Nevado Ojos del Salado

संदर्भ:
हाल ही में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की प्रोफेसर अर्पिता पात्रा ने दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी, नेवाडो ओजोस डेल सलाडो (Nevado Ojos del Salado) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर एक नया इतिहास रचा। अर्पिता पात्रा ओजोस डेल सलाडो फतह करने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं।
नेवाडो ओजोस डेल सलाडो (Nevado Ojos del Salado) के बारे में:
- परिचय: पृथ्वी का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी और चिली की सबसे ऊंची चोटी है। एंडीज पर्वतमाला के मध्य में स्थित यह विशाल पर्वत अपनी अद्वितीय भौगोलिक विशेषताओं के कारण पूरी दुनिया के पर्वतारोहियों और वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
- नाम का अर्थ: स्पेनिश में इसके नाम का अर्थ “नमक के चश्मे/आंखें” (Eyes of the Salty) है, जो इसके हिमनदों में पाए जाने वाले विशाल नमक के निक्षेपों और लैगून को दर्शाता है।
- भौगोलिक स्थिति और सीमा: यह ज्वालामुखी दक्षिण अमेरिका की एंडीज पर्वतमाला में स्थित है और चिली तथा अर्जेंटीना की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फैला हुआ है। यह चिली के अटाकामा क्षेत्र और अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत के बीच सीमा निर्धारित करता है।
- रिकॉर्ड ऊंचाई: इसकी ऊंचाई 6,893 मीटर (22,615 फीट) है। यह विश्व का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी और पश्चिमी गोलार्ध की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है (एकॉनकागुआ के बाद)।
- ज्वालामुखी का प्रकार: यह एक स्ट्रैटोवोलकैनो (Stratovolcano) या मिश्रित ज्वालामुखी है, जिसका निर्माण समय के साथ लावा प्रवाह, राख और ज्वालामुखीय मलबे की परतों के जमने से हुआ है।
- विवर्तनिक महत्व: इसकी उत्पत्ति नाज़का प्लेट (Nazca Plate) के दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे दबने (Subduction) के कारण हुई है, जो इस क्षेत्र को भूगर्भीय रूप से सक्रिय बनाता है।
- दुनिया की सबसे ऊंची झील: इसके पूर्वी ढलान पर लगभग 6,390 मीटर की ऊंचाई पर एक स्थायी क्रेटर झील स्थित है, जिसे दुनिया की सबसे ऊंची झील माना जाता है।
- अत्यधिक शुष्क जलवायु: अटाकामा मरुस्थल के करीब होने के कारण यहाँ की जलवायु बेहद शुष्क है। इसी शुष्कता के कारण इतनी ऊंचाई के बावजूद यहाँ बहुत कम बर्फ और हिमनद (Glaciers) पाए जाते हैं।
- तापमान का अंतर: यहाँ दिन और रात के तापमान में भारी अंतर रहता है। दिन में तापमान 18°C तक जा सकता है, जबकि रात में यह -10°C से -30°C तक गिर जाता है।
- पहली चढ़ाई: इस शिखर पर पहली बार 26 फरवरी, 1937 को पॉलिश पर्वतारोही जान अल्फ्रेड स्ज़ेपांस्की और जस्टिन वोज्ज्निस ने सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।