलता के बाद, भारत अब जैव-विविधता के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर रहा है।
- बिग कैट्स पारिस्थितिकी तंत्र की ‘कीस्टोन प्रजातियां’ हैं; उनका संरक्षण सीधे तौर पर जंगलों, जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने से जुड़ा है।
- सऊदी अरब जैसे देशों का इसमें शामिल होना न केवल वित्तीय मजबूती प्रदान करता है, बल्कि पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के बीच एक मजबूत संरक्षण गलियारा बनाने में भी मदद करता है।
- यह भारत के “वसुधैव कुटुंबकम” के दर्शन को पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से क्रियान्वित करता है। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और मानवता के सुरक्षित भविष्य के लिए पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की एक अनिवार्य वैश्विक प्रतिबद्धता है।