अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन

संदर्भ:
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) के उप-समिति ISO/TC 20/SC 14 (स्पेस सिस्टम्स एंड ऑपरेशंस) की 35वीं प्लेनरी (पूर्ण सत्र) और कार्य समूह (Working Group) की बैठकों की मेजबानी की।
अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन के बारे में:
- परिचय: अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय निकाय है जो वैश्विक स्तर पर उत्पादों, सेवाओं और प्रणालियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक अंतर्राष्ट्रीय मानक विकसित करता है।
- स्थापना: इसकी स्थापना 23 फरवरी 1947 को हुई थी। इसकी जड़ें 1920 के दशक के ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द नेशनल स्टैंडर्डाइजिंग एसोसिएशन’ (ISA) में हैं, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निलंबित कर दिया गया था।
- नाम की उत्पत्ति: “ISO” कोई संक्षिप्त नाम (abbreviation) नहीं है। यह ग्रीक शब्द ‘Isos’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘समान’। यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न भाषाओं में संगठन का नाम एक ही रहे।
- मुख्यालय: इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
- आधिकारिक भाषाएँ: अंग्रेजी, फ्रेंच और रूसी।
संगठनात्मक संरचना और सदस्यता:
ISO 168 से अधिक देशों के राष्ट्रीय मानक निकायों का एक नेटवर्क है। इसकी सदस्यता की तीन श्रेणियां हैं:
- सदस्य निकाय (Member Bodies): ये राष्ट्रीय मानक संगठन हैं जिन्हें मतदान का पूर्ण अधिकार होता है। जैसे भारत में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)।
- संवाददाता सदस्य (Correspondent Members): वे देश जो स्वयं मानकों को विकसित नहीं करते लेकिन निगरानी और टिप्पणी कर सकते हैं।
- ग्राहक सदस्य (Subscriber Members): वे देश जिनकी अर्थव्यवस्थाएं छोटी हैं और वे सीमित गतिविधियों में शामिल होते हैं। [10, 11]
प्रमुख कार्य:
- वैश्विक व्यापार सुगमता: समान मानक स्थापित करके, ISO अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बाधाओं को कम करता है।
- गुणवत्ता और सुरक्षा: उत्पादों और सेवाओं के लिए न्यूनतम सुरक्षा और प्रदर्शन मानदंड निर्धारित करना।
- वैज्ञानिक सहयोग: तकनीकी, वैज्ञानिक और आर्थिक गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना।
- नवाचार को बढ़ावा: नए उद्योगों (जैसे एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग) के लिए मानक बनाकर नवाचार को आधार प्रदान करना है।
मानक विकास की प्रक्रिया:
ISO स्वयं प्रमाणीकरण (certification) प्रदान नहीं करता है; यह केवल मानक बनाता है। मानक विकास का कार्य 800 से अधिक तकनीकी समितियों (TCs) और उपसमितियों द्वारा किया जाता है। यह प्रक्रिया पूर्णतः सर्वसम्मति (consensus) पर आधारित होती है, जिसमें उद्योग विशेषज्ञ, उपभोक्ता समूह और सरकारें शामिल होती हैं।
महत्वपूर्ण ISO मानक और हालिया अपडेट (2024-2025):
ISO ने अब तक 25,000 से अधिक मानक प्रकाशित किए हैं। कुछ प्रमुख लोकप्रिय मानक निम्नलिखित हैं:
- ISO 9001 (गुणवत्ता प्रबंधन): 2024 में इसमें लचीलेपन और डिजिटल परिवर्तन को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण अपडेट किए गए हैं।
- ISO 14001 (पर्यावरण प्रबंधन): यह पर्यावरणीय स्थिरता और कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर केंद्रित है।
- ISO/IEC 42001 (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस): 2023 के अंत में लॉन्च किया गया, यह एआई प्रबंधन प्रणालियों के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मानक है।
- ISO 37001:2025 (एंटी-ब्राइबरी): भ्रष्टाचार विरोधी प्रबंधन प्रणालियों के लिए नवीनतम मार्गदर्शिका।
- ISO 45001 (स्वास्थ्य और सुरक्षा): 2024 के अपडेट में मानसिक स्वास्थ्य और कर्मचारी कल्याण को भी शामिल किया गया है।
भारत की भूमिका:
- संस्थापक सदस्य: भारत ISO का संस्थापक सदस्य रहा है।
- प्रतिनिधित्व: भारत का प्रतिनिधित्व भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा किया जाता है।
- नेतृत्व: भारत ISO की परिषद (Council) और महत्वपूर्ण तकनीकी समितियों (जैसे हाल ही में आयोजित ISO/TC 20/SC 14 बैठक) में सक्रिय भूमिका निभाता है।
- प्रासंगिकता: भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के लिए उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु ISO मानकों का अनुपालन अनिवार्य है।