कलाइ-II जलविद्युत परियोजना | Kalai-II Hydroelectric Project
संदर्भ: हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में कलाइ-II जलविद्युत परियोजना (Kalai-II HEP) के लिए ₹14,105.83 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
कलाइ-II जलविद्युत परियोजना के बारे मे:
- अवस्थिति: यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में लोहित नदी (ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी) पर स्थित है।
- क्षमता: इसकी स्थापित क्षमता 1200 मेगावाट (MW) है, जिसमें 190 मेगावाट की 6 इकाइयां और 60 मेगावाट की 1 इकाई शामिल है।
- प्रकार: यह ‘रन-ऑफ-रिवर’ (Run-of-the-river) परियोजना है, जिसका अर्थ है कि यह बिजली पैदा करने के लिए नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करती है।
- कार्यान्वयन: इसे THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के एक संयुक्त उद्यम (JV) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।
- समय सीमा: इसके निर्माण की अनुमानित अवधि 78 महीने (लगभग 6.5 वर्ष) है।
- कुल निवेश: इसके निर्माण के लिए सरकार द्वारा ₹14,105.83 करोड़ की घोषणा की गई है।
- बजटीय सहायता: केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे (सड़कों, पुलों और ट्रांसमिशन लाइनों) के लिए ₹599.88 करोड़ की सहायता प्रदान करेगी।
- राज्य इक्विटी: राज्य की हिस्सेदारी के लिए ₹750 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) दी जाएगी।
महत्व:
- स्थानीय विकास: अरुणाचल प्रदेश को परियोजना से उत्पन्न बिजली का 12% हिस्सा मुफ्त मिलेगा।: स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (Local Area Development Fund) के लिए अतिरिक्त 1% बिजली निर्धारित की गई है, जिससे स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
- रोजगार: परियोजना से प्रभावित परिवारों के स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। जिससे आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित हो पाएगा।
- ऊर्जा सुरक्षा: यह प्रति वर्ष लगभग 4,852.95 मिलियन यूनिट बिजली पैदा करेगी, जो राष्ट्रीय ग्रिड के संतुलन और पीक डिमांड के प्रबंधन में सहायक होगी। यह परियोजना 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।
- लोहित बेसिन का विकास: यह लोहित बेसिन में बनने वाली पहली बड़ी जलविद्युत परियोजना है, जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने में सक्षम होगी।
- रणनीतिक स्थिति: अंजॉ जिला चीन की सीमा के करीब स्थित है। यहाँ बुनियादी ढांचे (जैसे 29 किमी लंबी सड़कें और पुल) का विकास भारत की सीमा सुरक्षा और पहुंच को मजबूत करता है।