भारत में पहली बार पक्षी वायरस PaBV-4 की हुई पहचान
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों के बहु-संस्थागत दल ने पहली बार भारत में बंदी तोतों में तेजी से फैलने वाले और अत्यंत घातक पैरेट बोर्नाविरस 4 (PaBV-4) नामक पक्षी वायरस की आनुवंशिक उपस्थिति दर्ज की।
PaBV-4 पक्षी वायरस के बारे में:
- परिचय: पैरेट बोर्नाविरस 4 (PaBV-4) एक अत्यधिक संक्रामक, सिंगल-स्ट्रैंडेड आरएनए (RNA) वायरस है।
- यह ‘ऑर्थोबोर्नाविरस अल्फाप्सिटासिफॉर्म’ (Orthobornavirus alphapsittaciforme) प्रजाति समूह और बोर्नाविरिडे (Bornaviridae) परिवार से संबंधित है।
- यह तोता परिवार के पक्षियों (Psittacine Birds) में होने वाले प्रोवेंट्रिकुलर डिलाटेशन डिजीज (PDD) का मुख्य कारण है।
- पहचान: वैश्विक स्तर पर इसे पहली बार वर्ष 2008 में पहचाना गया था।
- यह उत्तरी अमेरिका (अमेरिका, कनाडा), दक्षिण कोरिया, जापान, इज़राइल और यूरोप में फैला था।
- भारत में हालिया अध्ययन के दौरान असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के प्रमुख एवियरी (पक्षीशाला) हब में इसके संक्रमण की पुष्टि हुई।
- संचरण: यह वायरस संक्रमित पक्षी की लार (Saliva), क्लोकल स्राव, दूषित भोजन, पानी और बीट (Faeces) के माध्यम से फैलता है।
- इसके साथ ही यह माता-पिता से अंडों में भी संचारित हो सकता है।
- लक्षित समूह: यह मुख्य रूप से सिटासिफोर्मेस (Psittaciformes) गण के पक्षियों जैसे मैकाऊ, कॉकटेल, बडगेरिगार, लवबर्ड और पैराकीट्स को प्रभावित करता है।
- प्रमुख लक्षण: PDD रोग के कारण पक्षी का प्रोवेंट्रिकुलस (ग्रंथिल पेट) सूजकर फैल जाता हैं।
- लक्षणों में भोजन न पचना, बीट में साबुत दाने आना, तेजी से वजन घटना (वेस्टिंग सिंड्रोम), कमजोरी, कंपकंपी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने से संतुलन खोना शामिल है।
- असर: यह एक नॉन-साइटोलिटिक (Non-cytolytic) संक्रमण है, जिसका अर्थ है कि वायरस स्वयं कोशिकाओं को नष्ट नहीं करता।
- मृत पक्षियों में इसकी मृत्यु दर 88% तक देखी गई है, जबकि 19% पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले पक्षी भी इसके स्पर्शोन्मुख (Asymptomatic) वाहक पाए गए हैं।
- उपचार: वर्तमान में इस वायरस का कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार या प्रमाणित वैक्सीन (टीका) उपलब्ध नहीं है।
- प्रभावित पक्षियों को केवल सहायक चिकित्सा (Supportive Care) जैसे सुपाच्य भोजन और सूजन कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं।
- अतः गहन संगरोध (Quarantine) और आरटी-पीसीआर (RT-PCR) स्क्रीनिंग ही एकमात्र सुरक्षा उपाय हैं।
अन्य प्रमुख पक्षी वायरस (Avian Viruses):
- एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza – H5N1): इसे आमतौर पर ‘बर्ड फ्लू’ कहा जाता है। यह इन्फ्लूएंजा ए वायरस के कारण जंगली और पालतू पक्षियों में श्वसन तंत्र का अत्यधिक घातक संक्रमण पैदा करता है। इसमें जूनोटिक (Zoonotic) क्षमता होती है, जिससे यह मनुष्यों में भी फैल सकता है।
- न्यूकैसल रोग वायरस (Newcastle Disease Virus – NDV): यह एक पैरामिक्सोवायरस है जो मुर्गियों सहित कई घरेलू और जंगली पक्षी प्रजातियों को प्रभावित करता है। इसके कारण पक्षियों में गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, श्वसन और तंत्रिका संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं।
- सिटासीन बीक एंड फेदर डिजीज वायरस (BFDV): यह एक सर्कोवायरस है जो तोतों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है, जिससे उनके पंख और चोंच असामान्य रूप से विकृत हो जाते हैं। यह बंदी प्रजनन कार्यक्रमों के लिए एक बड़ा खतरा है।
- पक्षी चेचक वायरस (Avian Pox Virus): पॉक्सविरिडे परिवार का यह वायरस पक्षियों की त्वचा पर मस्सेदार गांठें (त्वचीय रूप) या ऊपरी श्वसन मार्ग में झिल्लियाँ (डीफ्थेरिटिक रूप) बनाता है, जिससे तोते और गौरैया जैसी प्रजातियाँ सर्वाधिक प्रभावित होती हैं।
FAQs:
1. PaBV-4 क्या है?
यह तोतों में जानलेवा प्रोवेंट्रिकुलर डिलाटेशन डिजीज (PDD) पैदा करने वाला एक घातक आरएनए वायरस है।
2. इसकी पुनःखोज/पहचान कहाँ हुई?
भारत में पहली बार इसकी पुष्टि असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के बंदी पक्षीशाला परिसरों में हुई है।
3. यह वायरस पक्षियों में कैसे फैलता है?
यह संक्रमित पक्षी की लार, बीट, दूषित भोजन, पानी और अंडों के माध्यम से फैलता है।
4. इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
यह भारत में विदेशी पक्षी व्यापार और वन्यजीव महामारियों की वैज्ञानिक निगरानी व डेटाबेस को मजबूत करेगा।
5. क्या यह वायरस मनुष्यों के लिए खतरनाक है?
नहीं, वर्तमान वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुसार पैरेट बोर्नाविरस (PaBV-4) मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता है।
6. इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?
पक्षियों का वजन तेजी से घटना, अपचित भोजन की बीट आना और तंत्रिका असंतुलन इसके लक्षण हैं।
7. इस वायरस का उपचार या वैक्सीन क्या है?
इसका कोई सटीक उपचार या टीका नहीं है; जैव-सुरक्षा और पृथक्करण ही एकमात्र बचाव है।
8. यह खोज किस वैज्ञानिक दल ने की?
यह खोज गुवाहाटी स्थित असम पशु चिकित्सा और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में की गई।
9. यह किन पक्षियों को प्रभावित करता है?
यह मुख्य रूप से तोता कुल (Psittacine) के पक्षियों जैसे मैकाऊ, कॉकटेल और पैराकीट्स को प्रभावित करता है।
