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LAHDC Kargil Dissolved: कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद हुई भंग, जानिए क्या हैं इसकी वजह?

LAHDC Kargil Dissolved: कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद हुई भंग, जानिए क्या हैं इसकी वजह?

LAHDC Kargil Dissolved

संदर्भ:

हाल ही में लद्दाख प्रशासन (Ladakh Administration) ने 21 अक्टूबर 2026 को कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC Kargil) को तत्काल प्रभाव से भंग (De-constituted) किया।

LAHDC क्या है?

  • परिचय: यह छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के समान ही स्थानीय जनजातीय आबादी को विधायी और प्रशासनिक स्वायत्तता प्रदान करने का एक वैधानिक मॉडल है।
  • गठन: जुलाई 2003 में इसकी स्थापना हुई थी।
    • वर्ष 2019 में जब लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब से यह परिषद केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अंतर्गत आती है।
  • आधार: लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की स्थापना लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद अधिनियम, 1997 के तहत की गई थी। 
  • महत्व: यह परिषदें भूमि आवंटन, स्थानीय बजट निर्माण, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और प्राथमिक शिक्षा जैसे विषयों पर सीधे निर्णय लेने का अधिकार रखती हैं।

कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद भंग होने के मुख्य कारण:

  • नए जिलों का गठन और क्षेत्रीय सीमाओं का पुनर्गठन (Creation of New Districts): वर्ष 2026 की शुरुआत में गृह मंत्रालय की संस्तुति पर लद्दाख में पांच नए जिलों (द्रास, जांस्कर, सांकू, शम और नुब्रा) का निर्माण किया गया था।
    • राष्ट्रपति द्वारा लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (संशोधन) विनियमन, 2026 को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत लद्दाख के सभी 8 जिलों में ऐसी पहाड़ी परिषदों का विस्तार किया जा रहा है।
    • नए जिलों के गठन के कारण पुराने कारगिल जिले की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन (Reorganisation of Territorial Boundaries) अपरिहार्य हो गया था। 
    • सांकू, द्रास और जांस्कर जैसे क्षेत्रों को पूर्ववर्ती कारगिल जिले से अलग कर नए जिलों का प्रशासनिक दर्जा दिया गया है, जिससे पुरानी परिषद का अधिकार क्षेत्र बदल गया। 
  • जनप्रतिनिधियों का सामूहिक इस्तीफा (Resignation of Councillors): लद्दाख प्रशासन द्वारा परिषद को भंग करने के आधिकारिक आदेश से ठीक एक दिन पहले, 20 अक्टूबर 2026 को परिषद के शीर्ष नेतृत्व ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
  • मुख्य कार्यकारी पार्षद (Chief Executive Councillor – CEC) डॉ. मोहम्मद जाफर अखून सहित तीन कार्यकारी पार्षदों और छह अन्य पार्षदों ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया, जिससे परिषद में राजनीतिक गतिरोध (Political Deadlock) उत्पन्न हो गया था।
  • लोकतंत्र का नया प्रशासनिक खाका (New Grassroots Governance Blueprint): प्रशासन अब लद्दाख के सभी सात जिलों में अलग-अलग स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों (Autonomous Hill Development Councils) का विस्तार कर रहा है।
  • नए प्रशासनिक ऊंचे क्षेत्रों और नवगठित जिलों (जैसे सांकू परिषद) में स्थानीय स्तर पर विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली स्थापित करने के लिए पुरानी एकीकृत कारगिल परिषद को भंग करना आवश्यक माना गया। 

विघटन का प्रशासनिक प्रभाव और भावी रणनीति:

  • अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था (Interim Governance): परिषद के भंग होने के साथ ही मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) और सभी निर्वाचित या नामांकित सदस्यों की शक्तियां तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गई हैं।
    • अंतरिम उपाय के तौर पर, परिषद के सभी प्रशासनिक कार्य, कर्तव्य और वित्तीय शक्तियां अब कारगिल के उपायुक्त/मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Deputy Commissioner/CEO) में निहित कर दी गई हैं। 
  • निर्वाचन क्षेत्रों का नया सुदृढ़ीकरण (Notification of Constituencies): लद्दाख प्रशासन ने लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (Ladakh Autonomous Hill Development Council) के तहत पूरे क्षेत्र में त्रिस्तरीय चुनावी ढांचे को नया रूप देने के लिए कुल 100 निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) को अधिसूचित किया है, जो आठ अलग-अलग परिषदों में विभाजित होंगे। 
  • पंचायती राज चुनावों की घोषणा (Announcement of Panchayat Polls): कारगिल पहाड़ी परिषद समाचार (Kargil Hill Council News) के अनुसार, लोकतांत्रिक शून्यता को भरने के लिए लद्दाख राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने क्षेत्र में 21 नवंबर 2026 को पंचायत आम चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
  • इस घोषणा के साथ ही पूरे क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) प्रभावी हो गई है। 
  • चुनौती: वर्तमान में लद्दाख के स्थानीय नेता (जैसे लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस) पूर्ण राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में लद्दाख को शामिल करने की मांग को लेकर लगातार केंद्र सरकार से वार्ता कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: LAHDC Kargil क्या है और इसके मुख्य कार्य क्या हैं?

उत्तर: यह लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद अधिनियम, 1997 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है, जो कारगिल क्षेत्र में स्थानीय भूमि, आर्थिक विकास और बजटीय आवंटन का प्रबंधन करता है।

प्रश्न 2: LAHDC Kargil को 2026 में क्यों भंग किया गया?

उत्तर: नए जिलों (द्रास, जांस्कर, सांकू) के गठन के बाद सीमाओं के पुनर्गठन और मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) समेत कई पार्षदों के इस्तीफे के कारण इसे भंग किया गया।

प्रश्न 3: Kargil Hill Council Dissolution का स्थानीय प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: निर्वाचित परिषद की अनुपस्थिति में स्थानीय विकास कार्यों और नागरिक प्रशासन का नियंत्रण अंतरिम रूप से कारगिल के उपायुक्त (Deputy Commissioner) के पास चला गया है।

प्रश्न 4: LAHDC Kargil के नए चुनाव कब हो सकते हैं?

उत्तर: प्रशासन द्वारा नए जिलों के अनुसार क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (100 सीटों) के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगामी महीनों में नए चुनाव कराए जाएंगे।

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