स्नेक ईल की नई प्रजाति बास्कानिचथिस चेपाकाकिएन्सिस (New snake eel species Bascanichthys chepacaquiensis)
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संदर्भ:
हाल ही में वैज्ञानिकों ने बंगाल की खाड़ी में स्नेक ईल (Snake eel) की एक नई प्रजाति ‘बास्कानिचथिस चेपाकाकिएन्सिस’ (Bascanichthys chepakakiensis) की खोज की।
‘बास्कानिचथिस चेपाकाकिएन्सिस’ (Bascanichthys chepakakiensis) के बारे में:
- वर्गीकरण (Taxonomy): यह ‘ओफिचिथिडे’ (Ophichthidae) परिवार के ‘बास्कानिचथिस’ (Bascanichthys) वंश से संबंधित है।
- नाम का स्रोत: ‘चेपाकाकिएन्सिस’ (chepakakiensis) शब्द स्थानीय तेलुगु भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है।
- इसमें ‘चेपा’ (chepa) का अर्थ “मछली” और ‘काकी’ (kaki) काकीनाडा शहर का संक्षिप्त नाम है। इसका पूर्ण शाब्दिक अर्थ “काकीनाडा की मछली” है।
- खोज स्थल (Discovery Site): इस प्रजाति का पहला पूर्ण नमूना (Holotype) आंध्र प्रदेश के Kakinada Fishing Harbour से वाणिज्यिक नौकाओं के आकस्मिक उप-पकड़ (by-catch) के रूप में प्राप्त हुआ था। इसका दूसरा नमूना ओडिशा के अर्जयपल्ली मछली लैंडिंग केंद्र से मिला।
- द्विवर्णी शरीर (Bicoloured Body): इसका शरीर विशिष्ट रूप से दो रंगों का मिश्रण है।
- इसकी पीठ हल्के भूरे रंग की है, जो मध्य भाग में जैतून-धूसर (olive-grey) और पेट की तरफ हल्के रंग में बदल जाती है।
- शारीरिक बनावट (Morphology): इसका थूथन (snout) अपने निकटतम सहयोगियों की तुलना में काफी छोटा और गहरा भूरा होता है।
- इसके जबड़ों में दांतों की व्यवस्था (tooth arrangement) विशिष्ट है।
- इसके गुदा पख (anal fin) से पहले कशेरुकाओं (vertebrae) की संख्या काफी कम होती है।
- इसके पेक्टोरल फिन (pectoral fins) अत्यधिक सूक्ष्म और फ्लैप जैसे होते हैं, जो बमुश्किल दिखाई देते हैं।
- अनुसंधान: इस प्रजाति की पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने पारंपरिक भौतिक माप (Morphological Analysis) के साथ-साथ आधुनिक डीएनए बारकोडिंग (DNA Barcoding) तकनीक का उपयोग किया।
- शोधकर्ताओं ने इसके माइटोकॉन्ड्रियल जीन COI (mitochondrial gene COI) को लक्षित कर जेनेटिक परीक्षण किया, जिससे इसके एक नई प्रजाति होने की पुष्टि हुई।
- पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem): यह मुख्य रूप से उथले समुद्री तटीय रेत और गाद में पीछे की तरफ से बिल (burrow) बनाकर रहती है।
- ऐतिहासिक अंतराल (Historical Gap): भारतीय जलक्षेत्र में इस वंश की यह केवल दूसरी प्रजाति है।
- इससे पहले लगभग छह दशक पहले ‘बास्कानिचथिस डेरानियागालाई’ (Bascanichthys deraniyagalai) को दर्ज किया गया था।
- वैश्विक स्थिति (Global Context): इस नई खोज के साथ ही दुनिया भर में बास्कानिचथिस स्नेक-ईल प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर 20 हो गई है।
| स्नेक ईल (Snake Eel):शारीरिक बनावट: इनका शरीर लंबा और बेलनाकार होता है। अधिकांश प्रजातियों में पूंछ का सिरा नुकीला और सख्त होता है, जिसकी मदद से ये रेत में पीछे की तरफ से बिल (Burrow) बनाती हैं।आवास (Habitat): ये दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय (Tropical) और समशीतोष्ण (Temperate) महासागरों के उथले तटीय पानी, मूंगे की चट्टानों (Coral Reefs) और रेतीले समुद्र तल में पाई जाती हैं।जीवन शैली: ये मुख्य रूप से निशाचर (Nocturnal) जीव हैं, जो दिन में रेत में छिपी रहती हैं और रात में शिकार (छोटे केकड़े, झींगे और मछलियां) के लिए निकलती हैं। |
FAQs:
1. बास्कानिचथिस चेपाकाकिएन्सिस क्या है?
यह बंगाल की खाड़ी में खोजी गई स्नेक ईल (Snake Eel) की एक नई द्विवर्णी (bicoloured) समुद्री मछली प्रजाति है।
2. यह नई प्रजाति कहाँ खोजी गई?
यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट और ओडिशा के अर्जयपल्ली मछली लैंडिंग केंद्र के पास खोजी गई।
3. स्नेक ईल क्या होती है?
यह सांप जैसे दिखने वाली समुद्री मछली है, जो गलफड़ों से सांस लेती है और रेतीले समुद्र तल में बिल बनाकर रहती है।
4. इस खोज का महत्व क्या है?
यह भारत की समृद्ध समुद्री जैव विविधता (Marine Biodiversity) को दर्शाती है और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के दस्तावेज़ीकरण में मदद करती है।हारिक रूप देने का कार्य करती है।
