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लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल

लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल

Long-Range Anti-Ship Hypersonic Missile

संदर्भ: 

हाल ही में DRDO (Defence Research and Development Organisation) द्वारा भारत ने मई 2026 में ओडिशा तट से एक स्वदेशी लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का सफल परीक्षण किया।

लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) क्या हैं?

हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल वह हथियार प्रणाली है जो मैक 5 (ध्वनि की गति से पांच गुना) या उससे अधिक की गति से यात्रा करती है। यह मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान दिशा बदलने में सक्षम है, जिससे इसे रडार द्वारा ट्रैक करना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकना लगभग असंभव हो जाता है।

  • इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है।
  • इसे विशेष रूप से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद की प्रयोगशालाओं (जैसे RCI और ASL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • भारत ने अपनी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया।
  • मिसाइल ने अपनी उड़ान के अंतिम चरण में उच्च स्तर की सटीकता के साथ लक्ष्य पर प्रहार किया, जिससे इसके टर्मिनल गाइडेंस और पैंतरेबाज़ी के मापदंडों की पुष्टि हुई।

प्रमुख विशेषताएं:

  • अत्यधिक गति: यह मैक 5+ की गति बनाए रखने में सक्षम है, जो दुश्मन के युद्धपोतों को प्रतिक्रिया करने या सुरक्षा कवच सक्रिय करने का समय नहीं देती।
  • मारक क्षमता (Range): इसकी रेंज 1,500 किलोमीटर से अधिक है, जो इसे लंबी दूरी के नौसैनिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए उपयुक्त बनाती है।
  • प्रणोदन (Propulsion): यह दो-चरणीय ठोस प्रणोदक प्रणाली का उपयोग करती है। इसमें उन्नत सामग्री का उपयोग किया गया है जो हाइपरसोनिक गति के दौरान उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी (Thermal Stress) को सहन कर सकती है।
  • पेलोड: यह विभिन्न प्रकार के हथियारों (Warheads) को ले जाने में सक्षम है और इसे विशेष रूप से बड़े नौसैनिक बेड़ों और विमान वाहक पोतों (Aircraft Carriers) को लक्षित करने के लिए बनाया गया है।
  • गाइडेंस सिस्टम: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत रडार सीकर और जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (Inertial Navigation System) लगी है।

रणनीतिक महत्व:

  • सी-डिनायल क्षमता (Sea-Denial Capability): 1,500 किमी की मारक क्षमता के साथ, भारत अब अपने तटों से काफी दूर दुश्मन के जहाजों को रोक सकता है। यह ‘Anti-Access/Area Denial’ (A2/AD) रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विशेष रूप से मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर से आने वाले संभावित खतरों के खिलाफ प्रभावी है।
  • वैश्विक एलीट क्लब में प्रवेश: इस सफल परीक्षण के साथ, भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के उस संभ्रांत समूह में शामिल हो गया है जिनके पास कार्यात्मक हाइपरसोनिक हथियार तकनीक है। यह भारत को एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में स्थापित करता है।
  • मिसाइल रक्षा प्रणाली की विफलता: वर्तमान में दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियां (जैसे S-400 या पैट्रियट) भी हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों को रोकने में संघर्ष करती हैं। इसकी गति और पैंतरेबाज़ी इसे एक ‘अजेय’ हथियार बनाती है।
  • हिंद महासागर में निवारण (Deterrence): हिंद महासागर क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी नौसेनाओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, यह मिसाइल एक मजबूत निवारक के रूप में कार्य करती है। यह सुनिश्चित करता है कि भारत के समुद्री हितों के खिलाफ कोई भी आक्रामक कार्रवाई भारी नुकसान का कारण बनेगी।

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