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अमोलोप्स कमल नामक मेंढक की नई प्रजाति की खोज

अमोलोप्स कमल नामक मेंढक की नई प्रजाति की खोज

New species of frog called Amolops lotus discovered

 

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने नागालैंड के किफिरे जिले में पहाड़ी झरनों के पारिस्थितिकी तंत्र से ‘अमोलोप्स कमल’ (Amolops kamal) नामक एक नई ‘कैस्केड मेंढक’ (Cascade Frog) प्रजाति की खोज की।

मेंढक की नई प्रजाति “अमोलोप्स कमल” के बारे में:

  • वर्गीकरण (Taxonomy): यह मेंढक रैनिडी (Ranidae) परिवार के अंतर्गत आता है, जिसे ‘सच्चे मेंढकों’ (True Frogs) का मुख्य कुल माना जाता है। 
    • वैश्विक स्तर पर इस जीनस में लगभग 90 प्रजातियां मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें से अब तक 20 प्रजातियां भारत से दर्ज की जा चुकी हैं।
  • नामकरण: इस नई प्रजाति का नाम ‘अमोलोप्स कमल’ गुवाहाटी के बी. बरूआ कॉलेज के दिवंगत प्राणी विज्ञानी और प्राध्यापक डॉ. कमल चौधरी के सम्मान में रखा गया है।
  • भौगोलिक क्षेत्र: यह मेंढक भारत-म्यांमार सीमा के निकट नागालैंड के किफिरे जिले (Kiphire District) में स्थित सिंग्रेप गांव (Singrep Village) में पाया गया है।
  • खोजकर्ता टीम: इसकी खोज भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) शिलोंग के वैज्ञानिक भास्कर सैकिया के नेतृत्व में छह शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम द्वारा की गई।
  • कैस्केड हैबिटेट: अमोलोप्स वंश के मेंढकों को आम तौर पर ‘टोरेंट फ्रॉग’ या ‘कैस्केड मेंढक’ कहा जाता है। ये विशेष रूप से पहाड़ों में अत्यधिक तेज बहाव वाली जलधाराओं और झरनों (Cascades) के आसपास ही जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
  • शारीरिक संरचना: पानी के प्रचंड वेग में पत्थरों पर खुद को टिकाए रखने के लिए इनके पैरों की उंगलियों के अग्रभाग चौड़े और अत्यधिक चिपचिपे होते हैं।
  • पर्यावरण के बायो-इंडिकेटर: पहाड़ी झरनों के साफ पानी में रहने के कारण ये मेंढक अपने स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के सूचक (Bio-indicators) होते हैं। प्रदूषण या तापमान में मामूली बदलाव भी इनकी आबादी को प्रभावित करता है।

पहचान की तकनीक:

वैज्ञानिकों को इस प्रजाति को अलग साबित करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लेना पड़ा:

  • शारीरिक समानता की चुनौती: अमोलोप्स वंश के मेंढक बाह्य रूप (Morphology) से एक-दूसरे के इतने समान होते हैं कि केवल देखकर इनकी सटीक पहचान करना लगभग असंभव होता है।
  • डीएनए विश्लेषण: इसके लिए वैज्ञानिकों ने ‘इंटीग्रेटिव टैक्सोनॉमी’ का उपयोग किया, जिसके तहत शारीरिक संरचना के साथ-साथ आणविक फाइलोजेनेटिक विश्लेषण (Molecular Phylogenetic Analysis) यानी डीएनए मैपिंग की गई।
  • क्रिप्टिक प्रजाति परिसर (Cryptic Species Complex): जांच में सामने आया कि यह मेंढक वास्तव में अमोलोप्स इंडोबर्मानेन्सिस (Amolops indoburmanensis) प्रजाति परिसर का हिस्सा है। 
    • पहले जिसे एक ही व्यापक प्रजाति माना जाता था, वह असल में कई अलग-अलग आनुवंशिक और विकासवादी वंशों का समूह है, जिसमें से ‘अमोलोप्स कमल’ एक स्वतंत्र प्रजाति के रूप में उभरा है। 

प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (ZSI) के बारे में:

  • स्थापना: 1916 (मुख्यालय: कोलकाता)।
  • मंत्रालय: यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत एक अधीनस्थ संगठन है।
  • कार्य: देश के समृद्ध जीव-जंतुओं के सर्वेक्षण, अन्वेषण और अनुसंधान को बढ़ावा देना।

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